फरवरी में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 3.2% हो गई। यह नई सीरीज (आधार वर्ष 2024) के तहत जनवरी के संशोधित आंकड़े 2.74% के मुकाबले अधिक है। यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी के कारण हुई, हालांकि कुल महंगाई अब भी भारतीय रिजर्व बैंक के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य के भीतर है। वर्तमान वित्त वर्ष (अप्रैल-फरवरी) के दौरान अब तक खुदरा महंगाई का औसत 1.9% रहा है।
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य महंगाई फरवरी में बढ़कर 3.47% हो गई, जो जनवरी में 2.13% थी। यह वृद्धि मुख्य रूप से सब्जियों, फलों और मेवों, तेल एवं वसा तथा तैयार खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई। खाद्य श्रेणी के भीतर कुछ वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई। टमाटर की महंगाई 45.3% रही, हालांकि यह जनवरी के 64.5% से कुछ कम है।
कोर महंगाई, जिसमें खाद्य और ईंधन को शामिल नहीं किया जाता, फरवरी में लगभग स्थिर रहकर 3.4% रही। यदि बहुमूल्य धातुओं को भी हटा दिया जाए तो कोर महंगाई 1.9% रही, जो यह संकेत देती है कि अर्थव्यवस्था में अंतर्निहित मांग अभी सीमित है।
ताजा आंकड़े उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की नई श्रृंखला के तहत आए हैं। इसमें आधार वर्ष 2012 से बदलकर 2024 कर दिया गया है और उपभोग बास्केट में शामिल वस्तुओं की संख्या 299 से बढ़ाकर 358 कर दी गई है। साथ ही CPI बास्केट में खाद्य वस्तुओं का भार लगभग 45% से घटाकर 40% से कम कर दिया गया है, जिससे खाद्य कीमतों का महंगाई पर प्रभाव कुछ कम हो सकता है।
हालांकि सूचकांक पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ रहा है। यह फरवरी में 104.57 पर पहुंच गया, जो जनवरी में 104.46 था। इस प्रकार मूल्य सूचकांक में लगातार चौथे महीने वृद्धि दर्ज की गई।
खाद्य के अलावा अन्य श्रेणियों में भी कुछ मध्यम स्तर की कीमत बढ़ोतरी दर्ज की गई। पान और तंबाकू की महंगाई 1.96% से बढ़कर 3.64% हो गई, जबकि आवास से जुड़े रखरखाव और मरम्मत खर्च 3.26% तक बढ़ गए। शिक्षा क्षेत्र में महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रही, जिसमें माध्यमिक शिक्षा की महंगाई 4.09% और उच्च शिक्षा की 3.59% रही।
परिवहन से जुड़े खर्चों में मिश्रित रुझान देखा गया। माल परिवहन सेवाओं की महंगाई 7.49% पर ऊंची बनी रही, जबकि यात्री परिवहन सेवाओं की महंगाई 2.17% से घटकर 1.75% हो गई। वहीं टिकाऊ वस्तुओं की कीमतों में नरमी बनी रही, और वाहनों की कीमतों में 4.65% की गिरावट दर्ज की गई, जो कमजोर मांग और कीमतों में प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है। कुछ विशेष उपभोग श्रेणियों में तेज वृद्धि देखी गई। अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं की महंगाई 60.8% तक पहुंच गई, जबकि चांदी की महंगाई 160% रही।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि महंगाई धीरे-धीरे बढ़ सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 में CPI 4.3% के आसपास रह सकती है, बशर्ते मानसून सामान्य रहे और खाद्य कीमतें स्थिर बनी रहें। हालांकि वैश्विक परिस्थितियां महंगाई के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। मध्य पूर्व संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे ईंधन और परिवहन महंगाई बढ़ने का खतरा है। इन दोनों श्रेणियों का CPI बास्केट में 14.2% हिस्सा है।
हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की देशव्यापी बढ़ोतरी भी मार्च से ईंधन श्रेणी की महंगाई को बढ़ा सकती है। वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी से पेट्रोल, डीजल, कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और हवाई किराए पर भी असर पड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के जुलाई 2025 बुलेटिन के अनुसार वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 10% की वृद्धि महंगाई को लगभग 20 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ा सकती है।
अर्थशास्त्री मौसम से जुड़े जोखिमों पर भी नजर बनाए हुए हैं। आगामी गर्मियों में संभावित हीट वेव और 2026 के दूसरे हिस्से में अल नीनो की आशंका कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है और खाद्य कीमतों पर असर डाल सकती है।
आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का अनुमान है कि मार्च 2026 में खुदरा महंगाई 3.3% से 3.5% के बीच रह सकती है, क्योंकि एलपीजी कीमतों में बढ़ोतरी और बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में मजबूती महंगाई के आंकड़ों में दिखने लगेगी।
क्रिसिल लिमिटेड की प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट दीप्ति देशपांडे का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में खुदरा महंगाई 4.3% तक पहुंच सकती है। उनके अनुसार यदि मानसून सामान्य रहता है तो खाद्य कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रहने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि वित्त वर्ष 2027 में कच्चे तेल की कीमतें औसतन 75-80 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष में इनकी औसत कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल रही है।