धान की तैयार फसल का बेमौसम बारिश ने किया भारी नुकसान, किसानों को सरकार की राहत घोषणा का इंतजार

तेज हवाओं के साथ  हुई बारिश के कारण उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा सहित कई राज्यों की इस समय की प्रमुख फसल  धान को भारी नुकसान हुआ है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में किसानों द्वारा बोई गई  बासमती धान की फसल पर सबसे अधिक असर पड़ा है । किसानों का कहना है कि इस  बारिश और तेज हवा के साथ बारिश के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल गिर गई है। इस साल बाजार में बासमती धान दाम पिछले साल से बेहतर मिल रहा है ऐसे में इन किसानों को फसल खराब होने से दोहरा नुकसान हो रहा है । वहीं सरकारों द्वारा अभी तक किसी राहत पैकेज का ऐलान नहीं किया गया है

तेज हवाओं के साथ  हुई बारिश के कारण उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा सहित कई राज्यों की इस समय की प्रमुख फसल  धान को भारी नुकसान हुआ है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में किसानों द्वारा बोई गई  बासमती धान पर सबसे अधिक असर पड़ा है ।  इस बारिश से केवल  धान सहित  और अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि इस  बारिश और तेज  हवा के साथ बारिश के कारण खेतों में खड़े धान के पौधे खेतों में गिर गए हैं। बारिश के कारण खेतों में पानी जमा होने धान की फसल खेतों में सड़ रही और दाना जम रहे हैं। इस साल बासमती किसानों को पिछले साल से बेहतर दाम मिल रहा है ऐसे में इन किसानों को फसल खराब होने से दोहरा नुकसान हो रहा है। वहीं सरकारों ने अभी तक किसानों को किसी तरह की आर्थिक राहत का ऐलान भी नहीं किया है। साथ ही कई जगह किसान क्रेडिट कार्ड पर लिये गये कर्ज में से बैंकों ने बीमा राशि भी नहीं काटी है जिसके चलते इन किसानों को फसल बीमा का भी लाभ नहीं मिल सकेगा।

रूरल वॉयस के साथ बात करते हुए ग्राम जंगल सिकरिया  गोरखपुर  के रहने वाले किसान कतवारू ने बताया  कि उनकी लगभग पक चुकी  धान की फसल तेज हवा और आंधी से खेतों में बिखर गई है जिसके कारण भारी नुकसान हुआ है । और निचले इलाकों में बारिश का पानी  नही निकलने के कारण  समस्या और भी बढ़ गई है।  जिला सुल्तानपुर गांव  जासरपुर नरही के रहने वाले किसान लालबाबू चौरसिया जिनकी धान की दो एकड़ फसल बहुत अच्छी थी लेकिन तेज  बारिश और तेज हवाओं के कारण मुश्किल स्थिति पैदा हो गई है। खेत में गिर गई धान की फसल से पैदावार  मिलने की आशा टूट गई।   

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बडे पैमाने पर  बासमती धान की खेती होती है। इसकी प्रमुख किस्में पूसा बासमती 1121, और कम अवधि वाली बासमती की प्रजातिय़ा को  भारी नुकसान हुआ है। ग्राम सतवरा जिला बुलन्दशहर के किसान नरेन्द कुमार शर्मा ने रूरल वॉयस को बताया कि अच्छे लाभ के लिए हमारा  पूरा गांव बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन की देखरेख में गांव के अधिकतर किसान बासमती धान की खेती बीज के उद्देश्य से करते है। बासमती धान प्रजाति 1121 और दूसरी बासमती प्रजातियों को बीज के रूप मे बेचने के उद्देश्य से  खेती करते हैं । लेकिन तेज आई बारिश के कारण लगभग 40 फीसदी नुकसान हुआ है । उन्होंने बताया कि अगेती फसले जो कट गई थी वह खेतों में पड़ी रह गई और बासमती धान की फसल के दाने काले पड़ने लगे हैं और सबसे अधिक बोई जाने वाली बासमती धान  की फसल 1121  खेत में  गिर गई है जिससे किसानों को कम से कम प्रति एकड़ 25 से 30 हजार एकड़ का नुकसान होने की संभावना है।  जिससे समान्य धान की तुलना में अधिक लाभ मिलता था । जिससे इन सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया । दूसरी तरफ फसल बीमा कंपनियो के ढीले ढाले रवैये से फसल बीमा की ऱाशि मिलने की आशा नहीं दिख रही है। अभी तक सरकार की तऱफ से कोई भी मुवआजे का ऐलान नही किया गया है। वही बैंकों ने केसीसी कराए हुए किसानों की बीमा राशि भी नहीं काटी है। जिससे बीमा का लाभ किसानों को नहीं मिलेगा। इससे उनके गांव के किसानों के सामने समस्या खड़ी हो  गई  है। इस तरह की समस्या राज्य के दूसरे किसानों  की भी है ।

बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा का कहना है कि पिछले साल किसानों को बासमती धान का कम दाम मिलने के कारण इस साल बासमती धान की खेती का एरिया कम हुआ जिससे किसानों को  लाभ मिलने की आशा थी  क्योकि  पिछले साल 30 हजार करोड़  का लगभग 46.6  लाख  टन  बासमती धान  का निर्यात किया गया था । लेकिन इस बारिश के काऱण नुकसान ज्यादा है । उन्होंने कहा कि बारिश के साथ तेज हवा चलने से फसल खराब होने से उत्पादन प्रभावित हुआ है ।  उन्होंने कहा कि समान्य धान के तुलना में कम अवधि वाली  बासमती धान की कीमत 3000 हजार रुपये प्रति कुंतल है जबकि मुख्य रूप से बोई जाने वाली बासमती 1121 इस समय 3400 रुपये प्रति कुंतल है।

डॉ रितेश शर्मा का कहना है कि जो फसल कट गई है  अगर खेतों में फसल पड़ी है  उनके दाने खराब होगें या खेतों मे जम जायेगे इसलिए खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था करे और अगर खड़ी धान फसलों के खेत में इस समय  पानी का जमाव है तो नमी के वजह से बीपीएच कीट जिससे बासमती धान ज्यादा नुकसान होगा।

कृषि विश्वविद्यालय बांदा के वैज्ञानिक डॉ.अजीत  सिंह ने रूरल वॉयस को बताया कि इस समय गोभी और आलू बोने का समय है। पिछले दिनों से हो रही भारी बारिश से  बुवाई में देरी होगी और जिन किसानों ने  सब्जियों की बुवाई की और  नर्सरी डाली उनका भारी नुकसान हुआ है। वहीं, जो किसान आलू और तिल की बुवाई करने की सोच रहे हैं, उन्हें अब खेत के सूखने का इंतजार करना होगा.।