एसईए की 55वीं एजीएम 29 सितंबर को, तिलहन का रकबा, खाद्य तेल आयात और नीतिगत मुद्दों पर होगी चर्चा

एसईए की 55वीं एजीएम 29 सितंबर को होगी, जिसमें भारत के तिलहन परिदृश्य, खाद्य तेल आपूर्ति, वैश्विक जोखिम और उद्योग से जुड़े नीतिगत मुद्दों पर चर्चा होगी। 11 सितंबर तक तिलहन रकबा 193.90 लाख हेक्टेयर रहा। एसईए सरसों, सोयाबीन और मूंगफली के मॉडल फार्म बढ़ाने के साथ आयात-निर्यात और लॉजिस्टिक्स संबंधी नीतिगत बदलावों की मांग कर रहा है।

एसईए की 55वीं एजीएम 29 सितंबर को, तिलहन का रकबा, खाद्य तेल आयात और नीतिगत मुद्दों पर होगी चर्चा

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) की 55वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) 29 सितंबर को होगी। इसमें तिलहन रकबा, घरेलू उत्पादकता, खाद्य तेलों की आपूर्ति, वैश्विक जोखिमों और व्यापार एवं नीतिगत मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। एजीएम में उद्योग प्रतिनिधि, नीति निर्माता और विशेषज्ञ भारत के तिलहन और खाद्य तेल क्षेत्र की स्थिति और संभावनाओं पर विचार करेंगे।

एसईए के अध्यक्ष संजीव अस्थाना के अनुसार, 11 सितंबर 2026 तक देश में कुल तिलहन रकबा 193.90 लाख हेक्टेयर रहा, जो एक साल पहले के 194.07 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है। एसोसिएशन के अनुसार, आने वाले महीनों में घरेलू स्तर पर तिलहन और वनस्पति तेलों की उपलब्धता का आकलन करने के लिए रकबे का रुझान महत्वपूर्ण रहेगा।

भारत की खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता को देखते हुए एसईए ने घरेलू तिलहन उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। एसोसिएशन के अनुसार, तिलहन का रकबा बढ़ाने के साथ बेहतर बीज, कृषि पद्धतियों, मिट्टी के स्वास्थ्य, सिंचाई, संसाधन दक्षता और किसानों की आय में सुधार पर भी ध्यान देना जरूरी है।

क्षेत्रीय स्तर की अपनी पहलों के तहत एसईए ने सॉलिडेरिडाड के साथ मिलकर नेशनल अलायंस फॉर रीजेनेरेटिव वेजिटेबल ऑयल सेक्टर की स्थापना की है। इसके तहत रीजेनेरेटिव मस्टर्ड मॉडल फार्म कार्यक्रम में मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में 3,000 फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन प्लॉट शामिल किए गए, जहां उपज में करीब 20-30 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया।

चालू खरीफ सीजन में इस कार्यक्रम का विस्तार करते हुए मध्य प्रदेश और राजस्थान के 139 से अधिक गांवों में 500 मूंगफली और सोयाबीन मॉडल फार्म स्थापित किए गए हैं। एसईए की आगामी रबी सीजन में 3,000 से अधिक सरसों मॉडल फार्म स्थापित करने की योजना है, ताकि किसानों को कम लागत में बेहतर कृषि पद्धतियों और अधिक उत्पादकता के बारे में जानकारी दी जा सके।

एसोसिएशन ने हाल ही वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक कर कई नीतिगत मुद्दे भी उठाए हैं। इनमें नेपाल-साफ्टा के तहत आयात, डी-ऑयल्ड राइस ब्रान (DORB) के निर्यात को लेकर अनिश्चितता, चीन को रेपसीड निर्यात, जीएसीसी पंजीकरण, जीएसटी, बंदरगाह लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग मानक, मुक्त व्यापार समझौते और नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स-ऑयलसीड्स (NMEO-OS) शामिल हैं।

एसईए ने कहा कि देश में खाद्य तेलों का मौजूदा स्टॉक और आपूर्ति स्थिति संतोषजनक है, लेकिन अल नीनो, रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच सूरजमुखी तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और इंडोनेशिया के B50 बायोडीजल कार्यक्रम के कारण वैश्विक बाजार में अस्थिरता का जोखिम बना हुआ है।

एसोसिएशन ने बंदरगाहों पर जहाजों के बढ़े प्रतीक्षा समय की समस्या भी उठाई, जिससे डेमरेज और आयात लागत बढ़ रही थी। एसईए के अनुसार, खाद्य सचिव के साथ चर्चा के बाद प्राथमिकता के आधार पर जहाजों को बर्थ देने की दिशा में कदम उठाए गए और अब प्रतीक्षा अवधि घटकर तीन से चार दिन रह गई है।

नेपाल के मामले में एसईए ने कहा कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच नेपाल से भारत में करीब 6 लाख टन रिफाइंड तेल का निर्यात हुआ, जिसमें 5.32 लाख टन रिफाइंड सोयाबीन तेल था। एसोसिएशन ने कैनालाइजेशन, कोटा, उपयुक्त न्यूनतम आयात मूल्य और मजबूत सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन व्यवस्था जैसे उपायों का सुझाव दिया है। एसईए चीन में भारतीय रेपसीड के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है। एसोसिएशन के अनुसार, जीएसीसी पंजीकरण अभी एक बाधा है और फिलहाल केवल पांच भारतीय निर्यातक पंजीकृत हैं।

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