मोजाम्बिक से तिलहन आयात की संभावनाएं तलाश रहा भारत, SEA ने किया समझौता

भारत आयात स्रोतों में विविधता लाने के लिए मोजाम्बिक को तिलहन और वनस्पति तेलों के नए स्रोत के रूप में तलाश रहा है। इसके लिए SEA और मोजाम्बिक के नामपुला प्रांत ने तीन वर्ष के स्टेटमेंट ऑफ इंटरेस्ट पर हस्ताक्षर किए हैं।

भारत आयात के स्रोतों में विविधता लाने और वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों के जोखिम को कम करने के लिए मोजाम्बिक को तिलहन और वनस्पति तेलों के नए स्रोत के रूप में तलाश रहा है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) और उत्तरी मोजाम्बिक के नामपुला प्रांत की सरकार ने तिलहन एवं वनस्पति तेल कॉरिडोर की संभावनाएं तलाशने के लिए एक ‘स्टेटमेंट ऑफ इंटरेस्ट’ पर हस्ताक्षर किए।

तिलहन आपूर्ति के लिए तीन साल का ढांचा

मुंबई में ग्लोबऑयल इंडिया सम्मेलन के दौरान हुए इस समझौते पर नामपुला के गवर्नर एडुआर्डो मरियामो अब्दुला और SEA के अध्यक्ष तथा AWL एग्री बिजनेस लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डिप्टी चेयरमैन अंग्शु मलिक ने हस्ताक्षर किए। सॉलिडेरिडाड नेटवर्क एशिया के डॉ. शतद्रु चट्टोपाध्याय और सॉलिडेरिडाड सदर्न अफ्रीका के डॉ. जोनाथन एटकिंसन ने भी साझेदारों के रूप में समझौते पर हस्ताक्षर किए। SEA के कार्यकारी निदेशक डॉ. बी.वी. मेहता भी इस अवसर पर मौजूद थे।
तीन वर्ष के इस समझौते के तहत वाणिज्यिक निवेश, स्थानीय प्रसंस्करण और ट्रेस करने योग्य यानी स्रोत तक पता लगाने योग्य तिलहन एवं वनस्पति तेलों की आपूर्ति की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। संभावित फसलों में मूंगफली, सोयाबीन, तिल और ऑयल पाम शामिल हैं। 
भारत दुनिया का सबसे बड़ा वनस्पति तेल आयातक है। 2024-25 तेल वर्ष के दौरान भारत ने 1.6 करोड़ टन से अधिक वनस्पति तेल का आयात किया, जिसका मूल्य 1.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक था। इससे देश की घरेलू खपत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा पूरा होता है।

आयात स्रोतों में विविधता पर जोर

भारत का खाद्य तेल आयात फिलहाल कुछ सीमित देशों पर काफी निर्भर है। पाम ऑयल मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से, सोयाबीन तेल अर्जेंटीना और ब्राजील से तथा सूरजमुखी तेल रूस और यूक्रेन से आता है।
चुनिंदा स्रोतों पर यह निर्भरता भारत की आपूर्ति श्रृंखला को भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार प्रतिबंधों और वैश्विक आपूर्ति झटकों के प्रति संवेदनशील बनाती है। वर्ष 2047 तक देश में वनस्पति तेल की मांग बढ़कर 4.65 करोड़ टन होने का अनुमान है। घरेलू उत्पादन से पूरी मांग पूरी होने की संभावना नहीं होने के कारण भारत नए और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा है।
नामपुला इस लिहाज से एक संभावित पूरक स्रोत हो सकता है। प्रांत में पर्याप्त कृषि योग्य भूमि, उपयुक्त मिट्टी और मूंगफली, सोयाबीन, तिल तथा ऑयल पाम की खेती के लिए अनुकूल जलवायु है।

नाकाला बंदरगाह से लॉजिस्टिक लाभ

नामपुला नाकाला डेवलपमेंट कॉरिडोर में स्थित है और यहां सड़क तथा रेल नेटवर्क के जरिए हिंद महासागर के गहरे पानी वाले नाकाला बंदरगाह तक पहुंच है। दक्षिण अमेरिका से आने वाली पारंपरिक आपूर्ति की तुलना में यहां से भारत के पश्चिमी तट तक अपेक्षाकृत सीधा समुद्री मार्ग उपलब्ध हो सकता है। इससे परिवहन समय और माल ढुलाई लागत कम होने की संभावना है।
मोजाम्बिक का भारत के साथ पहले से दालों का व्यापार भी है, जिससे दोनों देशों के बीच एक स्थापित वाणिज्यिक संबंध मौजूद है।
प्रस्तावित साझेदारी केवल कच्चे तिलहन के निर्यात तक सीमित नहीं होगी। इसके तहत नामपुला में क्रशिंग और रिफाइनिंग ढांचा विकसित करने की संभावना भी तलाशी जाएगी, ताकि कृषि उत्पादों का अधिक मूल्य स्थानीय स्तर पर ही जोड़ा जा सके। गवर्नर अब्दुला ने कहा कि स्थानीय प्रसंस्करण से रोजगार के अवसर पैदा होंगे, खासकर युवाओं के लिए, और प्रांत की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सॉलिडेरिडाड नेटवर्क एशिया और सॉलिडेरिडाड सदर्न अफ्रीका सामाजिक और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों की निगरानी में सहयोग करेंगे। इनमें छोटे किसानों का सशक्तीकरण, जल प्रबंधन, भूमि अधिकारों की सुरक्षा और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि कृषि विस्तार केवल पहले से खराब या परिवर्तित भूमि पर हो।

वाणिज्यिक निवेश से पहले व्यवहार्यता अध्ययन

साझेदारी में शामिल प्रत्येक पक्ष 15 दिनों के भीतर एक संयुक्त कार्य समूह के लिए प्रतिनिधि नियुक्त करेगा। यह समूह मिट्टी की उपयुक्तता, परिवहन ढांचे, बंदरगाह की क्षमता, बाजार लागत और पर्यावरणीय प्रभावों सहित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन करेगा।
SEA की सदस्य कंपनियों का एक प्रतिनिधिमंडल मोजाम्बिक सरकार के निमंत्रण पर 2027 की पहली तिमाही में नामपुला का दौरा करेगा। प्रतिनिधिमंडल खेती योग्य भूमि, बुनियादी ढांचे और नाकाला बंदरगाह का प्रत्यक्ष निरीक्षण करेगा। इस दौरे और व्यवहार्यता अध्ययन के आधार पर आगे वाणिज्यिक समझौतों का रास्ता तैयार हो सकता है।