ग्रामीण रोजगार में बदलाव, कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी घटकर 52.9% पर आई, गैर-कृषि क्षेत्र की बढ़ी
अप्रैल-जून 2026 में ग्रामीण रोजगार के स्वरूप में बदलाव दिखा। सेकंडरी क्षेत्र में रोजगार की हिस्सेदारी बढ़कर 24.4 प्रतिशत हुई, जबकि कृषि में यह घटकर 52.9 प्रतिशत रह गई। नियमित वेतनभोगी रोजगार और टर्शियरी क्षेत्र भी बढ़े। ग्रामीण LFPR घटकर 56.9 प्रतिशत और बेरोजगारी दर बढ़कर 4.8 प्रतिशत हुई।
ग्रामीण भारत में रोजगार के स्वरूप में बदलाव के संकेत मिले हैं। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कृषि पर निर्भरता कम हुई, जबकि सेकंडरी क्षेत्र में रोजगार की हिस्सेदारी बढ़ी। इसके साथ ही नियमित वेतनभोगी रोजगार और टर्शियरी क्षेत्र में भी वृद्धि दर्ज की गई। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की नवीनतम आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) रिपोर्ट में सामने आई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में खनन और उत्खनन समेत सेकंडरी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की हिस्सेदारी अप्रैल-जून 2026 में बढ़कर 24.4 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी-मार्च 2026 में 22.6 प्रतिशत थी। इसी अवधि में कृषि क्षेत्र में रोजगार की हिस्सेदारी 55.8 प्रतिशत से घटकर 52.9 प्रतिशत रह गई। वहीं, टर्शियरी क्षेत्र में रोजगार की हिस्सेदारी 21.7 प्रतिशत से बढ़कर 22.7 प्रतिशत हो गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि रोजगार बढ़ने के साथ नियमित वेतनभोगी रोजगार में भी वृद्धि हुई। नियमित वेतन या वेतनभोगी रोजगार में लगे ग्रामीण श्रमिकों की हिस्सेदारी जनवरी-मार्च की 15.5 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल-जून में 16.1 प्रतिशत हो गई। शहरी क्षेत्रों में भी यह हिस्सेदारी 48.9 प्रतिशत से बढ़कर 49.3 प्रतिशत रही।
हालांकि, ग्रामीण श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) में तिमाही आधार पर कमी आई। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए ग्रामीण LFPR अप्रैल-जून 2026 में 56.9 प्रतिशत रही, जो जनवरी-मार्च में 58.2 प्रतिशत थी। हालांकि, एक साल पहले अप्रैल-जून 2025 में यह 57.1 प्रतिशत थी, इसलिए सालाना आधार पर इसमें मामूली बदलाव हुआ। देश की कुल LFPR भी पिछली तिमाही के 55.5 प्रतिशत से घटकर 54.6 प्रतिशत रह गई।
ग्रामीण बेरोजगारी दर भी तिमाही आधार पर बढ़ी। अप्रैल-जून 2026 में यह 4.8 प्रतिशत रही, जबकि जनवरी-मार्च में 4.3 प्रतिशत थी। हालांकि, एक साल पहले की समान तिमाही के मुकाबले ग्रामीण बेरोजगारी दर 4.8 प्रतिशत पर स्थिर रही। ग्रामीण पुरुषों की बेरोजगारी दर एक साल पहले के 5 प्रतिशत से घटकर 4.8 प्रतिशत हो गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों का श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (WPR) अप्रैल-जून में 54.2 प्रतिशत रहा, जो पिछली तिमाही के 55.7 प्रतिशत से कम है। ग्रामीण पुरुष WPR 75.2 प्रतिशत से घटकर 74.1 प्रतिशत, जबकि महिलाओं का WPR 37.6 प्रतिशत से घटकर 35.4 प्रतिशत रहा।
PLFS के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में देश में औसतन 56.6 करोड़ लोग रोजगार में थे। इनमें 40.2 करोड़ पुरुष और 16.4 करोड़ महिलाएं थीं। सर्वेक्षण में कुल 5,59,673 लोगों से जानकारी जुटाई गई, जिनमें 3,18,792 ग्रामीण क्षेत्रों से थे।
जनवरी 2025 से PLFS की पद्धति में बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए अधिक नियमित आधार पर श्रम बाजार से जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही रिपोर्ट इस संशोधित व्यवस्था के तहत जारी की गई पांचवीं तिमाही रिपोर्ट है।

Join the RuralVoice whatsapp group


















