अल नीनो का असर: छह राज्यों में सूखे की मार, खेती और ग्रामीण आजीविका के लिए बढ़ा संकट

महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात और राजस्थान ने मानसून की कमी के बीच बड़े इलाकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। कुछ राज्यों ने राहत उपायों की भी घोषणा की है, जिनमें फसल नुकसान का मुआवजा, कृषि ऋणों में रियायत, चारा सहायता और जलापूर्ति शामिल हैं।

दक्षिण और पश्चिम भारत के छह राज्यों ने 2026 के खरीफ सीजन में अपने बड़े हिस्से को सूखाग्रस्त घोषित किया है। बारिश की कमी और लंबे शुष्क दौर से फसल उत्पादन, पशुधन और ग्रामीण आजीविका पर संकट गहराने की आशंका है। महाराष्ट्र ने 305 तालुका को सूखाग्रस्त घोषित किया है, जबकि कर्नाटक में 226 तालुक सूखाग्रस्त सूची में शामिल हैं।

महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में सैकड़ों प्रशासनिक इकाइयां सूखे की चपेट में हैं। इन राज्यों की सरकारें या तो राहत उपाय लागू कर रही हैं या उनके क्रियान्वयन की तैयारी में हैं। इनमें फसल नुकसान का मुआवजा, कृषि ऋणों में रियायत, पशुओं के लिए चारा और रोजगार सहायता जैसे उपाय शामिल हैं।

मानसून पर अल नीनो का असर

सूखे की स्थिति के लिए मानसून की बारिश में कमी और असमान वितरण, लंबे समय तक बारिश न होना तथा मिट्टी में नमी का स्तर गिरना प्रमुख कारण हैं। अल नीनो की परिस्थितियों ने मानसून के प्रदर्शन को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। तेलंगाना सरकार ने विशेष रूप से मजबूत होते अल नीनो, बंगाल की खाड़ी में कमजोर निम्न दबाव प्रणालियों और फसलों की महत्वपूर्ण विकास अवस्थाओं के दौरान लंबे शुष्क दौर को प्रतिकूल परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार बताया है।

हालांकि, अलग-अलग राज्यों में सूखे की गंभीरता अलग है, लेकिन बड़ी संख्या में प्रशासनिक इकाइयों का सूखाग्रस्त होना कृषि उत्पादन और ग्रामीण आय पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है। इसका असर उन किसानों पर अधिक पड़ सकता है, जिनकी फसलें मानसूनी बारिश पर निर्भर हैं और जिनके पास सुनिश्चित सिंचाई की सीमित सुविधा है।

महाराष्ट्र: 85% से अधिक तालुका में सूखा

महाराष्ट्र ने 305 तालुका को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इस प्रकार राज्य की कुल 358 तालुकाओं में से अब 85 प्रतिशत से अधिक सूखे के दायरे में हैं। राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित किसानों को दिवाली से पहले 5,000 रुपये की शुरुआती सहायता देने की घोषणा की है। इसके साथ रियायतों का व्यापक पैकेज भी शामिल है। इसमें फसल ऋणों का पुनर्गठन, भूमि राजस्व में रियायत, कृषि बिजली बिलों में राहत और पात्र विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क से छूट जैसे उपाय शामिल हैं।

सरकार सूखा प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में पानी के टैंकर तैनात करने पर भी विचार कर रही है। निगरानी के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग करने और पेयजल आपूर्ति सुरक्षित रखने की योजना है। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी राहत उपायों का हिस्सा है। इसके तहत उपयुक्त चारे की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद पर विचार किया जा रहा है।

हालांकि 5,000 रुपये की राशि शुरुआती राहत के रूप में दी जानी है। प्रत्येक किसान या परिवार को मिलने वाली वास्तविक सहायता संबंधित सरकारी आदेशों, पात्रता शर्तों और स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

कर्नाटक: 240 में से 226 तालुक सूखाग्रस्त

कर्नाटक में सूखाग्रस्त तालुका की संख्या बढ़कर 226 हो गई है। राज्य के कुल 240 तालुका में से 94 प्रतिशत से अधिक अब सूखे की चपेट में हैं। राज्य सरकार सूखे से हुए नुकसान का आकलन कर रही है। इस आकलन से कृषि और अन्य क्षेत्रों में हुए कुल नुकसान का अधिक स्पष्ट अनुमान मिल सकेगा।

अंतिम आकलन के आधार पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के दिशा-निर्देशों के अनुसार केंद्र सरकार से मांगी जाने वाली राहत राशि तय की जाएगी। इससे राज्य पर पड़े वित्तीय बोझ और कृषि नुकसान की भरपाई के लिए आवश्यक सहायता का आकलन करने में मदद मिलेगी।

