सितंबर तक 987 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति, 71% योगदान अनाज आधारित स्रोतों का

इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 में सितंबर के अंत तक 987 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई, जो अनुबंधित मात्रा का 82.5% है। इसमें अनाज आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी 71.4% रही। चीनी आधारित स्रोतों ने आवंटित मात्रा का 97.6% पूरा किया।

सितंबर तक 987 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति, 71% योगदान अनाज आधारित स्रोतों का
सितंबर 2026 के अंत तक इथेनॉल आपूर्ति कार्यक्रम के तहत कुल 987 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई। इसमें अनाज आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी 71% से अधिक रही। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 (नवंबर से अक्टूबर) के लिए तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को कुल 1,197 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति का अनुबंध किया गया था। इसके मुकाबले अब तक 82.5% मात्रा की आपूर्ति हो चुकी है। अनाज आधारित स्रोतों से 705 करोड़ लीटर इथेनॉल मिला, जो देश की इथेनॉल मिश्रण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में इनकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
एआईडीए के अनुसार, मक्का इथेनॉल उत्पादन के लिए सबसे बड़ा कच्चा माल बना हुआ है। इससे 413 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई, जो कुल आपूर्ति का 41% से अधिक है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के सरप्लस चावल से 222 करोड़ लीटर और क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों से 70 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई।
एसोसिएशन का कहना है कि अनाज आधारित विभिन्न स्रोतों का इस्तेमाल इथेनॉल उद्योग की बढ़ती प्रसंस्करण क्षमता और अलग-अलग कृषि कच्चे माल के उपयोग की क्षमता को दर्शाता है। इसके साथ ही, जैव ईंधन की बढ़ती मांग और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

चीनी आधारित इथेनॉल की आपूर्ति आवंटन के करीब

इस अवधि में चीनी आधारित स्रोतों से भी इथेनॉल की आपूर्ति बेहतर रही। गन्ने के रस और हैवी मोलेसेस से कुल 282 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई, जबकि इसके लिए 289 करोड़ लीटर का आवंटन किया गया था। इस तरह आपूर्ति लक्ष्य का 97.6% हासिल कर लिया गया। एआईडीए के अनुसार, बी-हेवी और सी-हेवी शीरे, दोनों से आपूर्ति का प्रदर्शन मजबूत रहा। 
एआईडीए की उप महानिदेशक भारती बालाजी ने कहा कि ताजा आंकड़े भारत के इथेनॉल क्षेत्र के लगातार विकसित होने का संकेत देते हैं। सितंबर के अंत तक कुल आपूर्ति 980 करोड़ लीटर के आंकड़े को पार कर गई। इसमें मक्का की प्रमुख भूमिका के साथ अनाज आधारित स्रोतों का योगदान 71% से अधिक रहा। 

ऊर्जा सुरक्षा के लिए कच्चे माल के विविध स्रोत जरूरी

बालाजी के अनुसार, देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए इथेनॉल उत्पादन में कच्चे माल के विविध स्रोतों का होना जरूरी है। उत्पादन और आपूर्ति ढांचे का विस्तार होने के साथ नीतिगत निरंतरता और इथेनॉल के उपयोग के नए अवसर भी महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (एफएफवी) को बढ़ावा देने के साथ सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के विकास से जैव ऊर्जा क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
एआईडीए के अनुसार, इथेनॉल के उपयोग के इन क्षेत्रों का विस्तार उद्योग में निवेश को बनाए रखने और कृषि आधारित कच्चे माल की मांग बढ़ाने में मदद कर सकता है। इससे कृषि मूल्य शृंखला को भी मजबूती मिलेगी।

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