प्रीमियम उत्पादों और क्विक कॉमर्स से बदल रहा भारत का आइसक्रीम बाजार, 2033 तक 575.33 अरब रुपये पहुंचने का अनुमान

भारत का आइसक्रीम बाजार वर्ष 2033 तक 575.33 अरब रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। प्रीमियम भारतीय स्वाद, चॉकलेट, कोन फॉर्मेट, हेल्दी उत्पाद और क्विक कॉमर्स मांग को नई दिशा दे रहे हैं। महानगरों से आगे टियर-2 शहर भी प्रीमियम आइसक्रीम की खपत के महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहे हैं।

भारत का आइसक्रीम उद्योग ग्रोथ के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग, बदलती उपभोक्ता पसंद और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए आसान उपलब्धता इस क्षेत्र को नई दिशा दे रही है। टेट्रा पैक के लिए आईएमएआरसी द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार, भारत का आइसक्रीम बाजार 2033 तक 575.33 अरब रुपये तक पहुंच सकता है। वर्ष 2025 से 2033 के बीच बाजार के करीब 11 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ने का अनुमान है।

आइसक्रीम सॉल्यूशन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी टेट्रा पैक ने इस शोध के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी के अनुसार, प्रीमियम आइसक्रीम की खपत अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गई है। छोटे और मध्यम शहरों में भी अलग तरह के स्वाद और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

अल्फांसो मैंगो, पान, केसर पिस्ता और टेंडर कोकोनट जैसे भारतीय स्वाद प्रीमियम आइसक्रीम श्रेणी में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। उपभोक्ता ऐसे उत्पादों को पसंद कर रहे हैं, जिनमें प्रीमियम अनुभव के साथ पारंपरिक भारतीय स्वाद भी शामिल हों। अहमदाबाद, जयपुर, चंडीगढ़ और इंदौर जैसे टियर-2 शहर प्रीमियम आइसक्रीम की खपत के महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहे हैं।

स्वाद की बात करें तो 2033 तक चॉकलेट सबसे तेजी से बढ़ने वाला फ्लेवर रहने का अनुमान है। इसके बाद वनीला और आम का स्थान होगा। हालांकि, कंपनियां अब केवल स्वाद पर निर्भर नहीं हैं। उत्पादों की बनावट और खाने के अनुभव को भी अलग पहचान बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा रहा है। लेयर्ड फिलिंग, क्रंची इनक्लूजन, चॉकलेट कोटिंग और अलग-अलग टेक्सचर वाले उत्पाद बाजार में आकर्षण बढ़ा रहे हैं।

संगठित आइसक्रीम बाजार में 2033 तक कोन फॉर्मेट के सबसे तेजी से बढ़ने वाले प्रारूपों में शामिल रहने की उम्मीद है। एक ही उत्पाद में अलग-अलग स्वाद और बनावट उपलब्ध कराने वाले सुविधाजनक फॉर्मेट उपभोक्ताओं को आकर्षित कर रहे हैं।

स्वास्थ्य और स्वाद के बीच संतुलन भी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। कम वसा वाली आइसक्रीम, आवश्यक पोषक तत्वों से युक्त उत्पाद तथा कम या बिना अतिरिक्त चीनी वाली आइसक्रीम की मांग बढ़ने की उम्मीद है। प्रीमियम ब्रांड वीगन, लो-शुगर, हाई-प्रोटीन, प्रोबायोटिक और प्राकृतिक सामग्री वाले उत्पाद भी पेश कर रहे हैं।

शोध के मुताबिक, आइसक्रीम की मांग अब केवल गर्मियों तक सीमित नहीं रह गई है। कोल्ड-चेन और प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार से कंपनियां नए बाजारों तक पहुंच रही हैं। वहीं, क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने आइसक्रीम की उपलब्धता बढ़ाकर इसे सालभर की जाने वाली खरीद का उत्पाद बना दिया है।

महाराष्ट्र संगठित आइसक्रीम बाजार का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है और पूरे मार्केट में इसकी हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत है। इसके बाद उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात का स्थान है।

टेट्रा पैक के प्रोसेसिंग डायरेक्टर प्रमोद कंडवाल ने कहा कि भारतीय आइसक्रीम उद्योग में उपभोक्ता अधिक विविधता, आधुनिक फॉर्मेट और बदलती जीवनशैली के अनुरूप उत्पादों की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, कंपनियों के लिए इन रुझानों को बड़े पैमाने पर बाजार तक पहुंचाने के लिए उत्पादन क्षमता और दक्षता बढ़ाना जरूरी होगा।

टेट्रा पैक 10 से 12 सितंबर 2026 तक चेन्नई में आयोजित होने वाले इंडियन आइसक्रीम कांग्रेस एंड एग्जिबिशन 2026 में अपनी तकनीक और समाधान प्रदर्शित करेगा। कंपनी के स्टॉल पर भारत में निर्मित फ्रीजर, रोटरी मोल्डर और हाई-शियर मिक्सर समेत विभिन्न उपकरण प्रदर्शित किए जाएंगे। कंपनी का इंग्रीडिएंट डोजर 20 मिलीमीटर तक के इनक्लूजन को शामिल करने में सक्षम है।