भारत का कुल वनस्पति तेल आयात चालू तेल वर्ष 2025-26 के पहले 11 महीनों यानी नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के दौरान 3 प्रतिशत बढ़कर 154.64 लाख टन हो गया। आयात में यह वृद्धि मुख्य रूप से कच्चे खाद्य तेलों की खरीद बढ़ने के कारण हुई। इस दौरान आयातित खाद्य तेलों में कच्चे तेलों की हिस्सेदारी बढ़कर 95 प्रतिशत हो गई, जबकि एक साल पहले यह 88 प्रतिशत थी। दूसरी ओर, रिफाइंड तेलों के आयात में तेज गिरावट दर्ज की गई।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन अवधि में खाद्य तेलों का कुल आयात 3 प्रतिशत बढ़कर 151.64 लाख टन हो गया, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में यह 146.83 लाख टन था। गैर-खाद्य तेलों सहित कुल वनस्पति तेल आयात पिछले वर्ष के 150.31 लाख टन से बढ़कर 154.64 लाख टन हो गया।
सितंबर 2026 में खाद्य तेलों का आयात मामूली घटकर 15.44 लाख टन रहा, जो अगस्त में यह 15.72 लाख टन था। इस गिरावट की प्रमुख वजह रिफाइंड, ब्लीच्ड और डिओडोराइज्ड (RBD) पामोलीन तथा कच्चे सूरजमुखी तेल के आयात में कमी रही। RBD पामोलीन का आयात अगस्त के 22,700 टन से घटकर सितंबर में 2,905 टन रह गया। वहीं, कच्चे सूरजमुखी तेल का आयात 1.56 लाख टन से घटकर लगभग 1.05 लाख टन पर आ गया।
कच्चे तेलों की हिस्सेदारी बढ़ी
पहले 11 महीनों के दौरान आयात के स्वरूप में सबसे बड़ा बदलाव रिफाइंड तेलों के आयात में तेज गिरावट के रूप में सामने आया। नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच रिफाइंड तेलों का आयात घटकर 7.40 लाख टन रह गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 16.89 लाख टन था। परिणामस्वरूप, कुल खाद्य तेल आयात में रिफाइंड तेलों की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत रह गई।
इसके विपरीत, कच्चे खाद्य तेलों का आयात पिछले वर्ष के 129.94 लाख टन से बढ़कर 144.24 लाख टन हो गया। कुल आयात में उनकी हिस्सेदारी 88 प्रतिशत से बढ़कर 95 प्रतिशत पहुंच गई। इस वृद्धि में कच्चे पाम तेल की अधिक खरीद की प्रमुख भूमिका रही। इसकी वजह से इंडोनेशिया और मलेशिया से रिफाइंड पामोलीन की आपूर्ति का स्थान कच्चे पाम तेल ने लिया।
इस अवधि में पाम तेल का आयात 69.80 लाख टन से बढ़कर 73.52 लाख टन हो गया। सोयाबीन, सूरजमुखी, रेपसीड और अन्य तेलों सहित सॉफ्ट ऑयल का आयात भी 77.03 लाख टन से बढ़कर 78.12 लाख टन पहुंच गया। हालांकि, कुल खाद्य तेल आयात में पाम तेल और सॉफ्ट ऑयल की हिस्सेदारी लगभग स्थिर रही। पाम तेल की हिस्सेदारी 48 प्रतिशत और सॉफ्ट ऑयल की 52 प्रतिशत थी।
कच्चा पाम तेल सबसे अधिक आयात किया जाने वाला प्रमुख तेल रहा। इसका आयात 72.32 लाख टन का था। इसके बाद कच्चे और रिफाइंड सोयाबीन तेल का संयुक्त आयात 51.76 लाख टन तथा कच्चे और रिफाइंड सूरजमुखी तेल का आयात 26.24 लाख टन रहा।
रिफाइंड तेलों की आपूर्ति में नेपाल की अहम भूमिका
रिफाइंड तेलों के कुल आयात में गिरावट के बावजूद नेपाल से इनकी आपूर्ति महत्वपूर्ण बनी रही। नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के दौरान नेपाल ने भारत को 6.82 लाख टन रिफाइंड तेलों का निर्यात किया। इसमें 6.06 लाख टन रिफाइंड सोयाबीन तेल, 37,734 टन रिफाइंड सूरजमुखी तेल, 31,633 टन RBD पामोलीन और 7,189 टन रेपसीड तेल शामिल था।
