सोयाबीन तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के आसार, घरेलू बाजार में गिरी सोयाबीन की कीमतें

अगस्त में सोयाबीन तेल का आयात रिकॉर्ड मासिक स्तर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि घरेलू बाजार में सोयाबीन की कीमतें तेजी से गिरी हैं। एक ओर सोयाबीन का रकबा घटा है, दूसरी ओर खाद्य तेल और सोयाबीन के बढ़ते आयात ने आत्मनिर्भरता के दावों पर सवाल खड़े किए हैं।

सोयाबीन तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के आसार, घरेलू बाजार में गिरी सोयाबीन की कीमतें

त्योहारों का मौसम नजदीक आते ही भारत में सोयाबीन तेल के आयात में तेजी की संभावना बन रही है।  घरेलू मांग में मजबूती और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सूरजमुखी तेल की आपूर्ति में व्यवधान के चलते भारतीय रिफाइनर सोयाबीन तेल की खरीद बढ़ा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम कीमतों के चलते भी सोयाबीन तेल के आयात को बढ़ावा मिल रहा है। 

व्यापारिक अनुमानों के अनुसार, अगस्त में सोयाबीन तेल का आयात 6.20 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है, जो चालू तेल वर्ष के 4.25 लाख टन के मासिक औसत से करीब 46 प्रतिशत अधिक है।

इस बीच, घरेलू बाजार में सोयाबीन की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। पिछले तीन-चार दिनों में मध्य प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन के दाम 300-400 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर चुके हैं। यह इसलिए भी अप्रत्याशित है क्योंकि त्योहारों के आसपास तिलहन और खाद्य तेलों की कीमतें बढ़ती हैं और बहुत से किसान फसल कटाई के समय उपज बेचने के बजाए त्योहारी सीजन पर बेचने के लिए स्टॉक करते हैं।  

मध्य प्रदेश के किसान नेता केदार सिरोही ने रूरल वॉयस को बताया कि तीन-चार दिन पहले तक सोयाबीन का भाव 6,200 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा था, जो अचानक घटकर 5,600-5,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। सरकार खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के लिए किसानों से तिलहन उत्पादन बढ़ाने की अपील करती है, लेकिन सोयाबीन उगाने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिलना भी नहीं मिल पाता है। गौरतलब है कि वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने सोयाबीन का एमएसपी 5,708 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। 

केदार सिरोही बताते हैं कि फसल कटाई के समय मध्यप्रदेश में किसानों को 3500-4000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर सोयाबीन बेचने को मजबूर होना पड़ा। जिसके बाद किसान आंदोलन पर उतारू हुए तब जाकर सरकार ने भावांतर योजना का ऐलान किया। लेकिन सोयाबीन तेल विदेशों से खूब आयात हो रहा है। यह सीधे-सीधे किसानों के हितों पर हमला है। 

उधर, मंडी व्यापारियों का कहना है कि सोया खली के अंतरराष्ट्रीय सौदों में कमी के चलते सोयाबीन की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है।

सूरजमुखी तेल का विकल्प बना सोयाबीन तेल

घरेलू खाद्य तेल उद्योग से जुड़े संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने पिछले दिनों संगठन के सदस्यों को पत्र लिखकर त्योहारों से ठीक पहले भारत में सोयाबीन तेल के आयात में तेजी की संभावना जताई थी। अस्थाना के मुताबिक, सूरजमुखी तेल की आपूर्ति में व्यवधान के बीच सोयाबीन तेल एक प्रमुख विकल्प के रूप में उभर रहा है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि खाद्य तेलों की बढ़ती घरेलू मांग को आखिर कब तक आयात के जरिए पूरा किया जाता रहेगा? सोयाबीन तेल के बढ़ते आयात ने घरेलू तिलहन उत्पादन और खाद्य तेलों में आयात निर्भरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

