प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान भारत और न्यूजीलैंड ने कृषि, पशुपालन, डेयरी, खाद्य प्रौद्योगिकी, जैव ईंधन और शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय वस्तु एवं सेवा व्यापार को बढ़ाकर 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (करीब 35,000 करोड़ रुपये) करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किया।
यात्रा की प्रमुख उपलब्धियों में भारत के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा न्यूजीलैंड के प्राथमिक उद्योग मंत्रालय के बीच पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र में सहयोग समझौता (MoC) शामिल है। इस समझौते के तहत पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में तकनीकी सहयोग, ज्ञान एवं विशेषज्ञता का आदान-प्रदान तथा सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने की रूपरेखा तैयार की गई है।
सरकार का दावा है कि इस सहयोग के माध्यम से भारत को डेयरी उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि, फसल कटाई के बाद प्रबंधन और कृषि मूल्य श्रृंखला विकास में न्यूजीलैंड की वैश्विक विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। इससे भारत के पशुधन और डेयरी क्षेत्र के आधुनिकीकरण को गति मिलने की उम्मीद है।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की अभी काफी संभावनाएं हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (करीब 35,000 करोड़ रुपये) तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। दोनों नेताओं ने उद्योग जगत से नए अवसर तलाशने, निवेश बढ़ाने और दोनों अर्थव्यवस्थाओं की परस्पर पूरक क्षमताओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।
चित्र परिचयः न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लुक्सन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
प्रधानमंत्रियों ने बागवानी, वानिकी, पशुपालन और डेयरी जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में यह साझेदारी न्यूजीलैंड की उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि, फसल कटाई के बाद प्रबंधन और मूल्य श्रृंखला विकास संबंधी विशेषज्ञता का लाभ भारत को उपलब्ध कराएगी तथा भारत के सतत कृषि विकास के लक्ष्यों को समर्थन देगी।
बागवानी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने कृषि उत्पादकता साझेदारी के तहत कीवीफ्रूट एक्शन प्लान शुरू करने की घोषणा की। इसके साथ ही नगालैंड और उत्तराखंड में कीवीफ्रूट के दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे।
इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से बेहतर उत्पादन तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, कौशल विकास, अनुसंधान और उद्योग सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे कीवीफ्रूट की उत्पादकता और व्यावसायिक खेती में वृद्धि होगी। दोनों देशों ने सेब और शहद की उत्पादकता बढ़ाने के लिए भी इसी प्रकार की कार्ययोजनाओं पर सहयोग करने पर सहमति जताई।
यात्रा का एक अन्य महत्वपूर्ण परिणाम ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस में न्यूजीलैंड का शामिल होना रहा। इससे टिकाऊ जैव ईंधन के विकास और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत होगा और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में वैश्विक प्रयासों को गति मिलेगी।
शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके तहत राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान, कुंडली (NIFTEM-K) और मैसी यूनिवर्सिटी, न्यूजीलैंड के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
यह समझौता संयुक्त अनुसंधान, छात्र एवं संकाय आदान-प्रदान, शैक्षणिक सहयोग, खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और अन्य सहमत शैक्षणिक गतिविधियों के लिए एक संस्थागत ढांचा प्रदान करेगा। इससे खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, कृषि उद्यमिता और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।