सरकार ने 25 लाख टन गेहूं निर्यात की अनुमति दी, लेकिन निर्यात पर प्रतिबंध की नीति जारी

महानिदेशालय विदेशी व्यापार (DGFT) ने स्पष्ट किया है कि गेहूं की निर्यात नीति अभी भी "प्रतिबंधित" श्रेणी में रहेगी, वहीं 25 लाख टन गेहूं निर्यात की विशेष अनुमति दी गई है। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।

केंद्र सरकार ने मंगलवार को 25 लाख टन गेहूं निर्यात की अधिसूचना जारी कर दी है। हालांकि, गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध की नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 

महानिदेशालय विदेशी व्यापार (DGFT) ने स्पष्ट किया है कि गेहूं की निर्यात नीति अभी भी "प्रतिबंधित" श्रेणी में रहेगी, वहीं 25 लाख टन गेहूं निर्यात की विशेष अनुमति दी गई है। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।

सरकार ने गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को भी यथावत रखा है, लेकिन अतिरिक्त 5 लाख टन आटा और संबंधित उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दी है।

अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उनकी सरकारों के अनुरोध पर भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली विशेष अनुमति के आधार पर होने वाला निर्यात पहले की तरह जारी रहेगा। यह अनुमति 25 लाख टन की सीमा के अतिरिक्त होगी। 

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने गेहूं निर्यात पर लगभग चार साल के प्रतिबंध के बाद 13 फरवरी को 25 लाख टन गेहूं के निर्यात की घोषणा की थी। खाद्य मंत्रालय के अनुसार, यह फैसला मौजूदा उपलब्धता और कीमतों की स्थिति को देखते हुए लिया गया।
मई 2022 में, केंद्र सरकार ने गेहूं उत्पादन में गिरावट के कारण बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके साथ ही गेहूं भंडारण पर भी समय-समय पर स्टॉक लिमिट लागू की गई। हाल ही में गेहूं पर स्टॉक लिमिट को भी समाप्त किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं के दाम कम होने के कारण भारत से फिलहाल गेहूं निर्यात की बहुत अधिक संभावना नहीं है। फिर भी 25 लाख गेहूं के निर्यात की अनुमति मिलने से घरेलू बाजार में कीमतों को कुछ सहारा मिलने की उम्मीद है जो नए सीजन से पहले किसानों के लिए अच्छा संकेत है। 

पर्याप्त गेहूं भंडार 

खाद्य मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025–26 के दौरान निजी कंपनियों के पास लगभग 75 लाख टन गेहूं का भंडार उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 32 लाख टन अधिक है। 

इसके अलावा 1 अप्रैल 2026 तक भारतीय खाद्य निगम के केंद्रीय पूल में कुल गेहूं उपलब्धता लगभग 182 लाख टन रहने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि निर्यात की यह अनुमति घरेलू खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को प्रभावित नहीं करेगी। 

अब देश में गेहूं के पर्याप्त भंडार, बंपर उत्पादन और घरेलू बाजार में गेहूं की गिरती कीमतों को देखते हुए सरकार ने आंशिक रूप से निर्यात खोलने का फैसला लिया है। लेकिन गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध की नीति को जारी रखा है। यानी गेहूं निर्यात को लेकर सरकार फूंक फूंककर कदम बढ़ा रही है। 

बढ़ा गेहूं रकबा

रबी 2026 सीजन में गेहूं का रकबा बढ़कर लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 328.04 लाख हेक्टेयर था। न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद व्यवस्था के कारण किसानों का विश्वास मजबूत हुआ है और इस वर्ष भी बंपर उत्पादन की संभावना जताई जा रही है।

निर्यात के आसार कम

आगामी रबी मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं का एमएसपी 2585 रुपये प्रति क्विटंल तय किया गया है। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं का भाव 250 डॉलर प्रति टन से कम होने के कारण 25 लाख टन निर्यात की अनुमति मिलने के बावजूद फिलहाल भारत से गेहूं निर्यात के आसार बहुत कम हैं। फिर भी गेहूं के निर्यात पर लगी रोक का आंशिक रूप से हटना आगामी रबी सीजन की कटाई से पहले एक महत्वपूर्ण कदम है।