कई राज्यों में रबी की तैयार फसलों पर बारिश-आंधी व ओलावृष्टि का कहर, शिवराज ने की समीक्षा बैठक

बेमौसम बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि ने कई राज्यों में रबी की लगभग तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। गेहूं, सरसों और दलहनी फसलों की पैदावार और उत्पादन पर असर की आशंका है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है और मुआवजे की मांग तेज हो रही है

रबी सीजन की जिन फसलों को किसानों ने कई महीनों की मेहनत, लागत और लगन से तैयार किया है, वे अब असमय बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि की मार झेल रही हैं। देश के कई राज्यों में अचानक बदले मौसम ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। फसलों को हुए नुकसान की समीक्षा के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने नुकसान का तुरंत सर्वेक्षण कराने और आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए।

पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी दर्ज की गई, जबकि हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि से रबी फसलों को व्यापक क्षति हुई है।

इस समय सरसों की कटाई कई क्षेत्रों में शुरू हो चुकी है, वहीं गेहूं की फसल दाना भरने और पकने की अवस्था में है। ऐसे में तेज बारिश और ओलावृष्टि से बालियां झुकने, फसल गिरने (लॉजिंग), दानों के काले पड़ने और गुणवत्ता में गिरावट का खतरा बढ़ गया है। चना और मसूर जैसी दलहनी फसलें भी प्रभावित हुई हैं, जिससे उत्पादन में कमी की आशंका जताई जा रही है।

आईसीएआर के पूर्व डीडीजी (एनआरएम) डॉ. जे.एस. सामरा ने रूरल वायस को बताया कि कटाई के लिए तैयार सरसों और गेहूं की अगैती फसल को भारी बारिश और ओले पड़ने से भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में जलभराव होने से फसलें गिर गई हैं। इससे पैदावार की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और कटाई में देरी होगी।

हरियाणा के करनाल जिले के बुटाणा गांव के प्रगतिशील किसान नीरज चौधरी का कहना है कि सरसों और गेहूं की खड़ी फसल पर इतनी अधिक बारिश पड़ने से पैदावार में कम से कम 20 फीसदी का नुकसान होगा। किसानों के लिए यह बारिश आफत बनकर आई है।

किसानों का कहना है कि फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत में असामान्य गर्मी ने पहले ही फसलों को प्रभावित किया था, और अब बेमौसम बारिश ने उनकी मुसीबत बढ़ा दी है। विभिन्न राज्यों में किसानों ने सरकार से नुकसान का त्वरित सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

अखिल भारतीय किसान सभा ने केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधते हुए किसानों के नुकसान की जानबूझकर कम रिपोर्टिंग और राहत उपायों को जारी करने में संवेदनहीनता का आरोप लगाया। किसान सभा ने केंद्र सरकार से सभी प्रभावित किसानों के लिए एक व्यापक राहत पैकेज घोषित करने और तत्काल मुआवजा जारी करने की मांग की है।

शिवराज सिंह चौहान ने की समीक्षा बैठक

असमय बारिश और ओलावृष्टि से कई राज्यों में फसलों को हुए नुकसान की समीक्षा के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने फसल नुकसान का तुरंत सर्वेक्षण कराने और आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। राज्यों से तुरंत संपर्क कर नुकसान का आकलन कराया जा रहा है। कृषि मंत्री ने बताया कि SDRF के तहत राज्य सरकारें राहत दे रही हैं, वहीं फसल बीमा योजना के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कर किसानों को राहत उपलब्ध कराई जाए। 

कृषि मंत्री ने कहा, हमने आगामी खरीफ सीजन की तैयारी के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों में रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का निर्णय लिया है, ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार खरीफ फसल के लिए बेहतर रणनीति बनाई जा सके। इसके लिए देश को पांच ज़ोन (उत्तर, दक्षिण, पश्चिम, पूर्व और नॉर्थ-ईस्ट/हिली स्टेट्स) में बांटकर रीजनल कॉन्फ्रेंस की जाएगी, ताकि खरीफ फसल के लिए बेहतर रणनीति बनाई जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने बैठक में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुचारु खरीद सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि रबी फसल का उत्पादन इस वर्ष बंपर हुआ है। गेहूं और धान की खरीदी शीघ्र प्रारंभ होगी, साथ ही तुअर, मसूर और उड़द की भी पूरी खरीदी की जाएगी। किसान जितनी उपज बेचना चाहेंगे, हम खरीदेंगे।