गेहूं किसानों पर डबल मार, पहले मौसम से फसल खराब फिर सरकारी खरीद ने किया निराश, रिकॉर्ड उत्पादन के दावों पर भी सवाल
देश में रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के दावों के बावजूद सरकारी खरीद 290 लाख टन के आसपास पहुंची है। खरीद की जटिल प्रक्रिया और इंतजामों की कमी के चलते बड़ी संख्या में किसान एमएसपी पर गेहूं बेचने से वंचित रहे, जबकि हरियाणा की मंडियों में गेहूं की अत्यधिक आवक पर सवाल उठ रहे हैं।
रबी खरीद सीजन 2026-27 के तहत गेहूं की सरकारी खरीद लगभग पूरी होने की ओर अग्रसर है। इस साल कृषि मंत्रालय ने देश में गेहूं के रिकॉर्ड 1202 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया है। लेकिन अब तक हुई सरकारी खरीद के आंकड़ों पर नजर डालें तो वे रिकॉर्ड उत्पादन के दावों से मेल नहीं खाते।
देश में गेहूं की सरकारी खरीद अभी तक 290 लाख टन के आसपास पहुंची है, जो कुल 1202 लाख टन गेहूं उत्पादन के मुकाबले एक चौथाई भी नहीं है। इस साल गेहूं खरीद का आंकड़ा पिछले साल हुई लगभग 300 लाख टन की खरीद से भी कम है।
अधिकांश किसानों को गेहूं की उपज 2585 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे 2300-2400 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर व्यापारियों को बेचनी पड़ी। इस तरह किसानों को प्रति क्विंटल 200-300 रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
उत्तर प्रदेश के शामली जिले में रहने वाले भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रदेश उपाध्यक्ष कपिल खाटियान ने रूरल वॉयस को बताया कि सरकारी खरीद केंद्रों पर पर्याप्त इंतजाम न होने के कारण बहुत कम किसानों को एमएसपी का लाभ मिल सका। रजिस्ट्रेशन, स्लॉट बुकिंग और वैरीफिकेशन जैसी प्रक्रियाओं के बाद भी किसानों को खरीद केंद्रों पर इंतजार करना पड़ा। इन झंझटों के कारण किसानों ने मजबूरी में 2250-2300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर स्थानीय व्यापारियों को गेहूं बेचना पड़ा।
खाटियान ने बताया कि सहकारी समितियों पर बनाए गए खरीद केंद्रों पर रोजाना केवल 150-300 क्विंटल गेहूं खरीद की व्यवस्था थी। कुल मिलाकर सरकार एमएसपी पर गेहूं खरीद से पल्ला झाड़ती नजर आई और किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया।
देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश कुल राष्ट्रीय गेहूं उत्पादन में लगभग 30 फीसदी योगदान करता है। वर्ष 2025-26 के दौरान यूपी में लगभग 353 लाख टन गेहूं उत्पादन का अनुमान है, जबकि 11 मई तक प्रदेश में केवल 10.95 लाख टन गेहूं की खरीद हुई, जो कुल उत्पादन का करीब 3.11 फीसदी है। उत्पादन और खरीद के आंकड़ों में यह भारी अंतर दर्शाता है कि कितने बड़े पैमाने पर यूपी के किसान सरकारी खरीद से बाहर रहे हैं। राज्य के लगभग 2.15 करोड़ किसानों में से केवल 2.15 लाख किसान ही सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेच पाए। इस साल पश्चिमी यूपी के किसानों के लिए हरियाणा में गेहूं बेचने के रास्ते भी लगभग बंद हो गए हैं।
देश के दूसरे सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में भी किसान गेहूं खरीद की प्रक्रियाओं में उलझे रहे। काफी हो-हल्ला मचने के बाद पिछले दो सप्ताह से राज्य में गेहूं की खरीद में तेजी आई है। अब तक मध्य प्रदेश से 63 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है, जबकि राज्य सरकार ने 100 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है और प्रदेश में किसानों ने लगभग 160 लाख टन गेहूं के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।
मध्य प्रदेश के किसान नेता केदार सिरोही का कहना है कि गेहूं खरीद की जटिल प्रक्रिया और इंतजामों के अभाव में किसानों को एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है। मजबूरी में किसानों को औने-पौने दामों पर निजी व्यापारियों को गेहूं बेचना पड़ रहा है।
पंजाब में गेहूं की खरीद 122 लाख टन तक पहुंच गई है, जो 2025-26 में खरीदे गए 119 लाख टन गेहूं से अधिक है। अनाज के भंडारण और उठान सहित तमाम मुश्किलों के बावजूद पंजाब ने गेहूं खरीद के स्तर को बनाए रखा है, जबकि पिछले साल के मुकाबले पंजाब की मंडियों में गेहूं की आवक 5-6 फीसदी कम रही है। इस साल प्राइवेट ट्रेडर्स द्वारा बहुत कम खरीद की गई और मंडियों में पहुंचा लगभग पूरा गेहूं सरकारी एजेंसियों को खरीदना पड़ा। माना जा रहा है कि प्राइवेट ट्रेडर्स ने इस साल यूपी से सस्ता गेहूं खरीदने को तरजीह दी।
हरियाणा में सरकारी एजेंसियां लगभग 83 लाख टन गेहूं खरीद चुकी हैं, जबकि मंडियों में 85 लाख टन से अधिक गेहूं पहुंच चुका है। यह 72 लाख टन के लक्ष्य और पिछले साल हुई करीब 71 लाख टन खरीद से अधिक है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को भारी नुकसान के बावजूद हरियाणा की मंडियों में गेहूं की बढ़ी आवक और पिछले साल से ज्यादा खरीद को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। किसान संगठनों का आरोप है कि आढ़ती और मंडी अधिकारी मिलीभगत कर खरीद में फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। आरोप हैं कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और बायोमैट्रिक वैरीफिकेशन जैसी सख्त प्रक्रियाओं के बावजूद यूपी से सस्ता गेहूं खरीदकर हरियाणा की मंडियों में एमएसपी पर बेचा जा रहा है।
राजस्थान में गेहूं खरीद पर एमएसपी के अलावा 150 रुपये का बोनस दिया जा रहा है। अब तक राज्य से करीब 14 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है, जो 23.5 लाख टन के लक्ष्य से काफी कम है।
इस साल फरवरी से मार्च के दूसरे सप्ताह तक अत्यधिक तापमान के कारण गेहूं की फसल प्रभावित हुई। इसके बाद फसल कटाई के समय गेहूं पर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की मार पड़ी। जब गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हुई, तो किसान रजिस्ट्रेशन से लेकर स्लॉट बुकिंग तक की तकनीकी प्रक्रियाओं में उलझे रहे।

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