भारत में जीएम उत्पादों के आयात की अनुमति नहीं, आगे भी ऐसा नहीं होगा: पीयूष गोयल

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जीएम उत्पादों के आयात पर रोक जारी रखने और व्यापार समझौतों में डेयरी क्षेत्र को संरक्षण देने की बात कही। उन्होंने किसानों के हितों की रक्षा के साथ भारतीय उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच और चालू वित्त वर्ष में 1 लाख करोड़ डॉलर के निर्यात लक्ष्य पर जोर दिया।

भारत में जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) उत्पादों के आयात की अनुमति नहीं दी जाएगी और भविष्य में भी इस नीति में बदलाव नहीं होगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक व्यापार समझौतों में कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों का सरकार ने पूरा ख्याल रखा है।

दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत ने अब तक जीएम उत्पादों के आयात की अनुमति नहीं दी है और आगे भी ऐसा नहीं करेगा। उन्होंने जीएम उत्पादों के साथ डेयरी, समुद्री उत्पादों और कुछ अन्य कृषि जिंसों को भी संवेदनशील क्षेत्र बताया।

गोयल ने कहा, "हम भारत में जीएम उत्पादों को आने देने के मामले में बहुत संवेदनशील हैं। हमने कभी इसकी अनुमति नहीं दी है और भविष्य में भी ऐसा नहीं करेंगे।"

डेयरी क्षेत्र के बारे में उन्होंने कहा कि भारत ने अब तक किसी भी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में इस क्षेत्र के लिए आयात शुल्क में रियायत नहीं दी है। उन्होंने डेयरी उत्पादों के निर्माण में धार्मिक संवेदनशीलताओं का भी उल्लेख किया। कुछ देशों में पनीर बनाने के लिए बछड़ों के पेट से प्राप्त एंजाइम रैनेट का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत में आयातित डेयरी उत्पादों के लिए निर्धारित सर्टिफिकेशन जरूरी है, ताकि धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।

गोयल ने कहा कि भारत ने अब तक जिन व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है, उनमें किसी भी संवेदनशील उत्पाद के मामले में समझौता नहीं किया है। सरकार किसानों, मछुआरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

हालांकि, सरकार भारतीय उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर पहुंच हासिल करने पर भी काम कर रही है। इसके तहत कपड़ा, फार्मा, कृषि उत्पाद और रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों के लिए तरजीही बाजार पहुंच हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, चीन और फिलीपींस जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारतीय उत्पादों पर कम आयात शुल्क सुनिश्चित करना है।

भारत के व्यापार लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में देश ने 1 लाख करोड़ डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। अप्रैल से सितंबर के दौरान निर्यात 14 प्रतिशत बढ़कर 480 अरब डॉलर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष में भारत का कुल निर्यात अब तक के सर्वोच्च स्तर 863 अरब डॉलर पर रहा था। उन्होंने कहा कि भारत एक भरोसेमंद वैश्विक व्यापार भागीदार के रूप में उभरा है और कई देश उसके साथ तरजीही व्यापार समझौते तथा मुक्त व्यापार समझौते करने के इच्छुक हैं।

गोयल ने युवाओं से 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए उद्यमिता, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।