खरीफ फसलों की बुवाई अब भी पिछले साल से 6 प्रतिशत कम, लेकिन धान का रकबा बीते वर्ष के करीब पहुंचा

हाल की बारिश से खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई है और धान का रकबा पिछले वर्ष के लगभग बराबर पहुंच गया है। हालांकि कुल खरीफ बुवाई अब भी पिछले साल से 6 प्रतिशत कम है। दलहन, मोटे अनाज, तिलहन और कपास की बुवाई में सुधार हुआ है, लेकिन ये अभी पिछले वर्ष के स्तर से पीछे हैं।

हाल के दिनों में हुई बारिश के बाद पिछले एक सप्ताह में खरीफ की बुवाई ने जोर पकड़ा है। धान का रकबा पिछले साल के लगभग बराबर पहुंच गया है। दलहन और मोटे अनाज की बुवाई अब भी पिछले साल से पीछे चल रही है। हालांकि एक सप्ताह पहले की तुलना में अंतर कम हुआ है। खरीफ 2025 की तुलना में दलहन की बुवाई 12.29 लाख हेक्टेयर (15 प्रतिशत) और मोटे अनाज की 15.06 लाख हेक्टेयर (11 प्रतिशत) कम क्षेत्र में हुई है। तिलहन का रकबा पिछले साल से 8.63 लाख हेक्टेयर यानी 5.5 प्रतिशत कम है। 

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से जारी 17 जुलाई तक की स्थिति के अनुसार, खरीफ की सभी फसलों की बुवाई अभी तक 658.19 लाख हेक्टेयर तक पहुंची है जो पिछले साल से 6 प्रतिशत कम है। सप्ताह भर पहले यह अंतर 16 प्रतिशत से अधिक था। पिछले वर्ष इस अवधि में इनका रकबा 700.47 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका था। पूरे खरीफ 2025 में विभिन्न फसलों की 1134.27 लाख हेक्टेयर में खेती हुई थी।

धान की रोपाई अभी तक 166.41 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल इस तारीख तक 167.83 लाख हेक्टेयर में इसकी रोपाई पूरी हो चुकी थी। इस तरह पिछले साल की तुलना में फासला अब सिर्फ 0.84 प्रतिशत का रह गया है। एक सप्ताह पहले, यानी 10 जुलाई तक धान का रकबा बीते वर्ष की तुलना में 8.64 प्रतिशत कम था। खरीफ 2025 के पूरे सीजन में 446.70 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी। वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक इसका औसत 412 लाख हेक्टेयर है।

पिछले शुक्रवार, यानी 17 जुलाई तक दलहन की बुवाई 69.23 लाख हेक्टेयर तक पहुंची थी, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 81.52 लाख हेक्टेयर था। खरीफ 2025 में 118.97 लाख हेक्टेयर में दालों की खेती हुई थी। एक सप्ताह पहले दलहन का रकबा पिछले साल से 23.32 प्रतिशत कम था। 

अलग-अलग दालों के हिसाब से देखें तो अरहर की बुवाई पिछले साल के 30.17 लाख हेक्टेयर की तुलना में इस वर्ष अभी तक 24.80 लाख हेक्टेयर तक पहुंची है। यानी अभी इसका रकबा 5.36 लाख हेक्टेयर कम है। उड़द का रकबा 14.36 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 13.51 लाख हेक्टेयर और मूंग का 26.94 लाख हेक्टेयर की तुलना में 23.98 लाख हेक्टेयर पहुंचा है। मोठ तथा अन्य दालों का रकबा भी पिछले वर्ष के मुकाबले कम है।

मोटे अनाजों का रकबा अभी तक 119.03 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा है, जबकि पिछले वर्ष 134.09 हेक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। खरीफ 2025 के पूरे सीजन में मोटे अनाज की खेती 192.12 लाख हेक्टेयर में हुई थी। एक सप्ताह पहले मोटे अनाज का क्षेत्र पिछले साल से 22.47 प्रतिशत कम था। 

बाजरे का रकबा अभी तक 39.98 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा है, जो पिछले वर्ष से 9.08 लाख हेक्टेयर कम है। ज्वार का रकबा 8.74 लाख हेक्टेयर है जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.25 लाख हेक्टेयर कम है। रागी की खेती अभी तक 1.06 लाख हेक्टेयर तक पहुंची है जो पिछले वर्ष की तुलना में 40,000 हेक्टेयर कम है। मक्के की बुवाई अभी तक 67.89 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले वर्ष इस अवधि में 71.5 लाख हेक्टेयर में इसकी बुवाई पूरी हो चुकी थी।

तिलहन की फसलों की बुवाई अभी तक 147.09 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इस अवधि तक 155.72 लाख हेक्टेयर में हुई थी। पूरे खरीफ 2025 में 196.38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तिलहन की खेती हुई थी। एक सप्ताह पहले तिलहन का क्षेत्र 21 प्रतिशत कम था। 

सीजन की प्रमुख तिलहन फसल सोयाबीन की बुवाई अभी तक 106.02 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले वर्ष इस अवधि में 111.05 लाख हेक्टेयर में इसकी बुवाई पूरी हो चुकी थी। मूंगफली का रकबा पिछले वर्ष के 37.69 लाख हेक्टेयर की तुलना में 34.52 लाख हेक्टेयर, सूरजमुखी का 53,000 हेक्टेयर की तुलना में 88,000 हेक्टेयर और तिल का 5.95 लाख हेक्टेयर की तुलना में 5.12 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा है।

नकदी फसलों की बात करें तो गन्ने की बुवाई पिछले सप्ताह के आंकड़े 57.58 लाख हेक्टेयर पर स्थिर है। खरीफ 2025 में अभी तक 56.72 लाख हेक्टेयर और पूरे सीजन में 58.84 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती हुई थी। जूट एवं मेस्ता का रकबा भी 6.19 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 6.32 लाख हेक्टेयर हो चुका है। लेकिन कपास का रकबा 98.40 लाख हेक्टेयर की तुलना में 92.53 लाख हेक्टेयर तक ही पहुंचा है। पिछले साल से यह करीब छह प्रतिशत कम है। एक सप्ताह पहले कपास का रकबा 15.34 प्रतिशत कम था।