कुछ महीनों पहले देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के खिलाफ काफी माहौल बनाया जा रहा था। खासकर गाड़ियों के माइलेज और मेंटेनेंस को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर निशाना साधा गया। इथेनॉल को लेकर ‘फूड बनाम फ्यूल’ की बहस भी छिड़ी। नतीजा यह हुआ कि पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण 20 फीसदी पर ही रुक गया और ब्लेंडिंग प्रोग्राम को लेकर भी संशय पैदा हो गया।
लेकिन जैसे ही पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात बने और खाड़ी देशों से पेट्रोलियम व गैस की आपूर्ति बाधित हुई, इथेनॉल की अहमियत समझ आने लगी। ब्रेंट क्रूड तीन हफ्ते पहले 60-70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था, जिसकी कीमत अब लगभग 40 फीसदी बढ़ चुकी है। देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भरता बहुत अधिक है और मौजूदा संकट ने इस चुनौती को उजागर कर दिया है। ताजा हालात को देखते हुए पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी करने की मांग तेज हो गई है।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर लोकसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 10-11 वर्षों में इथेनॉल उत्पादन और उसकी ब्लेंडिंग पर अभूतपूर्व काम हुआ है। एक दशक पहले तक देश में सिर्फ 1-1.5 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग क्षमता थी, जबकि आज हम पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग के करीब पहुंच चुके हैं। इसके कारण प्रतिवर्ष करीब साढ़े चार करोड़ बैरल कम तेल आयात करना पड़ रहा है।
पीएम मोदी ने भरोसा जताया कि जिस पैमाने पर वैकल्पिक ईंधनों पर काम हो रहा है, उससे भारत का भविष्य और अधिक सुरक्षित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार सभी सेक्टर के स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार चर्चा कर रही है और जहां भी जरूरत है, वहां आवश्यक समर्थन दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री के इस बयान को इथेनॉल उत्पादक डिस्टिलरी उद्योग ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने केंद्र सरकार से पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी (E30) करने की मांग की है। एसोसिएशन की डीडीजी भारती बालाजी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर कई सुझाव दिए हैं। इनमें ब्राजील की तर्ज पर 100 फीसदी इथेनॉल पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देना, घरेलू व औद्योगिक कुकिंग में इथेनॉल के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना और डीजल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ाना शामिल है।
मंगलवार को AIDA के डिस्टिलर्स कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि हर संकट एक अवसर लेकर आता है और इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम में सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए यह उपयुक्त समय है। उन्होंने बताया कि 2014 से 2025 के बीच इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के कारण कच्चे तेल का आयात लगभग 277 लाख टन कम हुआ है, जिससे 1.63 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने भी प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर E20 से आगे इथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए एक चरणबद्ध और तेज रोडमैप तैयार करने की मांग की है। संगठनों का मानना है कि मौजूदा उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग करने के लिए ब्लेंडिंग लक्ष्य बढ़ाना जरूरी है।
इस्मा के डायरेक्टर जनरल दीपक बल्लानी ने कहा, “प्रधानमंत्री का यह कहना कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल के आयात में बचत हुई है, बायोफ्यूल को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के एक अहम स्तंभ के रूप में स्थापित करता है।” उन्होंने कहा कि इथेनॉल उद्योग 20 फीसदी से अधिक ब्लेंडिंग के लिए आपूर्ति बढ़ाने को तैयार है। इस्मा के अनुसार, देश में सालाना करीब 2,000 करोड़ लीटर से अधिक घरेलू इथेनॉल उत्पादन क्षमता है, जो 20 फीसदी मिश्रण के लिए आवश्यक 1,100 करोड़ लीटर से काफी ज्यादा है। इस तरह भारत इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की स्थिति में है।
ग्रेन इथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (GEMA) के अध्यक्ष सी.के. जैन का कहना है कि देश में इथेनॉल को लेकर नीति समर्थन जारी रहा तो यह क्षेत्र कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। अनाज आधारित इथेनॉल उत्पादन से किसानों को अतिरिक्त बाजार और बेहतर आय के अवसर मिल रहे हैं।