बजट 2026 से उद्योग को बायो-इकोनॉमी, छोटे किसानों और डेयरी क्षेत्र के लिए नीतिगत समर्थन की उम्मीद

Budget 2026 expectations: केंद्रीय बजट 2026–27 से पहले उद्योग जगत और विशेषज्ञों ने बायो-इकोनॉमी, सर्कुलर मटीरियल्स, छोटे किसानों की जलवायु-सहनशील कृषि और डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए टारगेटेड मदद की मांग की है। उनका कहना है कि टिकाऊ विकास के लिए R&D प्रोत्साहन और दीर्घकालिक निवेश अहम हैं।

बजट 2026 से उद्योग को बायो-इकोनॉमी, छोटे किसानों और डेयरी क्षेत्र के लिए नीतिगत समर्थन की उम्मीद

केंद्रीय बजट 2026–27 से पहले बायो-मैन्युफैक्चरिंग, कृषि विकास और डेयरी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने सरकार से अपील की है कि वह सीमित उपायों से आगे बढ़कर टिकाऊ विकास के लिए ठोस वित्तीय और नीतिगत समर्थन दे। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव और ग्रामीण आय पर दबाव के बीच, आने वाला बजट भारत की सर्कुलर और बायो-आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बायो-इकोनॉमी और सर्कुलर मटीरियल्स भारत के लिए अब तक पूरी तरह इस्तेमाल न किया गया अवसर हैं। देश में हर साल 50 करोड़ टन से अधिक फसल अवशेष पैदा होते हैं, जिनका बड़ा हिस्सा जलाया जाता है। इससे वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ता है। यदि इस कचरे को मूल्यवर्धित बायो-मटीरियल्स में बदला जाए, तो इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण आय और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

MYNUSCo के फाउंडर और सीईओ महादेव चिक्कन्ना ने कहा कि बजट 2026 में बायो-इकोनॉमी इनोवेशन और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग को स्पष्ट नीति समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बजट 2025–26 में स्टार्टअप्स और MSMEs पर जोर दिया गया, लेकिन सर्कुलर इकॉनमी और बायो-मटीरियल्स के लिए लक्षित प्रोत्साहन सीमित रहे। उनके अनुसार, R&D टैक्स क्रेडिट, बायो-आधारित उत्पादों के लिए निर्यात प्रोत्साहन और बायो-मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से भारत को सर्कुलर इकॉनमी की ओर तेजी से ले जाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि टिकाऊ विकास की किसी भी रणनीति के केंद्र में छोटे किसान होने चाहिए। वॉटरशेड ऑर्गनाइजेशन ट्रस्ट (WOTR) के सह-संस्थापक क्रिस्पिनो लोबो ने कहा कि दो हेक्टेयर से कम भूमि पर खेती करने वाले छोटे किसान भारत की खाद्य प्रणाली की रीढ़ हैं, लेकिन जलवायु और बाजार जोखिमों का सबसे ज्यादा बोझ भी वही उठाते हैं।

उन्होंने कहा कि बजट 2026 को अल्पकालिक राहत से आगे बढ़कर दीर्घकालिक रेजिलिएंस पर ध्यान देना चाहिए। जलवायु-अनुकूल कृषि, जल सुरक्षा, प्रिसिजन फार्मिंग, मौसम आधारित सलाह, पोस्ट-हार्वेस्ट तकनीकों और स्थानीय वैल्यू चेन में निवेश अब अनिवार्य हो गया है। साथ ही संस्थागत ऋण, फसल बीमा और एक्सटेंशन सेवाओं को मजबूत करना भी जरूरी है।

डेयरी क्षेत्र, जो ग्रामीण आजीविका का एक अहम आधार है, भी बजट से बड़े सुधारों की उम्मीद कर रहा है। मिल्की मिस्ट डेयरी फूड लिमिटेड के Whole Time Director और CEO डॉ. के. रथनम ने कहा कि डेयरी भारत की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है। उन्होंने GST समर्थन का स्वागत करते हुए पैकेजिंग, रेफ्रिजरेशन, पशु आहार और पशु चिकित्सा सेवाओं पर करों के युक्तीकरण की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए पूंजी सब्सिडी, ब्याज सहायता और दीर्घकालिक ऋण की आसान उपलब्धता जरूरी है। साथ ही पशु स्वास्थ्य, किफायती पशु बीमा, वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पादों, ऑटोमेशन और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े प्रोत्साहन भारत को वैश्विक डेयरी अर्थव्यवस्था में और मजबूत बना सकते हैं।

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