गन्ना (नियंत्रण) आदेश को लेकर केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी से वार्ता, कोल्हू-क्रेशर को 'इंस्पेक्टर राज' से बचाने पर जोर

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 को लेकर किसान संगठनों, जनप्रतिनिधियों और गन्ना क्षेत्र से जुड़े लोगों ने केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी से मुलाकात कर कई विवादित प्रावधानों पर चिंता जताई और अपने सुझाव दिए।

केंद्रीय खाद्य मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 को लेकर किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों में हलचल बढ़ गई है। छह दशक पुराने गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 में किए जा रहे बदलावों को लेकर कई आशंकाएं जताई जा रही हैं। इस संबंध में गुरुवार को राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी से विभिन्न किसान नेताओं, जनप्रतिनिधियों और गन्ना क्षेत्र से जुड़े लोगों ने वार्ता कर अपनी चिंताओं और सुझावों से अवगत कराया। 

नए गन्ना (नियंत्रण) आदेश के मसौदे में नई चीनी मिलों के बीच की दूरी 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 25 किलोमीटर करने, खांडसारी इकाइयों के लिए FRP भुगतान अनिवार्य करने, कोल्हू व क्रेशरों को भी चीनी मिलों के समान रेगुलेशन के दायरे में लाने तथा केन रिजर्व एरिया पर चीनी मिलों का एकाधिकार बढ़ाने जैसे कई प्रावधान शामिल हैं। इन प्रावधानों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अहम योगदान करने वाले गुड़ व खांडसारी उद्योग के अस्तित्व और चीनी मिलों के सामने प्रतिस्पर्धा में टिके रहने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के साथ हुई वार्ता में गन्ना किसानों की समस्याओं और प्रस्तावित ‘गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026’ के तकनीकी व व्यावहारिक पहलुओं को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर किसानों के हितों की रक्षा, गन्ना मूल्य भुगतान व्यवस्था, उद्योग की जवाबदेही और भविष्य की चुनौतियों पर गंभीर चर्चा हुई।

वार्ता में शामिल उत्तर प्रदेश विधान सभा में शामली से राष्ट्रीय लोक दल विधायक प्रसन्न चौधरी ने कहा कि गन्ना नियंत्रण आदेश, 2026 के प्रावधान किसानों के हितों के प्रतिकूल हैं और इस आदेश को लागू नहीं किया जाना चाहिए। वहीं छपरौली के लोक दल विधायक डॉ. अजय कुमार ने कहा कि गुड़ और खांडसारी उद्योग बड़े पैमाने पर ग्रामीण स्तर पर लोगों के लिए रोजगार पैदा करता है ऐसे में गुड़ कोल्हू और खांडसारी उद्योग के हितों के प्रतिकूल प्रावधानों वाला यह विधेयक ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास के लिए बाधक बन सकता है।

वहीं पूर्व विधायक राव वारिस ने कहा कि हमें यह देखना चाहिए कि स्थानीय स्तर पर किसानों और छोेटे कारोबारियों के द्वारा चलाये जाने वाले गुड़ और खांडसारी इकाइयों द्वारा गन्ना किसानों को चीनी मिलों से अधिक दाम नहीं देने का गन्ना नियंत्रण आदेश, 2026 का प्रावधान पूरी तरह से किसानों के खिलाफ है और इसे  लागू नहीं किया जाना चाहिए। वहीं किसान ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. यशवीर सिंह ने कहा कि लघु और छोटे उद्योगों को सरकार बढ़ावा देना चाहती है लेकिन गन्ना नियंत्रण आदेश के प्रावधान सरकार की इस नीति के प्रतिकूल हैं।

वार्ता में शामिल भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक और युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने गन्ना किसानों के साथ-साथ कोल्हू व खांडसारी इकाइयों के हितों की रक्षा के लिए सुझाव और संशोधन संबंधी प्रस्ताव दिए। चर्चा में कोल्हू व क्रेशर की परिभाषा, गन्ना मूल्य निर्धारण में सभी सह-उत्पादों को आधार बनाने, दो चीनी मिलों के बीच की दूरी नहीं बढ़ाने, कोल्हू और क्रेशर को इंस्पेक्टर राज से बचाने, गुड़ व खांडसारी उद्योग का नियमन राज्यों पर छोड़ने तथा गन्ने के भुगतान और बकाया का रियल टाइम डेटा तैयार करने जैसे सुझाव दिए गए।

धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि चीनी मिलें एथेनॉल, बिजली और प्रेस मड जैसे कई सह-उत्पाद भी तैयार करती हैं। इसलिए गन्ने का मूल्य निर्धारण करते समय इन सभी उत्पादों से होने वाली आय को आधार बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा, दो चीनी मिलों के बीच न्यूनतम दूरी बढ़ाने के नियम को समाप्त करने की भी मांग उठाई गई।

बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने कोल्हू एवं खांडसारी इकाइयों के अस्तित्व को बचाने, गन्ना किसानों को बेहतर दाम मिलने का रास्ता बंद न करने और किसानों के सामने उत्पन्न समस्याओं के समाधान को लेकर भी अपने सुझाव दिए।

किसान नेताओं ने जोर देकर कहा कि कोल्हू और क्रेशर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं। इन्हें लाइसेंस और इंस्पेक्टर राज से बचाने की जरूरत है। इन कुटीर एवं लघु उद्योगों का नियमन राज्य सरकारें करती हैं और इन पर केंद्रीय कानून का अतिरिक्त बोझ बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। यह विषय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में ही रहना चाहिए, ताकि किसानों और संचालकों को परेशानी न हो।

राष्ट्रीय लोकदल से जुड़े नेताओं का कहना है कि इस संवाद का मुख्य उद्देश्य गन्ना किसानों के हितों और गन्ने से जुड़ी अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ विचार-विमर्श कर प्रभावी उपायों की तलाश करना था।

केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना और सभी सुझावों पर विचार कर आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिलाया। बैठक में गन्ना किसानों के हितों, चीनी उद्योग के समग्र विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत देने पर जोर दिया गया।