बढ़ा सोयाबीन तेल का आयात

भारत के खाद्य तेल आयात के ताजा आंकड़े घरेलू मांग की मजबूती को दर्शाते हैं। लेकिन इसका लाभ देश के किसानों को मिलने के बजाय आयात में बढ़ोतरी के रूप में दिख रहा है।

नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच भारत में वनस्पति तेलों का कुल आयात 5 प्रतिशत बढ़कर 121.50 लाख टन पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 116.03 लाख टन था। खाद्य तेलों का आयात भी 113.46 लाख टन से बढ़कर 119.23 लाख टन हो गया।

जुलाई 2026 में भारत में खाद्य तेलों का कुल आयात जून के 11.11 लाख टन से बढ़कर 14.81 लाख टन हो गया। इस दौरान पाम तेल का आयात 7.19 लाख टन और सोयाबीन तेल का आयात 4.98 लाख टन रहा।

हालांकि जुलाई में कुल वनस्पति तेल आयात पिछले वर्ष के मुकाबले 7 प्रतिशत घटकर 15.25 लाख टन रहा, लेकिन नौ महीने के आंकड़े बताते हैं कि भारत की आयात निर्भरता अब भी काफी अधिक है।

सोयाबीन के आयात में भी उछाल

खाद्य तेल ही नहीं, बल्कि तिलहन के आयात में भी बढ़ोतरी हुई है। SEA के मुताबिक, अप्रैल-मई 2026 के दौरान भारत का कुल तिलहन आयात 4.31 लाख टन रहा, जिसकी कीमत 2,284.93 करोड़ रुपये थी। इसमें अकेले सोयाबीन बीज का आयात 4.13 लाख टन रहा।

SEA का मानना है कि सोयाबीन बीज के आयात में तेज वृद्धि घरेलू उत्पादकता बढ़ाने और गुणवत्ता वाले बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। सोयाबीन का अधिक आयात यह भी दर्शाता है कि देश में इसका स्टॉक कम स्तर पर है।

दूसरी तरफ, अप्रैल-मई की अवधि में भारत से तेलखली का निर्यात 5.3 प्रतिशत कम होकर 7.39 लाख टन रहा। तेलखली के निर्यात में कमी के चलते भी किसानों को तिलहन का सही भाव नहीं मिल पा रहा है।

नेपाल के रास्ते भी आयात 

भारत के घरेलू रिफाइनिंग उद्योग के लिए नेपाल से आने वाला रिफाइंड सोयाबीन तेल भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। नवंबर 2025 से मई 2026 के बीच नेपाल ने भारत को करीब 3.93 लाख टन रिफाइंड खाद्य तेल निर्यात किया, जिसमें लगभग 3.46 लाख टन रिफाइंड सोयाबीन तेल शामिल था।

जून में नेपाल से लगभग 56,000 टन और जुलाई में करीब 61,000 टन रिफाइंड तेल भारत आने का अनुमान है। नेपाल को दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार व्यवस्था के तहत शून्य आयात शुल्क का लाभ मिलता है। लेकिन भारतीय रिफाइनिंग उद्योग को इससे नुकसान उठाना पड़ रहा है।

घटा सोयाबीन का रकबा

चालू खरीफ सीजन में अल नीनो और कमजोर मानसून की आशंकाओं के बीच, 21 अगस्त 2026 तक तिलहन का कुल रकबा 188.37 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 188.69 लाख हेक्टेयर से मामूली, यानी 0.17 प्रतिशत कम है।

लेकिन सोयाबीन के बुआई क्षेत्र में पिछले वर्ष के मुकाबले 1.41 लाख हेक्टेयर, यानी करीब 1.15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है और यह 121.35 लाख हेक्टेयर रहा है। यह देश में सोयाबीन के औसत बुआई क्षेत्र, करीब 129 लाख हेक्टेयर, से लगभग 7 लाख हेक्टेयर यानी करीब 6 प्रतिशत कम है। इस गिरावट के पीछे हाल के वर्षों में सोयाबीन उत्पादक किसानों को उचित भाव नहीं मिलना एक प्रमुख वजह माना जा रहा है।

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