बजट 2026 को किसान संगठनों ने बताया निराशाजनक, कृषि व किसानों की अनदेखी पर तीखी प्रतिक्रियाएं

केंद्रीय बजट 2026-27 को किसान संगठनों और किसान नेताओं ने निराशाजनक बताया। उनका कहना है कि यह बजट कृषि संकट, बढ़ती लागात और कर्ज के बोझ जैसी समस्याओं के समाधान में विफल रहा है। एमएसपी की कानूनी गारंटी, किसान सम्मान निधि में वृद्धि और कृषि बजट में ठोस बढ़ोतरी जैसी मांगों को नजरअंदाज किए जाने पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

बजट 2026 को किसान संगठनों ने बताया निराशाजनक, कृषि व किसानों की अनदेखी पर तीखी प्रतिक्रियाएं

केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर किसान संगठनों और किसान नेताओं ने नाराजगी जताई है। किसान यूनियनों का आरोप है कि यह बजट कृषि संकट, बढ़ती महंगाई, कर्ज बोझ और गिरती आय जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान करने में पूरी तरह विफल रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी देने, किसान सम्मान निधि बढ़ाने और कृषि बजट में ठोस वृद्धि जैसी प्रमुख मांगों को नजरअंदाज किए जाने को किसान संगठनों ने निराशाजनक बताया।

राकेश टिकैत: किसानों की उम्मीदें टूटीं

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बजट पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं। यह बजट किसान, मजदूर, आदिवासी और ग्रामीण भारत की मूल समस्याओं का समाधान करने में असफल रहा है। बढ़ती महंगाई और खेती की लागत, कर्ज़ के बोझ और गिरती आय से जूझ रहे किसानों के लिए बजट में न तो कोई ठोस पहल की गई और न ही एमएसपी की कानूनी गारंटी देने का प्रावधान किया गया। टिकैत ने यह भी कहा कि किसान सम्मान निधि को बढ़ाकर 12,000 रुपये किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन इस दिशा में कोई घोषणा नहीं हुई।

राजू शेट्टी: किसानों को नारियल पकड़ा दिया

महाराष्ट्र के किसान नेता पूर्व सांसद और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी ने रूरल वॉयस को बताया कि बजट बहुत निराशाजनक है और इसमें किसानों व कृषि क्षेत्र की अनदेखी की गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों की आय बढ़ाने का कोई कदम बजट में नहीं उठाया है। उनको केवल नारियल दे दिया। दालों और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की जरूरत है उसके लिए अधिक दाम का इंसेंटिव दिया जाना चाहिए था। बजट में रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने का कोई कदम नहीं उठाया गया है।

शेट्टी का कहना है कि किसान सम्मान निधि का भी कोई फायदा अधिकांश किसानों को नहीं हो रहा है बेहतर होता कि सरकार किसानों को जरूरी फसलों के उत्पादन के लिए सीधे इंसेंटिव देती। खासतौर से दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को एमएसपी के अलावा सीधे प्रति क्विंटल प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए था। 

सरवन सिंह पंधेर: कॉर्पोरेट हितों के लिए बजट

किसान मजदूर मोर्चो के नेता सरवन सिंह पंधेर ने बजट को आम जनता और किसानों के खिलाफ बताते हुए आरोप लगाया कि यह बजट कॉर्पोरेट वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि देश पर कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ा है। पंधेर के अनुसार खेती के लिए इस बार केवल 1 लाख 62 हजार 671 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो जरूरतों के मुकाबले बेहद कम है। उन्होंने कहा कि एक समय कृषि बजट का हिस्सा 14 प्रतिशत हुआ करता था, जो अब घटकर केवल 3 प्रतिशत रह गया है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार की प्राथमिकताओं में किसान और ग्रामीण भारत पीछे छूट गए हैं। 

ASHA-किसान स्वराज: किसानों को हाशिये पर धकेला

अलायंस फॉर सस्टेनेबल एंड होलिस्टिक एग्रीकल्चर (ASHA–Kisan Swaraj) ने बजट 2026-27 को किसानों के प्रति उपेक्षापूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार ने किसानों को ‘विकसित भारत’ का इंजन बनाने के बजाय उन्हें सबसे हाशिये पर पड़े वर्गों में शामिल कर दिया है।

संगठन ने कहा कि कुल बजट में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का आवंटन घटाकर केवल 3.04 प्रतिशत रह गया है, जो 2019-20 में 5.44 प्रतिशत था। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए बजट आवंटन 9,000 करोड़ रुपये घटाकर 1.72 लाख करोड़ रुपये से 1.63 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।

कई योजनाओं के आवंटन में कमी आई है। हैरानी की बात है कि पिछले साल बड़े ज़ोर-शोर से अनाउंस की गई कुछ स्कीमों को संशोधित बजट 2025-26 में ज़ीरो एलोकेशन मिला, जिससे स्कीम लागू नहीं हो पाई, और वही स्कीमें इस साल के बजट में शामिल नहीं हैं।

भाकियू (अराजनैतिक): किसान को राम भरोसे छोड़ा

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि वित्त मंत्री ने बजट पेश करते समय  किसानों और कृषि क्षेत्र को पूरी तरह भुलाकर राम भरोसे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट निराशाजनक ही नहीं बल्कि खेती-किसानी की अनदेखी करने वाला साबित होगा।

मलिक ने आरोप लगाया कि आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि को लेकर जो चिंताएं जताई गई थीं, उनके समाधान का कोई रास्ता बजट में नहीं दिखता। पिछले वर्षों की घोषणाओं का कोई लेखा-जोखा भी प्रस्तुत नहीं किया गया।

AIKS: कृषि अनुसंधान और उत्पादन की अनदेखी

ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) ने कहा कि बजट 2026-27 कृषि संकट दूर करने के प्रति कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाता। वित्त मंत्री के भाषण में में खेती-बाड़ी का कोई जिक्र नहीं, कर्ज माफी का कोई प्रस्ताव नहीं, फर्टिलाइजर सब्सिडी में 15679 करोड़ रुपये की कटौती!

AIKS ने कहा कि उर्वरक सब्सिडी और खाद्य सब्सिडी दोनों में कटौती किसानों के लिए अतिरिक्त संकट पैदा करेगी। कपास मिशन, दलहन मिशन, हाइब्रिड बीज और मखाना बोर्ड जैसे पुराने मिशनों का बजट में कोई उल्लेख नहीं है। एआईकेएस ने किसानों से 3 फरवरी को पूरे देश में किसान-विरोधी बजट की कॉपियां जलाने की अपील की है।  

योगेंद्र यादव: किसान सरकार की शब्दावली से बाहर

सामाजिक कार्यकर्ता और जय किसान आंदोलन के संस्थापक योगेंद्र यादव ने कहा कि 2026 का बजट एक साफ संदेश देता है कि गांव, किसान और खेती अब सरकार की प्राथमिकताओं से बाहर हैं। पहली बार ऐसा बजट, जिसमें किसान का नाम तक नहीं—न सिंचाई, न खाद, न खेतिहर मज़दूर। यह चूक नहीं, राजनीतिक घोषणा है। यह बजट किसान को स्पष्ट संदेश देता है कि अब न दिल में जगह है और न जुबान पर नाम।

 

Subscribe here to get interesting stuff and updates!