साउथ पार्स पर इजराइली हमले के बाद ईरान का पलटवार, खाड़ी के ऊर्जा ठिकानों पर मिसाइल हमले; ट्रंप की ‘भीषण’ जवाब की चेतावनी
ईरान ने इजराइल के हमले के जवाब में कतर, सऊदी अरब और यूएई के ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की भूमिका से इनकार किया, लेकिन ईरान को “भीषण” परिणामों की चेतावनी भी दी है।
ईरान और इजराइल-अमेरिका (Israel-Iran War) युद्ध एक खतरनाक चरण में प्रवेश कर गया है। इजराइल की तरफ से रणनीतिक साउथ पार्स गैसफील्ड पर हमले के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख ऊर्जा ठिकानों पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। युद्ध के 20वें दिन इजराइल ने ईरान के बुशेहर प्रांत स्थित दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडार साउथ पार्स को निशाना बनाया। इसके कुछ ही घंटों बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के तेल और गैस ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी, जो दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी हब है, पर हुए हमले में कई जगह आग लग गई और भारी नुकसान हुआ, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
क्षेत्रीय असर और खाड़ी में बढ़ता तनाव
यूएई में मिसाइल हमलों के बाद प्रमुख ऊर्जा संयंत्रों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। वहां इंटरसेप्ट किए गए प्रोजेक्टाइल के मलबे गिरे। सऊदी अरब ने रियाद और महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाकर दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट किया। बहरीन और कुवैत ने भी संभावित हमलों और साजिशों के मद्देनजर सुरक्षा कड़ी कर दी है। कतर ने ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को देश छोड़ने का आदेश देते हुए उन्हें ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित कर दिया, जबकि सऊदी अरब ने कहा कि ईरान पर बचा-खुचा भरोसा भी पूरी तरह खत्म हो चुका है और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई का संकेत दिया।
ट्रंप ने अमेरिका की भूमिका से इनकार, ईरान को चेतावनी
बढ़ते संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इजराइल की कार्रवाई से अमेरिका को अलग करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि साउथ पार्स पर हमले में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी और कतर को भी इसकी कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान कतर सहित खाड़ी के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाना जारी रखता है, तो अमेरिका “भीषण” जवाब देते हुए पूरे साउथ पार्स गैसफील्ड को नष्ट कर सकता है। ट्रंप का यह दोहरा रुख वॉशिंगटन की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बढ़ा रहा है।
हालांकि अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ट्रंप को इजराइल की योजना की पहले से जानकारी हो सकती थी, जिससे परोक्ष समर्थन की अटकलें तेज हो गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इससे वॉशिंगटन में असहजता बढ़ रही है और यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिकी नीति पर इजराइल का प्रभाव बढ़ गया है।
ऊर्जा क्षेत्र बना नया युद्धक्षेत्र
ताजा घटनाक्रम ने युद्ध को एक नए मोड़ पर ला दिया है, जहां ऊर्जा ठिकाने सीधे निशाने पर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि साउथ पार्स और रास लफ्फान जैसे ठिकानों पर हमले से वैश्विक एलएनजी आपूर्ति बाधित हो सकती है और ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। खाड़ी देश प्रमुख ऊर्जा निर्यातक हैं, ऐसे में लंबे समय तक हमले जारी रहने से वैश्विक बाजारों पर गहरा असर पड़ सकता है।
इज़राइल की तरफ से उत्तरी ईरान में हमले बढ़ाने और वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों की लक्षित हत्याओं के बीच तनाव चरम पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इजराइल, ईरान की सत्ता को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान के खाड़ी देशों पर हमले संघर्ष के विस्तार का संकेत देते हैं। खाड़ी देश अपने जवाब पर विचार कर रहे हैं और अमेरिका की सतर्क लेकिन आक्रामक चेतावनी के बीच पूरा क्षेत्र एक बड़े और विनाशकारी युद्ध के खतरे का सामना कर रहा है।

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