TREESCAPES 2026ः टिकाऊ विकास के लिए एग्रो-फॉरेस्ट्री पर दक्षिण एशिया की पहली कांग्रेस

CIFOR-ICRAF और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) 5 से 7 फरवरी, 2026 तक नई दिल्ली में TREESCAPES 2026 का आयोजन करेंगे। यह दक्षिण एशिया का पहला ऐसा विशेष सम्मेलन है जो पूरी तरह से कृषि-वानिकी और 'वनों के बाहर पेड़ों' (Trees Outside Forests) पर आधारित है। यह इवेंट क्लाइमेट-रेजिलिएंट तथा पेड़-आधारित खेती के सिस्टम को बढ़ाने पर फोकस करेगा ताकि रोजी-रोटी, कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन और सस्टेनेबल ग्रोथ को बढ़ावा मिल सके।

TREESCAPES 2026ः  टिकाऊ विकास के लिए एग्रो-फॉरेस्ट्री पर दक्षिण एशिया की पहली कांग्रेस

एग्रोफॉरेस्ट्री को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए सेंटर फॉर इंटरनेशनल फॉरेस्ट्री रिसर्च – इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च इन एग्रोफॉरेस्ट्री (CIFOR-ICRAF), इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) के साथ मिलकर TREESCAPES 2026 का आयोजन करेगा। यह 5 से 7 फरवरी तक नई दिल्ली स्थित नेशनल एग्रीकल्चरल साइंस कॉम्प्लेक्स (NASC) के पूसा कैंपस में होगा। यह दक्षिण एशिया का पहला ऐसा विशेष सम्मेलन है जो पूरी तरह से कृषि-वानिकी और 'वनों के बाहर पेड़ों' (Trees Outside Forests) पर आधारित है।

इस तीन दिवसीय सम्मेलन का लक्ष्य कृषि-वानिकी और 'वनों के बाहर पेड़ों' (TOF) को पूरे दक्षिण एशिया में जलवायु-अनुकूल परिदृश्य, टिकाऊ आजीविका और आर्थिक विकास के लिए बड़े पैमाने पर अपनाए जाने वाले समाधान के रूप में स्थापित करना है। इस आयोजन में नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और सिविल सोयायटी के प्रतिनिधियों, किसानों और युवाओं के भाग लेने की उम्मीद है।

यह कार्यक्रम कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा। इनमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, नेपाल के कृषि और पशुधन विकास मंत्री मदन प्रसाद परियार, मालदीव के कृषि और पशु कल्याण राज्य मंत्री अहमद हसन दीदी और हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह शामिल हैं।

कृषि-वानिकी के विस्तार की तात्कालिकता पर प्रकाश डालते हुए भारत में CIFOR-ICRAF के कंट्री डायरेक्टर मनोज डबास ने कहा कि वृक्ष-आधारित प्रणालियां पहले से ही भारत के कार्बन स्टॉक का लगभग 19.3% हिस्सा हैं। ये वर्ष 2030 तक 200 करोड़ टन से अधिक कार्बन डाइ ऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन कम करने में मदद कर सकती हैं। 

उन्होंने कहा कि 86% से अधिक भारतीय किसान सीमांत श्रेणी में आते हैं, इसलिए कार्बन फाइनेंस, नीतिगत ढांचे और स्थानीय रूप से अनुकूल कृषि-वानिकी प्रथाओं का समन्वय करना महत्वपूर्ण है। लकड़ी के आयात पर भारत की बढ़ती निर्भरता (सालाना 7 अरब डॉलर से अधिक) भी घरेलू वृक्ष-आधारित उत्पादन प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता को बताती है।

TREESCAPES 2026 में डिजिटल टूल, सुरक्षित जल वाले क्षेत्र, किसानों की अगुवाई वाले नवाचार, फाइनेंसिंग, सर्टिफिकेशन, वैल्यू चेन, कार्बन बाजार, बीज प्रणाली, बायोइकोनॉमी के अवसर और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं पर आधारित विषयगत सत्रों के माध्यम से नीतिगत, रेगुलेटरी और संस्थागत खामियों को दूर करने पर विचार किया जाएगा।

FAO की 'स्टेट ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर 2025' रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्तर पर लगभग 170 करोड़ लोग उन क्षेत्रों में रहते हैं जो भूमि क्षरण के कारण घटती फसल पैदावार से प्रभावित हैं। शोध बताते हैं कि वनों की कटाई और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में कृषि-वानिकी की बड़ी भूमिका है। ICAR के शोध भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि कृषि-वानिकी खाद्य उत्पादन से समझौता किए बिना बड़ी मात्रा में कार्बन सोखने में सक्षम है।

CIFOR-ICRAF और ICAR द्वारा CAFRI, नाबार्ड (NABARD) और IIFM जैसे भागीदारों के सहयोग से आयोजित TREESCAPES 2026, भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं और 2070 तक 'नेट-जीरो' लक्ष्यों को पाने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।

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