भारत के नए टेंडर में यूरिया के दाम 390 डॉलर प्रति टन तक गिरे, ईरान युद्ध से पहले के भाव से भी नीचे

भारत के नए यूरिया आयात टेंडर में सबसे कम बोली 390.25 डॉलर प्रति टन रही, जो ईरान-अमेरिका युद्ध से पहले के वैश्विक बाजार भाव से भी कम है। RCF ने 17 लाख टन यूरिया आयात के लिए टेंडर जारी किया था। कीमतों में गिरावट से सरकार के उर्वरक सब्सिडी बोझ को राहत मिलने की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय उर्वरक बाजार में यूरिया की कीमतें ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने से पहले की कीमतों से भी नीचे आ गई हैं। भारत के यूरिया आयात के नए टेंडर में सबसे कम बोली 390.25 डॉलर प्रति टन की है, जबकि युद्ध से पहले ग्लोबल मार्केट में दाम 400 डॉलर प्रति टन से ऊपर थे। 

यह टेंडर सरकारी कंपनी राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (RCF) ने 17 लाख टन यूरिया आयात के लिए निकाला था। इसमें 7 लाख टन यूरिया पूर्वी तट और 10 लाख टन पश्चिमी तट के लिए है। इसकी आपूर्ति 24 सितंबर तक की जानी है।

उद्योग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एमेरोपा कंपनी ने सबसे कम कीमत पर बोली लगाई है। पूर्वी तट पर 1.65 लाख टन सप्लाई के लिए इसने 390.25 डॉलर प्रति टन (कॉस्ट एवं फ्रेट-CFR) का भाव रखा है। पश्चिमी तट पर 2.26 लाख टन सप्लाई के लिए इसका भाव 393.65 डॉलर प्रति टन का है।

एमेरोपा के अलावा एग्रो फर्टिलाइजर इंटरनेशनल, एग्रीफील्ड्स, कॉन्टिनेंटल, इंडएग्रो, कोच फर्टिलाइजर, मिडगल्फ, सैफ्टको और सन इंटरनेशनल ने भी पूर्वी तट के लिए 400 डॉलर प्रति टन से कम की बोली लगाई है।

मात्रा के लिहाज से सबसे बड़ी बोली आदित्य बिड़ला ग्रुप की है। उसने पूर्वी तट पर 404.30 डॉलर के भाव पर तीन लाख टन और पश्चिमी तट पर 411.50 डॉलर के भाव पर चार लाख टन यूरिपा सप्लाई का प्रस्ताव रखा है। दूसरे स्थान पर मिडगल्फ है। उसने 393.10 डॉलर प्रति टन के रेट पर पूर्वी तट पर 2.5 लाख टन और 396.45 डॉलर के रेट पर पश्चिमी तट पर 2.5 लाख टन यूरिया सप्लाई की बोली लगाई है।

सबसे अधिक भाव चेजमैक्स कंपनी का है, जिसने सिर्फ पश्चिमी तट पर 431 डॉलर प्रति टन के भाव पर 50,000 टन सप्लाई का प्रस्ताव रखा है। आरसीएफ को कुल 30 सप्लायरों की तरफ से प्रस्ताव मिले हैं। 

इससे पहले जून में जारी टेंडर में कीमतें 444-605 डॉलर प्रति टन के दायरे में थीं। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने अपने पहले टेंडर में यूरिया 959 डॉलर प्रति टन की कीमत पर खरीदा था। 

यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में यह गिरावट उर्वरक सब्सिडी के मोर्चे पर सरकार को राहत दे सकती है। युद्ध के बाद आशंका जताई जा रही थी कि इस वर्ष उर्वरक सब्सिडी 1.77 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान की तुलना में तीन लाख करोड़ रुपये को पार कर सकती है। लेकिन ऊंचे भाव पर मांग में गिरावट आई तो दाम भी नीचे आने लगे। ऐसे में अनुमान है कि उर्वरक सब्सिडी तीन लाख करोड़ रुपये से बहुत कम रह सकती है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक है।