RBI Monetary Policy: भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को जारी अपनी मौद्रिक नीति समिति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। आरबीआई गवर्नर संजय मलहोत्रा की अध्यक्षता में 6 से 8 अप्रैल 2026 के बीच हुई बैठक में यह फैसला सभी छह सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया। इस फैसले के अनुरूप स्थायी जमा सुविधा (SDF) दर 5.00% पर बनी रहेगी, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर और बैंक दर 5.50% पर यथावत रहेंगी। समिति ने आगे के लिए ‘न्यूट्रल’ नीति रुख भी बरकरार रखा, जिससे बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार प्रतिक्रिया देने का लचीलापन बना रहेगा।
वैश्विक जोखिमों का बढ़ता दबाव
मौद्रिक नीति समीक्षा समिति ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं को रेखांकित किया, ईरान युद्ध के बारे में, जिसने आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित किया और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है। इस युद्ध के चलते ऊर्जा कीमतों में वृद्धि हुई है, सॉवरेन बॉन्ड प्रतिफल बढ़े हैं और इक्विटी बाजारों में गिरावट आई है। सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे वैश्विक मुद्राओं पर दबाव पड़ा है।
केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी कि यदि संघर्ष और बढ़ता है या लंबा खिंचता है, तो यह वैश्विक आर्थिक वृद्धि के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। अपने बयान में गवर्नर ने कहा कि ऊर्जा बाजारों, उर्वरकों और अन्य वस्तुओं में व्यवधान उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है, जिससे घरेलू उत्पादन घट सकता है।
घरेलू अर्थव्यवस्था का लचीलापन बरकरार
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, 2025-26 में भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही। वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.6% रहने का अनुमान है, जिसे मजबूत निजी उपभोग और निवेश का समर्थन मिला। मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों और सेवाक्षेत्र की मजबूती ने वृद्धि को गति दी।
हालांकि, आगे ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति बाधाएं, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख मार्गों पर, 2026-27 में घरेलू उत्पादन पर दबाव डाल सकती हैं। बढ़ी हुई माल ढुलाई और बीमा लागत निर्यात को प्रभावित कर सकती है, जबकि वैश्विक वित्तीय अस्थिरता घरेलू वित्तीय परिस्थितियों को सख्त कर सकती है।
अपने बयान में संजय मल्होत्रा ने कहा कि कृषि क्षेत्र की संभावनाएं बेहतर जलाशय स्तरों के कारण मजबूत हैं। ग्रामीण मांग भी मजबूत बनी हुई है और अनुकूल कृषि परिस्थितियों तथा स्वस्थ श्रम बाजार के कारण इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।
वृद्धि अनुमान घटकर 6.9%
इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, RBI ने 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान लगाया है। तिमाही आधार पर, पहली तिमाही में 6.8%, दूसरी में 6.7%, तीसरी में 7.0% और चौथी तिमाही में 7.2% वृद्धि का अनुमान है। हालांकि जोखिम अधिक है, मगर केंद्रीय बैंक को उम्मीद है कि सेवाक्षेत्र की निरंतर मजबूती, मैन्युफैक्चरिंग में क्षमता का बढ़ता उपयोग, GST में बदलाव और कंपनियों व वित्तीय संस्थानों की मजबूत बैलेंस शीट वृद्धि को समर्थन देंगी। सरकार द्वारा रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के प्रयास भी मध्यम अवधि में आर्थिक वृद्धि को मजबूती देंगे।
मुद्रास्फीति का परिदृश्य और जोखिम
नई खुदरा महंगाई श्रृंखला के अनुसार, फरवरी 2026 में खुदरा मुद्रास्फीति 3.2% रही, जो जनवरी के 2.7% से अधिक है, जिसका मुख्य कारण बेस इफेक्ट रहा। कोर मुद्रास्फीति नियंत्रित बनी रही। वर्ष 2026-27 के दौरान खुदरा महंगाई 4.6% रहने का अनुमान है। इसके पहली तिमाही में 4.0%, दूसरी में 4.4%, तीसरी में 5.2% और चौथी तिमाही में 4.7% का अनुमान है। हालांकि, वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और संभावित अल नीनो स्थितियों के कारण जोखिम ऊपर की ओर बने हुए हैं, जो कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
RBI का कहना है कि भारत का बाहरी क्षेत्र मजबूत बना हुआ है, हालांकि वैश्विक बाधाओं के कारण वस्तु निर्यात प्रभावित हुआ है, जबकि आयात में तेज वृद्धि से व्यापार घाटा बढ़ा है। अप्रैल 2026 की शुरुआत तक विदेशी मुद्रा भंडार 697.1 अरब डॉलर रहा, जो एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है। वित्तीय स्थितियां स्थिर बनी हुई हैं, बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता और ऋण वृद्धि में स्थिरता देखी जा रही है।
अतिरिक्त उपायों की घोषणा
RBI ने कारोबारी सुगमता बढ़ाने, बैंकों की पूंजी पर्याप्तता को मजबूत करने और वित्तीय बाजारों के विकास के लिए कई कदमों की घोषणा की है। इनमें नियामकीय निर्देशों को तर्कसंगत बनाना, MSMEs के लिए TReDS प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्डिंग मानकों में ढील और टर्म मनी मार्केट में व्यापक भागीदारी की अनुमति शामिल है।
MPC ने जोर दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल वैश्विक कारकों से उत्पन्न आपूर्ति झटके का सामना कर रही है। हालांकि महंगाई लक्ष्य के भीतर है, लेकिन बढ़ते जोखिमों और अनिश्चितताओं को देखते हुए सतर्क दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दोहराया कि भारत की व्यापक आर्थिक बुनियाद पहले की तुलना में अधिक मजबूत है, जो बाहरी झटकों का सामना करने में सक्षम बनाती है। हालांकि, केंद्रीय बैंक सतर्क रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर वृद्धि तथा मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने को तैयार है।