दो दिन की बातचीत के बाद लौटे अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि, द्विपक्षीय समझौते पर कोई ठोस प्रगति नहीं

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर की नई दिल्ली यात्रा के बावजूद भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी शुल्क व्यवस्था में बदलाव के बाद भारत इस प्रस्तावित समझौते की उपयोगिता का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है, हालांकि दोनों देशों ने वार्ता जारी रहने की बात कही है।

प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) एक नए गतिरोध का सामना करता दिखाई दे रहा है। 23-24 जून को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीयर की नई दिल्ली यात्रा के बावजूद किसी महत्वपूर्ण सफलता का रास्ता नहीं निकल पाया। दोनों पक्षों ने वार्ता में प्रगति का दावा किया है, लेकिन किसी ठोस परिणाम के अभाव ने इस समझौते के भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर तब, जब अमेरिकी शुल्क व्यवस्था में हुए बदलावों ने वर्ष की शुरुआत में बने मूल समझौते के आधार को प्रभावित कर दिया है।

जैमीसन ग्रीयर की 23-24 जून की यात्रा से कोई ठोस परिणाम न निकलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सरकार प्रस्तावित भारत-अमेरिका बीटीए की उपयोगिता और शर्तों पर नए सिरे से विचार कर रही है। 30 मई को अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा था कि यह समझौता “99 प्रतिशत तैयार” है। इसके बाद उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं। लेकिन बीटीए वार्ता अब भी अटकी हुई है क्योंकि 7 फरवरी 2026 के भारत-अमेरिका संयुक्त वक्तव्य में जिस मूल समझौते की रूपरेखा तय की गई थी, उसका आधार कमजोर पड़ गया है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “दोनों पक्षों ने हाल के महीनों में वार्ता टीमों द्वारा की गई महत्वपूर्ण प्रगति का उल्लेख किया और तकनीकी एवं मंत्रिस्तरीय बैठकों से मिली गति का स्वागत किया। चर्चाएं एक व्यापक बीटीए की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने के मार्गों पर केंद्रित रही। दोनों पक्षों ने एक ऐसे समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई जो संतुलित, व्यावसायिक रूप से सार्थक हो और दोनों देशों के व्यवसायों, किसानों, श्रमिकों और उपभोक्ताओं के लिए ठोस लाभ प्रदान करे।”

मंत्रालय ने आगे कहा, “बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य के बीच भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी के बढ़ते महत्व को स्‍वीकार करते हुए, दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार करने, नवाचार को बढ़ावा देने और लचीली, भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करने के अपने साझा लक्ष्य को दोहराया।”

बयान में कहा गया, “दोनों पक्षों ने विश्वास व्यक्त किया कि जारी वार्ता से आर्थिक संबंध और गहरे होंगे तथा भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी।”

7 फरवरी 2026 को बनी रूपरेखा के तहत अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगने वाले पारस्परिक शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया था। इसके बदले भारत से कृषि, ऊर्जा, रक्षा, विमानन, डिजिटल सेवाओं और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में व्यापक रियायतें देने की अपेक्षा की गई थी।

लेकिन 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने पारस्परिक शुल्क व्यवस्था को अवैध ठहरा दिया। इससे अमेरिका की ओर से प्रस्तावित प्रमुख रियायत ही समाप्त हो गई। ऐसे में अब अमेरिका भारत से उन लाभों के आधार पर बातचीत करने को कह रहा है जिन्हें वह कानूनी रूप से लागू ही नहीं कर सकता।

थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अजय श्रीवास्तव ने कहा, “भारत के दृष्टिकोण से प्रस्तावित बीटीए अब एक संतुलित व्यापार समझौते की बजाय एकतरफा बाजार पहुंच समझौते जैसा दिखाई देने लगा है। नई दिल्ली को स्थायी प्रतिबद्धताएं करनी होंगी, जबकि बदले में उसे बहुत कम निश्चितता मिलेगी। यदि समझौता हो भी जाता है, तब भी यह भविष्य में अमेरिकी व्यापारिक कार्रवाइयों से सुरक्षा की गारंटी नहीं देगा, क्योंकि अमेरिका पहले भी उन देशों के खिलाफ सेक्शन 301 जांच और व्यापारिक प्रतिबंध लागू करता रहा है जिनके साथ उसके पहले से व्यापार समझौते मौजूद हैं।”

माना जा रहा है कि बीटीए अब पारस्परिक आर्थिक लाभ के साधन की बजाय अमेरिकी निर्यात और रणनीतिक हितों के लिए विशेष बाजार पहुंच सुनिश्चित करने के उपकरण के रूप में दिखने लगा है। ऐसी परिस्थितियों में भारत के लिए जल्दबाजी में समझौता करने के बजाय वार्ता को धीमा करना या आवश्यक होने पर उसे टालना अधिक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है, क्योंकि संभावित दायित्वों की लागत अमेरिका द्वारा दी जाने वाली किसी भी अस्थायी शुल्क राहत से कहीं अधिक हो सकती है।