सोयाबीन की बुआई सरकारी अनुमान से काफी आगे, मानसून की रफ्तार से बढ़ा रकबाः सोपा

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के अनुसार, जून के अंत तक देश में सोयाबीन की बुआई सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो चुकी है। संगठन ने इसका कारण सरकारी रिपोर्टिंग में देरी बताया। मध्य प्रदेश में मानसून के सक्रिय होने और बेहतर कीमतों के चलते किसानों ने इस बार सोयाबीन का रकबा बढ़ाया है।

देश में सोयाबीन की बुआई जून के अंत तक सरकारी अनुमान से कहीं अधिक हो चुकी है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने कहा है कि सरकारी आंकड़ों और वास्तविक बुआई के बीच बड़ा अंतर मुख्य रूप से रिपोर्टिंग में होने वाली देरी के कारण है। सोपा के अनुसार, इस सीजन की शुरुआत में मानसून में देरी के कारण बुआई धीमी रही, लेकिन देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में मानसून सक्रिय होने के बाद बुआई ने तेजी पकड़ ली है। संगठन का कहना है कि आने वाले दिनों में यह रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है।

सोपा के मुताबिक, 30 जून तक देश में 28.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुआई हो चुकी थी, जबकि इसी अवधि के लिए सरकारी आंकड़ा सिर्फ 6.92 लाख हेक्टेयर है। संगठन ने स्पष्ट किया कि वास्तविक बुआई का क्षेत्रफल आमतौर पर सरकारी आंकड़ों से आगे रहता है, क्योंकि खेतों से जानकारी एकत्र कर सरकारी रिकॉर्ड में शामिल होने में समय लगता है।

सोपा ने यह भी बताया कि इस वर्ष बेहतर बाजार भाव के कारण पिछले सीजन में मक्का की ओर रुख करने वाले अनेक किसान फिर से सोयाबीन की खेती की ओर लौटे हैं। हालांकि, संगठन ने कहा कि अंतिम उत्पादन अगले तीन महीनों के दौरान वर्षा के वितरण और उसकी नियमितता पर निर्भर करेगा।

मध्य प्रदेश में अब तक 15.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुआई हो चुकी है, जबकि सरकार का इसी अवधि का आधिकारिक आंकड़ा 4.3 लाख हेक्टेयर है। सोपा ने कहा कि पर्याप्त बारिश के कारण राज्य में बुआई तेजी से आगे बढ़ रही है और 15 जुलाई तक लगभग पूरे लक्षित क्षेत्र में बुआई पूरी होने की संभावना है।

देश के दूसरे सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में 8.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हो चुकी है, जबकि सरकार का आंकड़ा 1.19 लाख हेक्टेयर है। हालांकि, राज्य में बुआई की प्रगति समान नहीं रही है। कुछ जिलों में 40 से 50 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो चुका है, जबकि कुछ क्षेत्रों में मिट्टी में नमी की कमी के कारण केवल 5 से 10 प्रतिशत बुआई ही हो पाई है। सोपा का अनुमान है कि यदि अगले दो सप्ताह में अच्छी बारिश होती है तो बुआई की रफ्तार और तेज होगी।

राजस्थान में अब तक 3.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुआई हो चुकी है, जबकि सरकार का इसी अवधि का आंकड़ा 0.63 लाख हेक्टेयर है। राज्य में अब तक लक्ष्य का लगभग 35 से 40 प्रतिशत क्षेत्र कवर किया जा चुका है और मानसून के आगे बढ़ने के साथ इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।

सोपा ने कहा कि अन्य प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में भी बुआई संतोषजनक गति से चल रही है, जिससे शुरुआती देरी के बावजूद इस वर्ष सोयाबीन के कुल रकबे को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।