भारत-ओमान एफटीए आज से लागू, कृषि निर्यात को बढ़ावा, उर्वरक और ऊर्जा सुरक्षा भी होगी मजबूत

भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार से लागू हो गया है। इससे भारत के लगभग 99% निर्यात को ओमान में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इस समझौते से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों, मरीन उत्पादों और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। ओमानी कच्चे तेल, एलएनजी और उर्वरकों का आयात सुगम होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।

पिछले साल 18 दिसंबर को भारत-ओमान के बीच हुआ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार, 1 जून 2026 से लागू हो गया है। यह पिछले पांच वर्षों में लागू होने वाला भारत का पांचवां मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और कुल मिलाकर 15वां व्यापार समझौता है। इस समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को ओमान के लगभग 99 प्रतिशत बाजार तक शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि ओमान से कच्चे तेल, एलएनजी, उर्वरकों और औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति सुगम होगी।

हालांकि ओमान की अपेक्षाकृत छोटी अर्थव्यवस्था के कारण प्रत्यक्ष व्यापारिक लाभ सीमित रह सकते हैं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बाहर स्थित उसकी भौगोलिक स्थिति इस समझौते को अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। हाल में खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच भारत के लिए व्यापार के वैकल्पिक तथा विश्वसनीय प्रवेश द्वार के रूप में ओमान की भूमिका अहम है।

ओमान का रणनीतिक महत्व

ओमान की आबादी लगभग 55 लाख है और उसका सकल घरेलू उत्पाद (GDP) करीब 110 अरब डॉलर है। इसलिए भारत के लिए व्यापारिक लाभ सीमित रहने की संभावना है। हालांकि इस समझौते का वास्तविक महत्व ओमान की भौगोलिक स्थिति में निहित है।

अधिकांश खाड़ी देश होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर निर्भर हैं। लेकिन ओमान का बड़ा तटीय क्षेत्र सीधे अरब सागर और ओमान की खाड़ी पर स्थित है और यह होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर पड़ता है। इससे होर्मुज मार्ग से जहाजों की आवाजाही बाधित होने के बाद भी सलालाह (Port of Salalah) और दुक्म (Port of Duqm) जैसे प्रमुख बंदरगाह सुगम बने रहते हैं। इस कारण खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष या अस्थिरता की स्थिति में भी ओमान व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक भरोसेमंद केंद्र बना रह सकता है।

ईरान युद्ध ने इस रणनीतिक लाभ को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है। अप्रैल 2025 में प्रमुख खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं से भारत का आयात लगभग 15 अरब डॉलर था, जो अप्रैल 2026 में घटकर 9.8 अरब डॉलर रह गया। इसी अवधि में भारत का इस क्षेत्र को निर्यात 4.4 अरब डॉलर से घटकर 2.7 अरब डॉलर रह गया। 

हालांकि इस दौरान ओमान एक अपवाद रहा। ओमान से भारत का आयात 246.4 प्रतिशत बढ़कर 43 करोड़ डॉलर से लगभग 1.5 अरब डॉलर पहुंच गया, जिसका प्रमुख कारण कच्चे तेल और यूरिया की अधिक खरीद रही। वहीं ओमान को भारत का निर्यात केवल 10.3 प्रतिशत घटा। यह दर्शाता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जोखिम बढ़ने पर ओमान भारत के लिए एक विश्वसनीय वैकल्पिक व्यापार और ऊर्जा मार्ग बन सकता है। 

समझौते से भारत को लाभ

थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, ओमान ने अपने लगभग 98 प्रतिशत टैरिफ लाइन पर तत्काल शुल्क मुक्त पहुंच प्रदान की है। मूल्य के आधार पर यह भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात के बराबर है। वित्त वर्ष 2025-26 में ओमान को भारत का निर्यात लगभग 4 अरब डॉलर रहा। इसमें रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद (78.1 करोड़ डॉलर) और नैफ्था (74.6 करोड़ डॉलर) प्रमुख रहे। इसके अलावा कैल्साइंड एल्युमिना (27.7 करोड़ डॉलर), लौह एवं इस्पात उत्पाद (23 करोड़ डॉलर), मशीनरी (17.8 करोड़ डॉलर) और चावल (16.7 करोड़ डॉलर) का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इस समझौते से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों, समुद्री उत्पादों, इंजीनियरिंग वस्तुओं, दवाइयों, वस्त्र, रसायनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक तथा रत्न एवं आभूषणों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

हालांकि भारत के 80 प्रतिशत से अधिक निर्यात पहले ही औसतन लगभग 5 प्रतिशत के अपेक्षाकृत कम शुल्क पर ओमान में प्रवेश कर रहे थे, लेकिन कुछ उत्पादों पर शुल्क 100 प्रतिशत तक था। इन शुल्कों के समाप्त होने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। 

CEPA से ओमान को लाभ

ओमान को इस समझौते का सबसे अधिक लाभ उन क्षेत्रों में मिलेगा, जहां वह पहले से ही भारत का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। इनमें ऊर्जा, उर्वरक और औद्योगिक कच्चा माल प्रमख हैं। समझौते के तहत भारत लगभग 78 प्रतिशत टैरिफ लाइन पर शुल्क समाप्त करेगा या उनमें कटौती करेगा।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने ओमान से 7.2 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों का आयात किया। इसमें कच्चा तेल (1.6 अरब डॉलर), तरल प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी (1.2 अरब डॉलर) और उर्वरक (84.3 करोड़ डॉलर) प्रमुख रहे। ओमान औद्योगिक फीडस्टॉक का भी एक महत्वपूर्ण स्रोत है। उसने भारत को 46.5 करोड़ डॉलर का मीथेनॉल और 42.4 करोड़ डॉलर का अमोनिया निर्यात किया।

इस प्रकार यह CEPA केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा, उर्वरक और औद्योगिक कच्चे माल की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित कर भारत और ओमान के आर्थिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाता है।