राजस्थान से शुरू हुई मानसून की वापसी, लेकिन देश के 327 जिलों में सामान्य से बहुत कम बारिश; धान का रकबा 3.7% घटा
राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू हो गई है, लेकिन देश के 327 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। इनमें सात जिलों में कमी 60 प्रतिशत से अधिक है। कम बारिश का असर खरीफ फसलों पर भी दिख रहा है। धान का रकबा 3.73 प्रतिशत, मक्का 2.23 प्रतिशत और सोयाबीन 0.72 प्रतिशत घटा है।
शनिवार 19 सितंबर से इस वर्ष मानसून के बारिश की वापसी शुरू हो गई है। मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार को पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों से दक्षिण पश्चिम मानसून का प्रभाव खत्म हो गया। अगले तीन से चार दिनों के भीतर राजस्थान के कुछ और इलाकों तथा पंजाब, सौराष्ट्र और कच्छ के कुछ क्षेत्रों से भी मानसून की वापसी होने लगेगी।
वैसे तो सामान्य तौर पर राजस्थान से दक्षिण पश्चिम मानसून की वापसी 17 सितंबर से होती है, लेकिन इस वर्ष इसमें दो दिनों की देरी हुई है। हालांकि इसके बावजूद राजस्थान के कम से कम 17 जिले ऐसे हैं जहां मानसून की बारिश में इस वर्ष 20% से अधिक गिरावट रिकॉर्ड की गई है।
327 जिलों में सामान्य से कम हुई बारिश
देश के 792 जिलों में से 327 जिले बारिश की कमी का सामना कर रहे हैं। सात जिलों में बारिश की कमी 60 प्रतिशत से ज्यादा है। लेकिन सबसे अधिक चिंता उन 320 जिलों को लेकर है जहां 20% से लेकर 59% तक कम बारिश हुई है। कम बारिश वाले सबसे अधिक जिले पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और बिहार में हैं। बिहार से लगे पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी बारिश की कमी बनी हुई है। हालांकि देश के 389 जिलों में बारिश सामान्य और 86 जिलों में सामान्य से अधिक हुई है।
देश में 7 जिले ऐसे हैं जहां मानसून की बारिश बहुत कम हुई है। यह कमी 60% से लेकर करीब 79% तक है। इनमें अरुणाचल प्रदेश के दो जिले, गुजरात के द्वारका और जामनगर जिले, राजस्थान के जालौर और सांचौर जिले तथा तमिलनाडु का करूर जिला शामिल हैं।
20% से लेकर 59% तक कम बारिश वाले इलाकों में आंध्र प्रदेश के 27, कर्नाटक के 31, केरल के तीन, महाराष्ट्र के 20, तमिलनाडु के 33, तेलंगाना के 20, हरियाणा के 9, पंजाब के 19, राजस्थान के 15, गुजरात के 23, मध्य प्रदेश के 6, उत्तर प्रदेश के 18, बिहार के 32, छत्तीसगढ़ के दो, झारखंड के छह, अरुणाचल प्रदेश के 14, असम के 12 और पश्चिम बंगाल के चार जिले शामिल हैं।
धान का रकबा 3.73 प्रतिशत घटा
बारिश में इस कमी का खरीफ फसलों पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है। वैसे तो इस वर्ष खरीफ का रकबा पिछले साल के 1118.95 लाख हेक्टेयर की तुलना में 1.35 प्रतिशत कम, 1103.90 लाख हेक्टेयर है, लेकिन खरीफ की सबसे प्रमुख फसल धान के रकबे में 3.73% की गिरावट है। कृषि मंत्रालय के उपज पोर्टल पर उपलब्ध 18 सितंबर के अपडेट के अनुसार, पिछले वर्ष के 445.92 लाख हेक्टेयर की तुलना में इस वर्ष 429.28 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हो रही है।
दालों में तूर या अरहर का रकबा पिछले साल से 1.95 प्रतिशत और उड़द का 11.97% अधिक है लेकिन मूंग के रकबे में 3.94% की गिरावट देखने को मिली है। मोटे अनाजों में सबसे प्रमुख फसल मक्का के रकबे में 2.23% की गिरावट है, हालांकि दूसरी प्रमुख फसल बाजरा का रकबा 3.29% अधिक है। ज्वार के रकबे में भी वृद्धि हुई है लेकिन रागी में गिरावट है।
तिलहन में खरीफ की सबसे प्रमुख फसल सोयाबीन का रकबा भी पिछले साल की तुलना में 0.72% कम है। दूसरी प्रमुख फसल मूंगफली में भी 0.26 प्रतिशत की गिरावट है। हालांकि अन्य तिलहनी फसलों के रकबे में वृद्धि के कारण तिलहन का कुल रकबा पिछले साल के 194.75 लाख हेक्टेयर के लगभग बराबर है।
गन्ने का रकबा भी इस बार कम है। यह पिछले वर्ष के 58.87 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 58.47 लाख हेक्टेयर है। चीनी वर्ष 2025-26 में देश में अनुमान से कम चीनी उत्पादन को देखते हुए रकबे में गिरावट चिंता की बात है। जूट एवं मेस्ता का रकबा बीते वर्ष की तुलना में 1.75 प्रतिशत अधिक है लेकिन कपास में 0.90% की गिरावट है और इसका कुल क्षेत्र 110.60 लाख हेक्टेयर है।

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