सब्जियों और दालों के दाम घटने से फरवरी में शाकाहारी थाली की कीमत स्थिर, लेकिन मांसाहारी थाली सस्ती: क्रिसिल
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में घर पर तैयार शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर स्थिर रही, जबकि मांसाहारी थाली 3% सस्ती हुई। प्याज, आलू और दालों की कीमतों में गिरावट ने टमाटर की तेज बढ़ोतरी के असर को संतुलित किया, जबकि ब्रॉयलर चिकन के दाम घटने से मांसाहारी थाली की लागत कम हुई।
फरवरी में घर पर तैयार की जाने वाली शाकाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर स्थिर रही, जबकि मांसाहारी थाली की लागत में 3% की गिरावट दर्ज की गई। यह जानकारी रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की तरफ से जारी “रोटी राइस रेट” इंडेक्स रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार शाकाहारी थाली की कीमत स्थिर रहने के पीछे अलग-अलग खाद्य पदार्थों की कीमतों में हुए उतार-चढ़ाव का असर रहा। प्याज, आलू और दालों की कीमतों में गिरावट ने टमाटर की कीमतों में तेज वृद्धि के प्रभाव को संतुलित कर दिया।
टमाटर की कीमत फरवरी 2026 में सालाना आधार पर 43% बढ़कर लगभग 33 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एक वर्ष पहले फरवरी 2025 में यह लगभग 23 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस वृद्धि का मुख्य कारण नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच मंडियों में आवक में कमी रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि देरी से रोपाई होने के कारण फसल उत्पादन प्रभावित हुआ, जिससे इस अवधि में मंडियों में आवक लगभग 32% घट गई और आपूर्ति सीमित हो गई।
इसके विपरीत, प्याज की कीमतों में सालाना आधार पर 24% की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट बाजार में देर से आई खरीफ फसल के कारण आपूर्ति बढ़ने से हुई। प्याज की सीमित भंडारण अवधि और निर्यात की कमजोर मांग के कारण किसानों और व्यापारियों को तुरंत बाजार में बिक्री करनी पड़ी।
आलू की कीमतों में भी सालाना आधार पर 13% की कमी आई, क्योंकि फसल अपने चरम हारवेस्टिंग चरण में प्रवेश कर चुकी है। साथ ही पिछले रबी सीजन के कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू भी लगातार बाजार में निकाले जा रहे हैं, जिससे आपूर्ति बढ़ी और कीमतों पर दबाव पड़ा।
दालों की कीमतों में भी सालाना आधार पर 9% की गिरावट आई, जिसका कारण चालू वित्त वर्ष में शुरुआती भंडार अधिक होना है। जुलाई-जून मार्केटिंग वर्ष के लिए तूर दाल का भंडार लगभग 20% अधिक आंका गया है, जबकि जनवरी-दिसंबर मार्केटिंग वर्ष के लिए चना का भंडार इस सीजन में लगभग 10% अधिक है। इन अधिक भंडारों ने कीमतों को नीचे रखने में भूमिका निभाई।
हालांकि इस दौरान कुछ लागतों में वृद्धि भी दर्ज की गई। वैश्विक बाजार में सोयाबीन तेल की आपूर्ति कम होने के कारण वनस्पति तेल की कीमतों में सालाना आधार पर 4% की वृद्धि हुई, जिससे घरेलू बाजार में भी तेल महंगा हुआ। इसके अलावा एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में भी सालाना आधार पर 6% की वृद्धि हुई, जिससे घर पर भोजन तैयार करने की कुल लागत में गिरावट सीमित रही।
मांसाहारी थाली की लागत में गिरावट का मुख्य कारण ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में सालाना आधार पर लगभग 7% की कमी रहा। ब्रॉयलर चिकन इस थाली की कुल लागत का लगभग आधा हिस्सा होता है, हालांकि टमाटर की ऊंची कीमतों ने इस गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया।
मासिक आधार पर भी फरवरी में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों थालियों की लागत में कमी आई। बेहतर आवक के कारण टमाटर, आलू और प्याज की कीमतों में गिरावट से शाकाहारी थाली की लागत 5% और मांसाहारी थाली की लागत 1% कम हुई।
रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में शाकाहारी थाली तैयार करने की औसत लागत लगभग 27.1 रुपये रही, जबकि मांसाहारी थाली की लागत लगभग 55.6 रुपये रही।

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