केंद्र सरकार ने गन्ने का एफआरपी 365 रुपये/क्विंटल तय किया, केवल 10 रुपये की बढ़ोतरी

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने 2026–27 सीजन के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये प्रति क्विंटल मंजूर किया है। यह पिछले सीजन से 10 रुपये अधिक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने आगामी 2026-27 चीनी सत्र (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) को 365 रुपये प्रति क्विंटल करने की मंजूरी दे दी है। यह पिछले सत्र (2025-26) की 355 रुपये प्रति क्विंटल के एफआरपी की तुलना में 10 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि है, जो कि 2.81 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है। 

स्वीकृत एफआरपी 10.25 प्रतिशत की बुनियादी चीनी रिकवरी दर पर आधारित है। किसानों को इस बेंचमार्क से ऊपर प्रत्येक 0.1 प्रतिशत की रिकवरी वृद्धि पर 3.56 रुपये प्रति क्विंटल का प्रीमियम मिलेगा, जबकि रिकवरी में प्रत्येक 0.1 प्रतिशत की कमी पर FRP में इसी राशि की कटौती की जाएगी। हालांकि, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि 9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी वाली मिलों के लिए कोई कटौती लागू नहीं होगी। ऐसी स्थिति में, किसानों को 2026-27 सत्र में 338.3 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान मिलता रहेगा।

आगामी सत्र के लिए गन्ने की उत्पादन लागत (A2+FL) 182 रुपये प्रति क्विंटल अनुमानित है, जिससे 365 रुपये प्रति क्विंटल का स्वीकृत एफआरपी उत्पादन लागत से 100 प्रतिशत से भी अधिक है।

संशोधित FRP 1 अक्टूबर, 2026 से किसानों से गन्ना खरीदने वाली चीनी मिलों पर लागू होगी। भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में चीनी क्षेत्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो लगभग 5 करोड़ गन्ना किसानों और उनके परिवारों के साथ-साथ चीनी मिलों और परिवहन व कृषि श्रम जैसे संबंधित कार्यों में लगे करीब 5 लाख श्रमिकों की आजीविका का समर्थन करता है।

इस FRP का निर्धारण राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श के बाद कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर किया गया है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 चीनी सत्र में 1,02,687 करोड़ रुपये के कुल गन्ना बकाया का लगभग 99.5 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है, जिसमें 20 अप्रैल, 2026 तक किसानों को 1,02,209 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वर्तमान 2025-26 सत्र में, अब तक 1,12,740 करोड़ रुपये में से 99,961 करोड़ रुपये (लगभग 88.6 प्रतिशत) का भुगतान किया जा चुका है।