गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल, अब तक पिछले साल से कम खरीद

रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 में 345 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नजर आ रहा है, क्योंकि अब तक की खरीद पिछले साल से कम है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में कम खरीद से कुल खरीद करीब 300 लाख टन के आसपास सिमटने की संभावना है।

गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल, अब तक पिछले साल से कम खरीद

रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 में केंद्र सरकार द्वारा 345 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है। मई की शुरुआत तक प्रमुख उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में गेहूं की खरीद लगभग पूरी होने की ओर है, लेकिन देशभर में अब तक करीब 240 लाख टन गेहूं की खरीद हो सकी है। जबकि पिछले साल इस अवधि तक लगभग 260 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी थी।

कुल मिलाकर, इस साल देश में गेहूं की सरकारी खरीद करीब 300 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है, जो पिछले साल के बराबर या उससे भी कम रह सकती है।

पंजाब में गेहूं की खरीद 110 लाख टन से अधिक हो चुकी है, जबकि कुल 122 लाख टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, हरियाणा में 77 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक राज्य में 67 लाख टन की खरीद हुई थी। इस साल हरियाणा के लिए 72 लाख टन की खरीद का लक्ष्य तय किया गया था, जो पहले ही पूरा हो चुका है।

मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद को झटका

देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में सरकारी खरीद को बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार ने गेहूं खरीद का लक्ष्य 78 लाख टन से बढ़ाकर 100 लाख टन किया है, लेकिन अब तक यहां करीब 29 लाख टन गेहूं की खरीद हो सकी है। पिछले साल इस समय तक राज्य में लगभग 70 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी थी। इस तरह पिछले साल के मुकाबले आधी से भी कम खरीद हुई है। 

इस साल मध्य प्रदेश में किसानों को पंजीकरण कराने और स्लॉट बुकिंग में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस बीच, राज्य सरकार ने गेहूं खरीद की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई कर दी है। स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि भी 24 अप्रैल से बढ़ाकर 23 मई कर दी गई है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब बहुत से किसान खरीद प्रक्रिया में उलझनों के कारण अपनी फसल मंडियों तक नहीं पहुंचा पाए या खरीद केंद्रों पर परेशानी झेल रहे हैं।

मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य और 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मिलाकर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है।

राजस्थान और यूपी में भी कम खरीद

गेहूं खरीद पर एमएसपी के अलावा 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने के बावजूद राजस्थान में खरीद पिछले साल से कम रही है। अब तक राज्य में करीब 10 लाख टन गेहूं की खरीद हुई, जबकि पिछले साल समान अवधि तक यह आंकड़ा लगभग 12 लाख टन था। 25 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले राजस्थान में अब तक आधी से भी कम खरीद हुई है।

उत्तर प्रदेश में भी गेहूं की खरीद उम्मीद से कम रही है। यूपी सरकार के खाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार, 2 मई तक राज्य में 7.53 लाख टन गेहूं की खरीद हुई, जो पिछले साल इस अवधि तक हुई 8.09 लाख टन की खरीद से करीब 7 प्रतिशत कम है। 

मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में लक्ष्य के मुकाबले कम खरीद से इस साल देश में गेहूं के रिकॉर्ड 1202 लाख टन उत्पादन के अनुमानों पर भी सवाल उठेगा। क्योंकि निजी खरीद भी इस साल पिछले साल के मुकाबले कम रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतें कम होने के कारण निर्यात की अनुमति के बावजूद देश से बहुत अधिक गेहूं की निर्यात नहीं हो पा रहा है। इसलिए निजी खरीद का रुझान भी कम है। 

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