तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) ने खरीफ सीजन में मक्का की बुवाई कर रहे किसानों के लिए कीमतों का अनुमान जारी किया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, अक्टूबर-नवंबर 2026 में फसल की कटाई के दौरान अच्छी गुणवत्ता वाले मक्का का खेत स्तर यानी फार्मगेट भाव 2,200 से 2,400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रह सकता है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,410 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इस प्रकार, किसानों को एमएसपी से भी कम भाव मिलने का अनुमान है। वर्ष 2025-26 में मक्का का एमएसपी 2,400 रुपये प्रति क्विंटल था, जिसे 2026-27 के लिए केवल 10 रुपये बढ़ाकर 2,410 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है।
TNAU के सेंटर फॉर एग्रीकल्चरल एंड रूरल डेवलपमेंट स्टडीज (CARDS) के तहत डोमेस्टिक एंड एक्सपोर्ट मार्केट इंटेलिजेंस सेल (DEMIC) ने यह अनुमान जारी किया है। इसके लिए तमिलनाडु की उदुमलपेट मंडी में पिछले 15 वर्षों के मक्का भावों का विश्लेषण करने के साथ-साथ बाजार सर्वेक्षण भी किया गया।
रिकॉर्ड मक्का उत्पादन का अनुमान
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025-26 में देश का मक्का उत्पादन रिकॉर्ड 5.51 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के 4.34 करोड़ टन उत्पादन से करीब 27 फीसदी अधिक है। वर्ष 2025-26 के दौरान देश में मक्का का रकबा सालाना आधार पर 19 फीसदी बढ़कर 144 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया।
मक्का की मांग अब केवल खाद्य और पशु आहार तक सीमित नहीं है। औद्योगिक उपयोगों, इथेनॉल उत्पादन और बायोप्लास्टिक जैसे क्षेत्रों में भी इसकी मांग बढ़ी है। इसी वजह से पिछले कुछ वर्षों में भारत के मक्का बाजार की मांग संरचना में बड़ा बदलाव आया है।
इथेनॉल का मुख्य स्रोत बना मक्का
भारत की इथेनॉल मिश्रण नीति ने मक्का की घरेलू मांग को नया आधार दिया है। इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 (नवंबर-अक्टूबर) में अनाज आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी कुल आपूर्ति में करीब 67 फीसदी तक पहुंच गई है और मक्का अनाज आधारित इथेनॉल के प्रमुख फीडस्टॉक के रूप में उभरा है। इसके बावजूद देश के कई इलाकों में मक्का किसानों को एमएसपी मिलना भी मुश्किल हो गया है।
मौजूदा इथेनॉल आपूर्ति वर्ष के दौरान जून तक कुल इथेनॉल आपूर्ति 717 करोड़ लीटर तक पहुंच गई। इसमें सबसे अधिक 258 करोड़ लीटर यानी 36 फीसदी इथेनॉल का उत्पादन मक्का से हुआ। इसके बाद एफसीआई के चावल से 177 करोड़ लीटर यानी 25 फीसदी इथेनॉल का उत्पादन हुआ। जबकि गन्ना जूस से लगभग 20 फीसदी इथेनॉल उत्पादन हुआ।
इथेनॉल उत्पादन के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) के चावल की उपलब्धता बढ़ना मक्का कीमतों में गिरावट की एक अहम वजह है।
कई विपरीत कारक
मक्का बाजार में इस समय कई विपरीत कारक एक साथ काम कर रहे हैं। एक ओर रिकॉर्ड मक्का उत्पादन और इथेनॉल के लिए चावल की उपलब्धता कीमतों पर दबाव डाल सकती है, वहीं दूसरी ओर इथेनॉल, पोल्ट्री और औद्योगिक क्षेत्रों की मजबूत मांग कीमतों को सहारा दे सकती है। मौसम संबंधी जोखिम और प्रमुख उत्पादक राज्यों में फसल की स्थिति भी अक्टूबर-नवंबर में वास्तविक बाजार भाव तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस साल फरवरी में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर अंतरिम फ्रेमवर्क के तहत अमेरिकी सोया तेल और डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स (DDGS) के शुल्क-मुक्त आयात पर सहमति बनी थी। इसके बाद मक्का की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी और किसानों को एमएसपी से कम भाव पर उपज बेचनी पड़ी। DDGS मक्का आधारित इथेनॉल उत्पादन का एक सह-उत्पाद है, जिसका इस्तेमाल पशु आहार के रूप में किया जाता है।