दिल्ली-एनसीआर में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) की तरफ से बुलाई गई तीन दिवसीय ट्रांसपोर्ट हड़ताल गुरुवार से शुरू हो गई। इससे राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में कॉमर्शियल परिवहन सेवाएं प्रभावित हुई हैं। 23 मई तक चलने वाली इस हड़ताल का मुख्य कारण दिल्ली सरकार द्वारा वाणिज्यिक वाहनों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) में बढ़ोतरी, सीएनजी की बढ़ती कीमतें और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के प्रस्तावित नए प्रतिबंध हैं।
इस आंदोलन को ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन सहित दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के कम से कम 68 परिवहन और श्रमिक संगठनों का समर्थन मिला है। यूनियनों ने घोषणा की है कि हड़ताल के दौरान ट्रक, निजी बसें, टैक्सी और मैक्सी कैब सड़कों पर नहीं चलेंगी। हालांकि, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले वाहनों को जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए छूट दी गई है।
ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने दिल्ली सरकार और CAQM की नीतियों को “अन्यायपूर्ण और अनुचित” बताते हुए आरोप लगाया कि वाणिज्यिक वाहन संचालकों पर लगातार बढ़ता आर्थिक बोझ उनकी आजीविका के लिए खतरा बनता जा रहा है।
यूनियनों ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें दिल्ली आने वाले वाणिज्यिक वाहनों पर ECC बढ़ोतरी को पूरी तरह वापस लेना और 1 नवंबर 2026 से गैर-दिल्ली पंजीकृत BS-IV वाणिज्यिक मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर प्रस्तावित प्रतिबंध को वापस लेना शामिल है।
उन्होंने यह भी मांग की कि ECC केवल उन ट्रांजिट वाहनों पर लगाया जाए जो दिल्ली को कॉरिडोर के रूप में उपयोग करते हैं, जैसा कि मूल रूप से सुप्रीम कोर्ट के निर्देश में कहा गया था। इसके अलावा, आवश्यक वस्तुएं ढोने वाले BS-VI वाहनों और खाली वाहनों को ECC से छूट देने की मांग भी की गई है।
पिछले महीने दिल्ली सरकार ने ECC दरों में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की थी। हल्के वाणिज्यिक वाहनों और दो-एक्सल ट्रकों पर शुल्क 1,400 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया गया, जबकि तीन-एक्सल और भारी ट्रकों के लिए शुल्क 2,600 रुपये से बढ़ाकर 4,000 रुपये कर दिया गया। सरकार ने आगे हर साल 5 प्रतिशत अतिरिक्त वृद्धि का भी प्रस्ताव रखा है।
AIMTC का दावा है कि दिसंबर 2025 तक सरकार ने ECC के रूप में 1,753.2 करोड़ रुपये एकत्र किए, लेकिन इसमें से केवल 781.4 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए, जबकि 55 प्रतिशत से अधिक राशि बिना उपयोग के पड़ी हुई है।