नेपाल मुख्य रूप से कच्चा सोयाबीन तेल आयात करता है। इसके अलावा, वहां थोड़ी मात्रा में कच्चा सूरजमुखी तेल और कच्चा पाम तेल भी आयात किया जाता है। इन तेलों को रिफाइन करने के बाद भारत को निर्यात किया जाता है। दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) समझौते के तहत भारत को होने वाले इन निर्यातों पर शून्य आयात शुल्क का लाभ मिलता है।
देशवार आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन अवधि में अर्जेंटीना भारत को खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा। उसने 34.43 लाख टन तेल की आपूर्ति की, जिसमें मुख्य रूप से कच्चा सोयाबीन और सूरजमुखी तेल शामिल थे। मलेशिया ने 29.76 लाख टन और इंडोनेशिया ने 29.05 लाख टन खाद्य तेल की आपूर्ति की। इन दोनों देशों से मुख्य रूप से पाम तेल आया। रूस ने 12.89 लाख टन खाद्य तेल की आपूर्ति की, जिसमें अधिकांश हिस्सा कच्चे सूरजमुखी तेल का था।
रुपये की कमजोरी से आयात लागत बढ़ी
सितंबर 2026 में प्रमुख खाद्य तेलों की अंतरराष्ट्रीय कीमतें पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में अधिक रहीं। RBD पामोलीन का औसत लागत, बीमा और मालभाड़ा (CIF) मूल्य 9.7 प्रतिशत बढ़कर 1,228 डॉलर प्रति टन हो गया। कच्चे पाम तेल की कीमत 10.4 प्रतिशत बढ़कर 1,285 डॉलर प्रति टन पहुंच गई।
इसी तरह, कच्चे सोयाबीन तेल की कीमत 11.2 प्रतिशत बढ़कर 1,314 डॉलर प्रति टन और कच्चे सूरजमुखी तेल की कीमत 10.8 प्रतिशत बढ़कर 1,432 डॉलर प्रति टन हो गई।
रुपये की कमजोरी ने भी आयात लागत पर दबाव बढ़ाया। सितंबर 2026 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की औसत विनिमय दर 95.51 रुपये रही, जबकि एक साल पहले यह 88.32 रुपये थी। इस तरह रुपये में लगभग 8.1 प्रतिशत की गिरावट आई।
घरेलू खाद्य तेल भंडार में मामूली वृद्धि
बंदरगाहों पर उपलब्ध स्टॉक और घरेलू वितरण व्यवस्था में मौजूद भंडार को मिलाकर भारत में खाद्य तेलों का कुल स्टॉक 1 अक्टूबर 2026 को अनुमानित 20.72 लाख टन था। यह 1 सितंबर के 20.43 लाख टन के मुकाबले 29,000 टन अधिक है। बंदरगाहों पर खाद्य तेलों का स्टॉक 11.03 लाख टन से बढ़कर 12.36 लाख टन हो गया। इसके विपरीत, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला में मौजूद स्टॉक 9.40 लाख टन से घटकर 8.36 लाख टन रह गया।
इस बीच, गैर-खाद्य तेलों का आयात नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के दौरान 14 प्रतिशत घटकर 2.99 लाख टन रह गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 3.48 लाख टन था। पाम फैटी एसिड डिस्टिलेट (PFAD) और RBD पाम स्टीयरिन जैसे गैर-खाद्य तेलों का इस्तेमाल मुख्य रूप से साबुन और ओलियोकेमिकल उद्योगों में होता है।
चालू तेल वर्ष में भारत की वनस्पति तेलों के आयात पर निर्भरता ऊंची बनी हुई है और आयात में कच्चे तेलों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी को देखते हुए खाद्य तेलों के आयात पर होने वाला खर्च भी दबाव में रह सकता है।