तेलंगाना: 365 मंडल सूखे की चपेट में

तेलंगाना ने 2026 के खरीफ सीजन के लिए 365 मंडलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। राज्य के कुल 621 मंडलों में से लगभग 59 प्रतिशत इस दायरे में आते हैं। अधिसूचना के अनुसार, 31 जिलों के 111 मंडल गंभीर और 254 मंडल मध्यम सूखे से प्रभावित हैं। हैदराबाद और पेद्दापल्ली राज्य के केवल दो ऐसे जिले हैं, जिन्हें इस घोषणा से बाहर रखा गया है।

सूखे की घोषणा से पहले बारिश, बोए गए क्षेत्र, मिट्टी की नमी, भूजल की स्थिति और अन्य संकेतकों के आधार पर आकलन किया गया। यह प्रक्रिया राष्ट्रीय सूखा प्रबंधन नियमावली, 2016 के अनुरूप अपनाई गई। अल नीनो और बदलती बारिश की स्थिति के प्रभावों की समीक्षा के बाद 23 अक्टूबर को मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश की।

आंध्र प्रदेश: 21 जिलों के 388 मंडल प्रभावित

आंध्र प्रदेश ने खरीफ सीजन के लिए 21 जिलों के 388 मंडलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। राज्य के कुल 688 मंडलों में से लगभग 56 प्रतिशत इस दायरे में हैं। प्रभावित मंडलों में 283 को गंभीर सूखे और 105 को मध्यम सूखे की श्रेणी में रखा गया है। यह निर्णय बारिश की कमी और सूखे से जुड़े अन्य संकेतकों के आकलन के बाद लिया गया।

प्रभावित क्षेत्रों की बड़ी संख्या खरीफ की खेती पर व्यापक दबाव को दर्शाती है। गंभीरता के आधार पर वर्गीकरण से उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां राहत और हस्तक्षेप की अधिक तत्काल जरूरत है।

गुजरात: चार जिलों में बारिश की भारी कमी

गुजरात ने देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। हालांकि, राज्य में कुल मिलाकर मौसमी बारिश लगभग 89 प्रतिशत रही, लेकिन इन चार जिलों में बारिश की कमी काफी गंभीर है। 15 अक्टूबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देवभूमि द्वारका में पिछले 30 वर्षों के औसत के मुकाबले 83.5 प्रतिशत कम बारिश हुई। पोरबंदर में यह कमी 69.1 प्रतिशत, जामनगर में 56.7 प्रतिशत और कच्छ में 42.4 प्रतिशत रही।

राज्य सरकार ने एक नवंबर से राहत पैकेज लागू करने की घोषणा की है। इसके तहत राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के मानकों के अनुसार फसल नुकसान के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी। इसकी अधिकतम सीमा दो हेक्टेयर होगी।

सूखाग्रस्त तालुका में पशु शिविरों में रखे गए पशुओं के लिए दो महीने तक 80 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन की सहायता दी जाएगी। सरकार की घोषणा के अनुसार, इसके बाद भी इस सहायता को जारी रखने का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

राजस्थान: 14 जिलों की 80 तहसीलें सूखाग्रस्त

राजस्थान सरकार ने 14 जिलों की 80 तहसीलों को छह महीने के लिए सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें से 69 तहसीलों को गंभीर और 11 को मध्यम सूखे की श्रेणी में रखा गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, राजस्थान में 1 जून से 30 सितंबर के बीच 340.2 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 435.6 मिलीमीटर है। इस तरह राज्य में मानसूनी बारिश में 22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

जोधपुर में सबसे अधिक 12 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित की गई हैं। इसके बाद जालौर और बाड़मेर का स्थान है, जहां 10-10 तहसीलें प्रभावित हैं। सूखे की घोषणा में बारिश की कमी और खरीफ फसलों को हुए नुकसान को आधार बनाया गया है। राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारा डिपो खोलने की घोषणा की है। साथ ही, कृषि ऋणों की वसूली छह महीने तक स्थगित रहेगी।

केवल घोषणा नहीं, समय पर राहत पहुंचाना भी जरूरी

छह राज्यों में सूखे की व्यापक घोषणा से स्पष्ट है कि प्रभावित क्षेत्रों की पहचान के साथ-साथ किसानों तक समय पर राहत पहुंचाना भी जरूरी है। फसल नुकसान का आकलन, मुआवजे का समयबद्ध भुगतान, पेयजल की उपलब्धता, पशुधन की सुरक्षा और ऋण सुविधा तक पहुंच तत्काल नुकसान को सीमित कर सकते हैं। राहत उपायों का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि पात्र किसानों तक सहायता कितनी जल्दी पहुंचती है और क्या यह उन्हें अगले फसल सीजन तक आजीविका बनाए रखने में पर्याप्त मदद देती है।