कंसल्टेंसी फर्म ईवाई इंडिया ने कहा है कि आगामी बजट 2026-27 में कृषि क्षेत्र के लिए वित्तीय सशक्तीकरण, खाद्य पदार्थों में आत्मनिर्भर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की उम्मीद है। इसके विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को किसानों के लिए ऋण तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने, उत्पादन में विविधता लाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए व्यापक उपाय करने चाहिए।
EY के अनुसार, भारत की खाद्य सुरक्षा नीति ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (2013), PM गरीब कल्याण अन्न योजना, PM पोषण योजना और अंत्योदय अन्न योजना जैसे कार्यक्रमों के चलते मजबूती हासिल की है। लेकिन जलवायु के जोखिम, खाद्य तेलों और दालों की आयात पर निर्भरता तथा बच्चों में कुपोषण जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए कृषि क्षेत्र को संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तिलहन और दालों में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देनी चाहिए। राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स - ऑयलसीड्स और आत्मनिर्भरता इन पल्सेज मिशन जैसे कार्यक्रमों को बजट के जरिए और मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि घरेलू उत्पादन बढ़े और आयात पर निर्भरता कम हो। भारत खाद्य तेल की लगभग 60% आवश्यकता आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए घरेलू क्षमता को बढ़ाना आवश्यक है।
कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना भी जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार, आटा और चावल की जगह पोषण मूल्य वाले फसलों जैसे मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन, प्रसंस्करण इकाइयों और मार्केटिंग नेटवर्क की स्थापना की आवश्यकता है, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फसल कटाई के बाद प्रबंधन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए कोल्ड स्टोरेज, आधुनिक गोदाम और डिजिटल आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन जैसे बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ावा देना चाहिए। फल और सब्जियों में बड़े स्तर पर बर्बादी होती है और पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम (PDS) में भी कई चुनौतियां हैं, जिनका समाधान आवश्यक है।
जलवायु के अनुसार कृषि और कृषि-तकनीक को बढ़ावा देना भी रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं में शामिल है। माइक्रो सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य कार्यक्रम, सूखा सहने वाले बीज और डिजिटल कृषि उपायों को बढ़ावा देना किसानों की उत्पादकता और लचीलेपन को बढ़ाने में मदद कर सकता है।
EY India का मानना है कि बजट 2026-27 में पारंपरिक खाद्य वितरण मॉडल से आगे बढ़कर ऐसे समग्र सुधारों और निवेश पर ध्यान देना चाहिए जो उपलब्धता, पहुंच, सस्ती उपलब्धता और पोषण जैसे स्तम्भों पर आधारित हों। इससे भारत न केवल खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि कृषि क्षेत्र को एक उन्नत, लचीला और समावेशी प्रणाली में बदल सकता है।