खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से अप्रैल में खुदरा महंगाई 13 माह के उच्च स्तर पर

खुदरा महंगाई अप्रैल 2026 में बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो एक साल से अधिक समय का उच्चतम स्तर है। खाद्य वस्तुओं, खासकर सब्जियों और घरेलू जरूरतों की चीजों की कीमतों में वृद्धि इसका मुख्य कारण रही।

खुदरा महंगाई अप्रैल 2026 में बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई, जो 13 माह का उच्चतम स्तर है। मार्च में यह 3.40 प्रतिशत थी। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की तरफ से मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण रही। ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई 3.74 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.16 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे पहले जनवरी में खुदरा महंगाई 2.74 प्रतिशत और फरवरी में 3.21 प्रतिशत थी।

उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) के आधार पर खाद्य महंगाई मार्च के 3.87 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 4.20 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण खाद्य महंगाई 4.26 प्रतिशत और शहरी खाद्य महंगाई 4.10 प्रतिशत रही।

मुख्य खाद्य वस्तुओं में टमाटर की कीमतों में सालाना आधार पर 35.28 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई, जबकि फूलगोभी 25.58 प्रतिशत महंगी हुई। हालांकि कुछ सब्जियों की कीमतों में गिरावट का भी रुख रहा। आलू की कीमतों में 23.69 प्रतिशत और प्याज में 17.67 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मटर और चने की कीमतें भी 6.75 प्रतिशत कम हुईं।

कीमती धातुओं और आभूषणों की महंगाई भी ऊंचे स्तर पर बनी रही। चांदी के आभूषणों की महंगाई दर 144.34 प्रतिशत रही, जबकि सोना, हीरा और प्लेटिनम आभूषणों की महंगाई 40.72 प्रतिशत दर्ज की गई। पर्सनल केयर और विविध वस्तुओं की श्रेणी में 17.66 प्रतिशत महंगाई दर्ज हुई, जबकि परिवहन महंगाई लगभग स्थिर रही और माइनस 0.01 प्रतिशत रही।

आरबीआई ने 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। केंद्रीय बैंक ने पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों और संभावित अल नीनो प्रभाव को महंगाई के लिए जोखिम बताया है। वहीं क्रिसिल इंटेलिजेंस ने चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के 74 दिन बाद भी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई धीरे-धीरे बढ़ रही है। इससे संकेत मिलता है कि अब तक उपभोक्ता काफी हद तक सुरक्षित रहा है। हालांकि, वनस्पति तेल जैसी कुछ श्रेणियों में पश्चिम एशिया संकट का असर अधिक देखने को मिला है। उन्होंने कहा, “पश्चिम एशिया संकट, हीटवेव और इस वर्ष अल नीनो की आशंका के कारण चालू वित्त वर्ष में कृषि उत्पादन और खाद्य महंगाई पर विशेष नजर रखनी होगी।”

उन्होंने कहा, “सरकार ने अब तक खुदरा ईंधन महंगाई को नियंत्रित रखा है, लेकिन वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण घरेलू रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का जोखिम बना हुआ है। इसके अलावा ऊर्जा और अन्य कच्चे माल की लागत, साथ ही व्यापार और परिवहन खर्च में तेज वृद्धि का बोझ उत्पादक आगे उपभोक्ताओं पर डाल सकते हैं, जिससे कोर महंगाई बढ़ सकती है।”

उन्होंने कहा कि रुपये में गिरावट से आयातित कच्चे माल की लागत भी बढ़ रही है। इसके अतिरिक्त, लगातार पड़ रही गर्मी की लहर और सामान्य से कमजोर मानसून की आशंका के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य महंगाई पर दबाव बढ़ने की संभावना है।