देहात ने नासिक में एनएचबी के साथ शुरू किया अंगूर क्लस्टर विकास कार्यक्रम

एग्रीटेक कंपनी देहात (DeHaat) ने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के साथ मिलकर नासिक में अंगूर क्लस्टर विकास कार्यक्रम लांच किया है। इसका मकसद प्रीमियम वैरायटी को प्रमोट करना, क्वालिटी सुधारना और निर्यात को बढ़ावा देना है। इस पहल के तहत आर्थिक मदद के साथ वैल्यू चेन इंटीग्रेशन किया जाएगा।

भारत की अग्रणी एग्रीटेक कंपनी देहात ने अपने नासिक स्थित निर्यात संस्थान फ्रेशट्रॉप के साथ, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) के सहयोग से नासिक में अंगूर क्लस्टर विकास कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य भारत की अंगूर उत्पादन एवं निर्यात क्षमता को वैश्विक बाजार में और अधिक मजबूत करना है।

वैश्विक अंगूर बाजार में तेजी से प्रीमियम और लाइसेंस प्राप्त किस्मों की मांग बढ़ रही है, जबकि भारत में अब भी पारंपरिक ओपन वैरायटी, जैसे थॉम्पसन सीडलेस का बोलबाला है। इस कार्यक्रम के जरिए किसान उच्च मूल्य वाले बाजारों तक आसानी से पहुंच बना सकेंगे, जहां किस्मों के चयन, उपज को उच्च गुणवत्तापूर्ण बनाए रखने और ट्रेसबिलिटी पर अधिक जोर दिया जा रहा है।

नासिक के अंगूर उत्पादक किसानों के लिए यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण समय पर शुरू किया गया है। मौजूदा समय में वैश्विक बाजार में प्रीमियम और अलग-अलग किस्मों की मांग बढ़ रही है, ऐसे में निर्यात के लिए उपयुक्त न्यू जनरेशन की किस्मों को जल्दी अपनाने वाले किसानों को बाजार में बेहतर पहुंच, खरीदारों की प्राथमिकता और बेहतर दाम मिलने की संभावना अधिक होगी।

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के उप निदेशक रविंद्र दांगी ने बताया, यह कार्यक्रम इस तरह से तैयार किया गया है कि अंगूर उत्पादक किसानों को वित्तीय सहायता और पूरी वैल्यू चेन का समर्थन मिल सके, जिससे वे उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर संगठित और निर्यात बाजारों से प्रभावी रूप से जुड़ सकें।

यह कार्यक्रम किसानों को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहायता करेगा, जैसे नई किस्मों के तहत अंगूर उत्पादक क्षेत्रों का विस्तार, ड्रिप सिंचाई, जीएपी (GAP) और आईपीएम (IPM) का पालन, कैनोपी और बागानों का नवीनीकरण तथा कटाई के बाद की प्रक्रियाएं और निर्यात में मदद। इसके अलावा कृषि सामान पर एनएचबी के निर्धारित मानकों और दिशानिर्देशों के अनुसार 30-50% तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

ब्लूम फ्रेश के कमर्शियल मैनेजर कैरेन स्मिट-लोट्रिएट ने अपना मत साझा करते हुए बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार अब नई जनरेशन की अंगूर किस्मों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो बेहतर गुणवत्ता, लंबी शेल्फ लाइफ और उपभोक्ताओं की पसंद के अनुरूप हों। ऐसे में नई किस्मों की खेती, वैश्विक बाजार में लंबे समय तक बने रहने के लिए जरूरी हो गयी है।

देहात इस कार्यक्रम को अपने ‘सीड्स टू मार्केट’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से लागू करेगा, जिसमें विशेषज्ञ सलाह, इनपुट डिलीवरी, उत्पाद एकत्रीकरण और बाजार से जुड़ाव जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। 

देहात के चीफ डिजिटल ऑफिसर निखिल तोषनीवाल का कहना है कि, “नासिक लंबे समय से भारत के प्रमुख अंगूर उत्पादक क्षेत्रों में से एक रहा है। अब विकास का अगला चरण उन किसानों का होगा जो वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुसार बेहतर किस्में, मजबूत गुणवत्ता प्रणाली और पूर्ण ट्रेसबिलिटी अपनाएंगे।

आने वाले 3-5 वर्षों में इस कार्यक्रम के माध्यम से किसान तेजी से अंगूर की नई किस्में अपना सकेंगे और निर्यात प्रणाली भी बेहतर  होगी, जिससे नासिक को वैश्विक स्तर पर अंगूर उत्पादन केंद्र बनाने में मदद मिलेगी।