भारत में हर घंटे एक किसान या खेत मजदूर की आत्महत्या, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मामले
वर्ष 2024 में भारत में खेती-किसानी से जुड़े 10,546 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें 56 प्रतिशत खेत मजदूर थे। महाराष्ट्र में सबसे अधिक मामले दर्ज हुए, जबकि कर्नाटक में आत्महत्या के मामलों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ओर से जारी ‘भारत में आकस्मिक मौतें एवं आत्महत्याएं 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 के दौरान देश में खेती-किसानी से जुड़े 10,546 लोगों ने आत्महत्या की। यह देश में दर्ज कुल 1,70,746 आत्महत्याओं का 6.2 प्रतिशत है।
वर्ष 2024 में खेती से जुड़े आत्महत्या के मामलों में वर्ष 2023 की तुलना में 2.2 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2023 में देश में किसानों व खेत मजदूरों की आत्महत्या के 10,786 मामले सामने आए थे। इसके बावजूद किसानों की खुदकुशी की समस्या गंभीर बनी हुई है। देश में प्रतिदिन औसतन 28 किसान व खेत मजदूर आत्महत्या कर रहे हैं। पिछले पांच वर्षों के रुझान बताते हैं कि भारत में लगभग हर घंटे एक किसान या खेत मजदूर अपनी जान दे रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 के दौरान देश में कुल 1,70,746 लोगों ने आत्महत्या की, जो 2023 में हुई 1,71,418 आत्महत्याओं से थोड़ा ही कम है। इस बीच, देश का सुसाइड रेट 12.3 से घटकर 12.2 हो गया, हालांकि यह 2019 के 10.4 के स्तर से अब भी अधिक है।
खेत मजदूरों में अधिक आत्महत्या
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में खेती से जुड़े जिन 10,546 लोगों ने आत्महत्या की, उनमें 5,913 यानी लगभग 56 प्रतिशत खेत मजदूर थे।
वर्ष 2019 में कृषि संबंधी आत्महत्याओं में खेत मजदूरों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत थी, लेकिन तब से इसमें लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। इससे खेती पर निर्भर मजदूरों की संकटपूर्ण स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
वर्ष 2024 में कृषि क्षेत्र से जुड़ी आत्महत्याओं में 4,633 यानी करीब 44 प्रतिशत हिस्सेदारी किसानों की रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी कम है। खेती की बढ़ती लागत, मौसम की मार, कर्ज का दबाव और उपज के उचित दाम न मिल पाने के कारण किसान और खेत मजदूर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
देश के कृषक परिवारों की आय में खेती से होने वाली आमदनी की हिस्सेदारी घटती जा रही है, जबकि मजदूरी से होने वाली आय पर निर्भरता बढ़ी है। कृषि क्षेत्र से जुड़ी आत्महत्याओं के पीछे कई आर्थिक और सामाजिक कारण माने जाते हैं।
महाराष्ट्र में सबसे अधिक आत्महत्याएं
रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में खेती-किसानी से जुड़े सबसे अधिक आत्महत्या के मामले सामने आए। राज्य में 3,824 किसानों और खेत मजदूरों ने आत्महत्या की, जो देश के कुल कृषि क्षेत्र से जुड़े आत्महत्या मामलों का 36.26 प्रतिशत है।
कर्नाटक में खेती-किसानी से जुड़े आत्महत्या के 2,971 मामले दर्ज किए गए, जो महाराष्ट्र के बाद दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसके बाद मध्य प्रदेश (835), आंध्र प्रदेश (780), तमिलनाडु (503) और छत्तीसगढ़ (486) का स्थान रहा।
कर्नाटक में खेती से जुड़ी आत्महत्या के मामलों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई। राज्य में 2023 की तुलना में आत्महत्या के मामलों में 22.61 प्रतिशत की वृद्धि हुई। राजस्थान में यह वृद्धि 14 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 7.46 प्रतिशत रही।
हादसों से मौतें बढ़ीं
NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में दुर्घटनाजनित मौतों की संख्या तेजी से बढ़ी, जिससे दुर्घटनाजनित मौतों की तुलना में आत्महत्याओं का अनुपात कम हो गया। देश में वर्ष 2024 के दौरान 4,67,857 दुर्घटनाजनित मौतें दर्ज की गईं, जो 2023 में दर्ज 4,44,104 मौतों की तुलना में 5.3 प्रतिशत अधिक हैं।
वर्ष 2019 से 2024 के बीच आत्महत्याओं की संख्या में 22.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि दुर्घटनाजनित मौतों की संख्या में 11.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

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