गन्ना (नियंत्रण) आदेश पर राजू शेट्टी ने उठाए सवाल, किसानों के हितों को बचाने की मांग

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 को लेकर पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने नई चीनी मिलों के बीच 25 किलोमीटर दूरी के प्रावधान को खत्म करने और किसानों को गन्ने के सभी उत्पादों की आय में कम से कम 75 फीसदी हिस्सेदारी देने की मांग की है।

केंद्र सरकार द्वारा गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 में किए जा रहे बदलाव को लेकर किसान नेताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। महाराष्ट्र से पूर्व लोक सभा सांसद और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के संस्थापक-अध्यक्ष राजू शेट्टी ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित शुगरकेन (कंट्रोल) ऑर्डर, 2026 पर कई आपत्तियां और सुझाव भेजे हैं। उन्होंने उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय को पत्र लिखकर प्रस्तावित आदेश की कई खामियां गिनाईं।

राजू शेट्टी ने नई चीनी मिलों के बीच 25 किलोमीटर की दूरी जैसे प्रावधान को खत्म कर चीनी उत्पादन को सभी के लिए खोलने और किसानों को गन्ने के सभी उत्पादों से प्राप्त आमदनी में कम से कम 75 फीसदी हिस्सेदारी देने की मांग की है। 

राजू शेट्टी ने 18 मई 2026 को मंत्रालय को भेजे पत्र में कहा कि गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) की गणना और भुगतान प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि गन्ने की उत्पादन लागत की गणना कौन करेगा और यह किस आधार पर की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्टता का अभाव है। 

प्रस्तावित आदेश में नई चीनी मिलों के बीच दूरी बढ़ाकर 25 किलोमीटर करने का प्रावधान किया गया है। शेट्टी ने इसे किसानों के साथ नाइंसाफी करार देते हुए कहा कि इससे चीनी मिलों को एकाधिकार मिल जाएगा और किसान उन्हें गन्ना बेचने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि नए आदेश से ऐसे प्रावधान हटाए जाने चाहिए। शेट्टी के अनुसार, अधिक प्रतिस्पर्धा से ही चीनी उद्योग में पारदर्शिता और ईमानदारी आएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर चीनी मिलें गन्ने की कमी की शिकायत करती हैं, जबकि दूसरी ओर कई मिलों ने अपनी क्रशिंग क्षमता कई गुना बढ़ा ली है। इससे स्पष्ट है कि नई मिलों की आवश्यकता और संभावनाएं मौजूद हैं।

शेट्टी ने महाराष्ट्र में हार्वेस्टिंग एवं ट्रांसपोर्टेशन (H&T) चार्ज को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि एक किसान की फसल चीनी मिल से एक किलोमीटर दूर है और दूसरे किसान की 25 किलोमीटर दूर, तो पास के किसान पर अतिरिक्त परिवहन लागत का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने कटाई और परिवहन की औसत लागत को शामिल करने की मांग की है।

उन्होंने यह भी कहा कि कई चीनी मिलें अब केवल चीनी ही नहीं, बल्कि एथेनॉल, बिजली, बायोगैस, उर्वरक और अन्य बायो-प्रोडक्ट्स से भी बड़ी आय अर्जित कर रही हैं, लेकिन एफआरपी तय करते समय इन आय स्रोतों को शामिल नहीं किया जाता। शेट्टी ने मांग की है कि किसानों को इन सभी सह-उत्पादों से होने वाली आय में कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। 

पत्र में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। शेट्टी ने कहा कि कानून में 14 दिनों के भीतर भुगतान का प्रावधान किया गया है, लेकिन भुगतान में अधिकतम देरी की सीमा स्पष्ट नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर भुगतान न करने वाली चीनी मिलों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान किया जाए।

राजू शेट्टी ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से चीनी मिलों द्वारा लिए जाने वाले ऋण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि चीनी गिरवी रखकर लिए गए ऋण की 80 प्रतिशत राशि सीधे किसानों के खातों में जमा की जानी चाहिए ताकि बकाया भुगतान सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि चीनी मिलों के निदेशकों को किसानों के बकाया भुगतान के लिए व्यक्तिगत और संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया जाए।

राजू शेट्टी ने गन्ना नियंत्रण आदेश में किसी भी संशोधन को लागू करने से पहले सभी हितधारकों के साथ खुली चर्चा करने और गन्ना किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।