इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो 2026 का मंगलवार को ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में शुभारंभ हुआ। इस तीन दिवसीय आयोजन में नीति निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज, निवेशक, टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर और विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे हैं। इसका उद्देश्य भारत के बायोएनर्जी क्षेत्र के विकास को गति देना है।
इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (IFGE) और उत्तर प्रदेश सरकार के न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (UPNEDA) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी एवं सम्मेलन बायोएनर्जी समाधान को आगे बढ़ाने और भारत के ऊर्जा संक्रमण में स्वच्छ ईंधनों की भूमिका मजबूत करने पर केंद्रित है।
प्रदर्शनी का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री ए.के. शर्मा ने किया। उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग के अपर मुख्य सचिव और UPNEDA के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल, आईएएस, विद्युत मंत्रालय के संयुक्त सचिव-ट्रांसमिशन पंकज कुमार, UPNEDA के निदेशक रविंदर सिंह, ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी, प्राज इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट-बायोएनर्जी यशोधन मनकामे सहित कई वरिष्ठ नीति निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए।
यूपी को बायोएनर्जी निवेश का केंद्र बनाने पर जोर
विशेष सत्र को संबोधित करते हुए ए.के. शर्मा ने कहा कि भारत जब ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे समय में इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो 2026 एक प्रासंगिक और महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश एक प्रमुख बायोएनर्जी हब के रूप में उभरा है और सीबीजी उत्पादन में देश में पहले, सौर ऊर्जा में दूसरे तथा सोलर पैनल इंस्टॉलेशन की गति के मामले में पहले स्थान पर है।
उन्होंने कहा कि इस गति को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार सक्षम नीतियों, तकनीक, निवेश और कौशल विकास के माध्यम से बायोएनर्जी के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री ने उद्योग जगत और निवेशकों से उत्तर प्रदेश के साथ साझेदारी करने और राज्य में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बायोएनर्जी क्षेत्र के विकास के लिए स्थिर, सहयोगी और कारोबार के अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
ए.के. शर्मा ने बायोएनर्जी के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के सुझाव पर विचार करने की बात भी कही। साथ ही उन्होंने उद्योग जगत से युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए एक ऐसा ढांचा तैयार करने को कहा, जिससे वे इस क्षेत्र में टिकाऊ और दीर्घकालिक करियर बना सकें।
यूपी में देश के 30% से अधिक सीबीजी प्लांट
अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग के अपर मुख्य सचिव और UPNEDA के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत की बायोएनर्जी राजधानी के रूप में उभरा है। उन्होंने बताया कि देश के 30% से अधिक सीबीजी प्लांट उत्तर प्रदेश में स्थित हैं और राज्य देश का दूसरा सबसे बड़ा इथेनॉल उत्पादक है।
उन्होंने कहा कि राज्य का ‘वेस्ट टू वेल्थ’ दृष्टिकोण प्रचुर मात्रा में उपलब्ध बायोमास को ऊर्जा और आर्थिक मूल्य में बदलने के साथ किसानों के लिए टिकाऊ आजीविका तैयार करने पर केंद्रित है। डॉ. गोयल ने बताया कि प्रोत्साहनों के जरिए राज्य एक मजबूत निवेश इकोसिस्टम तैयार कर रहा है। इसके तहत सीबीजी के लिए प्रति टीडीपी 75 लाख रुपये और बायो-कोल के लिए प्रति टीडीपी प्रति वर्ष 75,000 रुपये की पूंजीगत सहायता दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में 84 सीबीजी और 8 बायो-कोल प्लांट पाइपलाइन में हैं। उत्तर प्रदेश बायोएनर्जी क्षेत्र का विस्तार करने के साथ-साथ किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), सहकारी समितियों और किसानों की आय को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

बायोमास से नए उद्योग और रोजगार के अवसर
इस अवसर पर IFGE के डायरेक्टर जनरल संजय गंजू ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास बड़े पैमाने पर कृषि आधार और महत्वाकांक्षी नीतियां हैं, जो इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण बायोएनर्जी निवेश केंद्रों में से एक बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में उपलब्ध प्रचुर बायोमास संसाधन नए उद्योगों के निर्माण का बड़ा अवसर प्रदान करते हैं। इससे किसानों के लिए मूल्य सृजन के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बायोएनर्जी विकास के अगले चरण में निवेश, तकनीक, उद्योग और कुशल मानव संसाधन को एक साथ लाने की जरूरत है, ताकि व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य और टिकाऊ इकोसिस्टम तैयार किया जा सके। गंजू के अनुसार, IBET 2026 उद्योग और निवेशकों को सरकार के साथ सीधे संवाद करने, उत्तर प्रदेश में निवेश के अवसरों को समझने और एक मजबूत बायोएनर्जी अर्थव्यवस्था के निर्माण में योगदान देने के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध करा रहा है। इससे रोजगार बढ़ाने, किसानों की आय मजबूत करने और भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
तीन दिवसीय एक्सपो में सीबीजी, इथेनॉल, बायोमास, वेस्ट-टू-एनर्जी, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), बायोहाइड्रोजन, ग्रीन ट्रांसपोर्ट फ्यूल, कार्बन मार्केट और अन्य उभरती बायोएनर्जी तकनीकों पर चर्चा होगी। आयोजन में निवेश, नीतिगत ढांचे, तकनीकी साझेदारी और टिकाऊ फीडस्टॉक इकोसिस्टम तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह एक्सपो भारत में बायोएनर्जी क्षेत्र के लिए निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसरों को बढ़ावा देने के साथ कृषि अवशेषों और अन्य बायोमास संसाधनों को ऊर्जा में बदलने की संभावनाओं पर भी फोकस करेगा।