संयुक्त किसान मोर्चा का देशव्यापी प्रदर्शन, MSP की कानूनी गारंटी और कर्जमाफी की मांग

संयुक्त किसान मोर्चा ने 10 अगस्त को देशव्यापी जेल भरो आंदोलन के दौरान MSP की कानूनी गारंटी, व्यापक किसान कर्जमाफी, 200 दिनों के ग्रामीण रोजगार, भूमि अधिकारों की रक्षा और उर्वरक कीमतों पर नियंत्रण समेत कई मांगें उठाईं। राजस्थान में संगठन ने राष्ट्रपति को संबोधित मांगपत्र जिला कलेक्टर को सौंपा।

संयुक्त किसान मोर्चा का देशव्यापी प्रदर्शन, MSP की कानूनी गारंटी और कर्जमाफी की मांग

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भारत छोड़ो दिवस की 84वीं वर्षगांठ पर सोमवार को देशव्यापी ‘जेल भरो’ और अन्य विरोध कार्यक्रम आयोजित किए। मोर्चा ने किसानों, कृषि श्रमिकों और ग्रामीण मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। राजस्थान में SKM ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित मांगपत्र जिला कलेक्टर के माध्यम से सौंपा।

मोर्चा की राजस्थान इकाई के अनुसार देशभर के गांवों, पंचायतों, ब्लॉकों, जिलों, कस्बों और शहरों में आयोजित विरोध कार्यक्रमों में किसानों, कृषि श्रमिकों, औद्योगिक श्रमिकों, ग्रामीण मजदूरों, आदिवासियों, कर्मचारियों, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी रही। संगठन ने 9 दिसंबर 2021 को दिल्ली की सीमाओं पर हुए किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार द्वारा दिए गए लिखित आश्वासनों को लागू नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई।

एसकेएम ने सभी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के फार्मूले पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और सुनिश्चित सरकारी खरीद के लिए कानून बनाने की मांग की है। साथ ही व्यापक ऋणमाफी तथा किसान आत्महत्या के प्रत्येक मामले में परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा और पूर्ण पुनर्वास की मांग रखी गई है।

किसान संगठन ने भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते का विरोध करते हुए मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों की समीक्षा और कृषि उपज के मुक्त आयात पर रोक की मांग की है। उसने कृषि विपणन के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय नीति ढांचे को भी तत्काल रोकने की मांग की है।

ग्रामीण रोजगार को लेकर SKM ने मनरेगा को मजबूत करते हुए हर साल 200 दिनों के रोजगार और न्यूनतम 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की गारंटी की मांग की। श्रमिकों के लिए चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने और 42,000 रुपये मासिक वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।

इसके अलावा विद्युत निजीकरण विधेयक, 2025, बीज विधेयक, 2025 और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को वापस लेने की मांग की गई है। संगठन ने भूमि अधिग्रहण और कॉरपोरेट समर्थित भूमि पूलिंग का विरोध करते हुए LARR अधिनियम, वन अधिकार अधिनियम और PESA के तहत अधिकारों की रक्षा की मांग की।

SKM ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) को मजबूत करने, साइलो के निजीकरण पर रोक, उर्वरकों की कमी और कालाबाजारी खत्म करने तथा उर्वरक, ईंधन, पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर नियंत्रण की मांग भी उठाई। इसके साथ सार्वजनिक क्षेत्र की फसल और पशुधन बीमा योजना, हर खेत तक सिंचाई, 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों के लिए 10,000 रुपये मासिक पेंशन और बाढ़-सूखा राहत की मांग की गई।

संगठन ने कृषि अनुसंधान एवं विकास तथा शिक्षा पर सार्वजनिक निवेश बढ़ाने और सहकारी समितियों व किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को कॉरपोरेट नियंत्रण से बचाने की मांग भी की। SKM ने राष्ट्रपति से इन मांगों पर केंद्र सरकार को तत्काल कार्रवाई के लिए निर्देशित करने का आग्रह किया।

Subscribe Rural Voice Newsletter