भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने स्वतंत्र दुग्ध उत्पादकों और दूध विक्रेताओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया

FSSAI ने सभी स्वतंत्र दुग्ध उत्पादकों और दूध विक्रेताओं को कानूनी रूप से संचालन के लिए अनिवार्य पंजीकरण या लाइसेंस लेने का निर्देश दिया है। प्राधिकरण का कहना है कि यह निर्देश दूध में मिलावट रोकने, उचित भंडारण व्यवस्था सुनिश्चित करने और राज्यों में जांच अभियान तथा नियमित निगरानी के माध्यम से खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से जारी किया गया है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देशभर के लिए एक एडवाइजरी जारी करते हुए सभी दुग्ध उत्पादकों और दूध विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे अपने खाद्य व्यवसाय संचालन शुरू करने या जारी रखने से पहले अनिवार्य रूप से एफएसएसएआई में पंजीकरण या लाइसेंस प्राप्त करें। यह निर्देश डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य पर लागू नहीं होगा। 

एडवाइजरी के अनुसार, अधिकारियों ने पाया है कि कई स्वतंत्र दुग्ध उत्पादक और दूध विक्रेता बिना उचित पंजीकरण या लाइसेंस के काम कर रहे हैं, जबकि खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत यह अनिवार्य है। नियामक ने स्पष्ट किया है कि जो दुग्ध उत्पादक डेयरी सहकारी समितियों के पंजीकृत सदस्य हैं और अपना पूरा दूध उत्पादन उसी सहकारी संस्था को आपूर्ति करते हैं, उन्हें इस अनिवार्यता से छूट दी गई है। हालांकि, अन्य सभी उत्पादकों और विक्रेताओं को कानूनी रूप से व्यवसाय करने के लिए एफएसएसएआई में पंजीकरण कराना आवश्यक होगा।

हाल के महीनों में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दूध में मिलावट की आशंका से जुड़े मामलों की पृष्ठभूमि में यह परामर्श जारी किया गया है। इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने केंद्र और राज्यों के प्रवर्तन प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि पंजीकरण और लाइसेंस से संबंधित नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

हाल ही आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिला में कथित रूप से मिलावटी दूध पीने से 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 अन्य लोग अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। यह मामला 22 फरवरी को सामने आया, जब कई बुजुर्गों ने उल्टी, पेट दर्द और गंभीर गुर्दा संबंधी समस्या की शिकायत की, जिसके कारण उन्हें डायलिसिस की आवश्यकता पड़ी। इसके बाद सभी को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

प्रमाणपत्र और लाइसेंस की जांच के निर्देश

नामित अधिकारियों, केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरणों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को यह सत्यापित करने के निर्देश दिए गए हैं कि दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के पास वैध एफएसएसएआई पंजीकरण प्रमाणपत्र या लाइसेंस उपलब्ध है या नहीं। नियामक ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे उत्पादकों और विक्रेताओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले मिल्क चिलर का समय-समय पर निरीक्षण करें, ताकि उचित भंडारण तापमान और रखरखाव मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। सही भंडारण व्यवस्था सुनिश्चित करना दूध के खराब होने से बचाने और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

FSSAI ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में विशेष पंजीकरण अभियान चलाएं, ताकि सभी पात्र दूध उत्पादकों और विक्रेताओं को आवश्यक पंजीकरण या लाइसेंस प्राप्त हो सके।
इसके अलावा, प्राधिकरण ने पहले ही अधिकारियों को दूध और दुग्ध उत्पादों के लिए नियमित प्रवर्तन अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। राज्यों को इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रत्येक पखवाड़े नियामक को भेजनी होगी, विशेष रूप से हर महीने की 15 तारीख और महीने के अंतिम दिन तक।