केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 95,692.31 करोड़ की अंतरिम राशि जारी करने की घोषणा की। यह वही राशि है जिसकी घोषणा वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट में की गई थी।
राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए चौहान ने कहा कि 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाली नई व्यवस्था में परिवर्तन पूरी तरह सुचारू और श्रमिक केंद्रित होना चाहिए, ताकि किसी भी श्रमिक को एक दिन के लिए भी रोजगार से वंचित न होना पड़े।
चौहान ने कहा कि यह केवल किसी योजना का बदलाव नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रमिकों के जीवन और आजीविका से जुड़ा विषय है। उन्होंने राज्यों से कहा कि रोजगार सृजन, मजदूरी भुगतान और श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों में किसी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार पहले ही मनरेगा के तहत Rs 30,000 करोड़ जारी कर चुकी है। अब 95,692.31 करोड़ की अंतरिम राशि जारी होने के साथ ग्रामीण रोजगार और विकास के लिए कुल आवंटन 1.25 लाख करोड़ से अधिक हो जाएगा।
राज्यों को जारी राशि में उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 12,221.48 करोड़ मिले हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल को 8,508 करोड़, तमिलनाडु को 7,957.57 करोड़, आंध्र प्रदेश को 7,707.21 करोड़, राजस्थान को 7,581.87 करोड़ और बिहार को 6,715.83 करोड़ आवंटित किए गए हैं। मध्य प्रदेश को 6,252.03 करोड़ तथा कर्नाटक को 5,709.09 करोड़ प्राप्त हुए हैं। चौहान ने कहा कि यह राशि देश की लगभग 2.80 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण होगा।
नई व्यवस्था की तैयारियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि कई राज्यों ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), ई-केवाईसी, फेस ऑथेंटिकेशन और एसएमएस आधारित सूचना प्रणालियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि 26 राज्यों ने ‘विकसित भारत–ग्रामीण भारत’ के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए बजटीय प्रावधान भी कर लिए हैं।
केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से जल्द से जल्द अधिसूचनाएं जारी करने, पर्याप्त विकास कार्यों को पूर्व स्वीकृति देने तथा 100 प्रतिशत ई-केवाईसी सुनिश्चित करने का आग्रह किया। साथ ही जिला और ब्लॉक स्तर पर जागरूकता एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का चयन ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के माध्यम से किया जाएगा, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा।
चौहान ने सभी राज्यों को 28-29 जून को नई दिल्ली स्थित पूसा संस्थान में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और राज्यों के सहयोग से यह पहल ग्रामीण भारत के कायाकल्प, टिकाऊ रोजगार सृजन और करोड़ों लोगों की आजीविका सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।