भारत में चीनी का पर्याप्त स्टॉक, अनुमान से कम उत्पादन और मांग बढ़ने के कारण हुई कीमतों में बढ़ोतरीः इस्मा

ISMA ने कहा कि भारत में चीनी का पर्याप्त स्टॉक है और हाल में कीमतों में मजबूती उत्पादन में कमी, त्योहारी मांग और वैश्विक कीमतों में तेजी जैसे अस्थायी कारणों से आई है, न कि किसी संरचनात्मक कमी के कारण। संगठन के अनुसार 30 सितंबर को खत्म होने वाले चीनी वर्ष में करीब 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक रहने की उम्मीद है। इसके अलावा जल्द पेराई, आयात और स्टॉक नियंत्रण से घरेलू उपलब्धता पर्याप्त रहेगी।

भारत में चीनी का पर्याप्त स्टॉक, अनुमान से कम उत्पादन और मांग बढ़ने के कारण हुई कीमतों में बढ़ोतरीः इस्मा

चीनी उद्योग के संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा है कि चीनी की कीमतों में हालिया मजबूती को देश में चीनी की कमी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। चीनी की उपलब्धता पर्याप्त है। 2025-26 में शुद्ध चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि घरेलू खपत करीब 280-285 है। वहीं, 30 सितंबर को खत्म होने वाले चीनी वर्ष में क्लोजिंग स्टॉक करीब 35 लाख टन रहने का अनुमान है।

ISMA ने कहा कि चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी कई अस्थायी कारणों से है। इनमें शुरुआती अनुमान से कम उत्पादन, त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग, बाजार की धारणा और अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमतों में मजबूती शामिल हैं। दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसोसिएशन ने त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में आपूर्ति और कीमतों को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का स्वागत किया। इनमें 10 लाख शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी आयात की अनुमति, स्टॉक लिमिट लगाना, स्टॉक का भौतिक सत्यापन, साप्ताहिक स्टॉक का खुलासा और 2026-27 के चीनी पेराई सीजन को आगे बढ़ाना शामिल हैं। डीलरों के लिए देशभर में 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की गई है। ISMA का कहना है कि बाजार में अनुशासन के लिए इसे घटाकर 200 टन किया जा सकता है।

चीनी की उपलब्धता पर्याप्त: ISMA

ISMA के प्रेसिडेंट नीरज शिरगांवकर ने कहा, “भारत में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और उठाए जा रहे कदमों को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। सरकार और उद्योग त्योहारी मांग की अवधि से पहले ही व्यवस्थित आपूर्ति और बाजार स्थिरता बनाए रखने के लिए कदम उठा रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि आयात की अनुमति, स्टॉक रखने से जुड़े उपाय और पेराई सीजन को आगे बढ़ाने से बाजार में मौजूदा अस्थायी मजबूती को संभालने के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। करीब 35 लाख टन के अनुमानित क्लोजिंग स्टॉक और नए सीजन का उत्पादन समय से पहले शुरू होने से घरेलू उपलब्धता को लेकर उद्योग आश्वस्त है। 

ISMA चीनी मिलों के साथ मिलकर 2026-27 के पेराई सीजन की शुरुआत को 10-15 दिन आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है, ताकि त्योहारी सीजन के दौरान घरेलू चीनी की नई आपूर्ति पहले उपलब्ध हो सके।

ISMA के उपाध्यक्ष माधव बी. श्रीराम ने कहा कि पेराई सीजन को 10-15 दिन आगे बढ़ाने से जरूरत के समय अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष पेराई पहले ही शुरू हो चुकी है। इससे अक्टूबर में चीनी उत्पादन 4 लाख टन के औसत की तुलना में बढ़कर लगभग 10 लाख होने की उम्मीद है। 

एथेनॉल कार्यक्रम से नहीं बढ़ीं चीनी कीमतें: ISMA

ISMA ने यह भी दावा किया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) मौजूदा चीनी कीमतों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार नहीं है। एसोसिएशन के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का डायवर्जन पेराई सीजन से काफी पहले देश में चीनी के कुल संतुलन और घरेलू खपत की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय किया जाता है।

एथेनॉल कार्यक्रम में इस्तेमाल होने वाले फीडस्टॉक के स्वरूप में भी बड़ा बदलाव आया है। 2025-26 में कुल एथेनॉल आपूर्ति में अनाज आधारित एथेनॉल की हिस्सेदारी करीब 75% रहने का अनुमान है, जबकि 2021-22 में यह केवल 17% थी। वहीं, चीनी आधारित एथेनॉल की हिस्सेदारी घटकर 25% रह गई है। 2025-26 में कुल एथेनॉल आपूर्ति करीब 1,197 करोड़ लीटर रहने का अनुमान है और ब्लेंडिंग दर 20% तक पहुंच गई है।

ISMA ने कहा कि एथेनॉल कार्यक्रम ने चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति और नकदी प्रवाह को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे मिलों को किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान करने में मदद मिली है। इसका संकेत इस बात से मिलता है कि 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 के गन्ना बकाये का करीब 97% भुगतान किया जा चुका था। 

ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि एथेनॉल की ओर चीनी का डायवर्जन घरेलू जरूरतों का आकलन करने के बाद ही तय किया जाता है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल कार्यक्रम में भी महत्वपूर्ण बदलाव आया है और अब अनुमानित 75% आपूर्ति अनाज से हो रही है। इसलिए मौजूदा चीनी बाजार को वास्तविक मांग-आपूर्ति के आधार पर देखा जाना चाहिए, न कि कीमतों में अस्थायी बदलाव के लिए एथेनॉल को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

2016-17 जैसी चीनी की कमी नहीं

एसोसिएशन ने कहा कि मौजूदा बाजार स्थिति 2016-17 के चीनी सीजन से बिल्कुल अलग है। उस समय भारत को सूखे के कारण वास्तविक उत्पादन कमी का सामना करना पड़ा था। उस सीजन में उत्पादन करीब 203 लाख टन रहा था, जबकि मांग 245-250 लाख टन थी। ISMA के अनुसार, वर्तमान स्थिति अधिक आरामदायक है। देश में 2025-26 में करीब 279 लाख टन शुद्ध चीनी उत्पादन और करीब 35 लाख टन क्लोजिंग स्टॉक रहने का अनुमान है।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि सरकार के उठाए गए सुधारात्मक कदमों के कारण पिछले कुछ दिनों में चीनी कीमतों में नरमी शुरू हो गई है। त्योहारी सीजन की खरीदारी सामान्य होने और नई घरेलू आपूर्ति बढ़ने के साथ कीमतों में आगे भी नरमी आने की उम्मीद है। इससे त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त मात्रा में और उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध रहने की संभावना है।

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