MSP से नीचे नहीं बिकने देंगे दाल-तिलहन, रबी के लिए 17.77 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य: शिवराज सिंह चौहान

राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन (रबी अभियान 2026) में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को पर्याप्त उर्वरक, बीज और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। सरकार ने रबी सीजन के लिए 17.77 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। 22 अक्टूबर से देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ भी शुरू किया जाएगा।

अल-नीनो के खतरे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उर्वरकों की ऊंची कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने देश के किसानों को रबी बुवाई के लिए पर्याप्त खाद, प्रमाणित बीज और आवश्यक वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता का भरोसा दिलाया है। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन (रबी अभियान 2026) के दौरान मंगलवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार किसानों के साथ हर कदम पर खड़ी है।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री इस बैठक में उपस्थित रहे और उन्होंने अपने-अपने राज्यों की प्राथमिकताओं एवं आवश्यकताओं को साझा किया। इन्हीं सुझावों के आधार पर रबी की राष्ट्रीय कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 

कंटीजेंसी प्लान की सफलता

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि कम बारिश के कारण खरीफ फसलों के बुवाई क्षेत्र में भारी गिरावट की जो आशंका जताई जा रही थी, वह केंद्र, राज्यों, आईसीएआर और किसानों के संयुक्त प्रयासों से टल गई। बुवाई क्षेत्र में मात्र 1 प्रतिशत की मामूली कमी आई है, जो लगभग सामान्य के बराबर है।

बुवाई क्षेत्र में सबसे ज्यादा कमी धान की फसल में आई है, जहां लगभग 16.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र घटा है। इसके अलावा मक्का, सोयाबीन और कपास के क्षेत्र में भी कमी दर्ज की गई है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर (अरहर) जैसी दलहनी, तिलहनी और मोटे अनाजों की फसलों के रकबे में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी बारिश, बाढ़ या सूखे के चलते लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित होने की प्रारंभिक सूचना मिली है। नुकसान का विस्तृत वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है।

163 लाख टन से अधिक उर्वरक का भंडार

वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतें दोगुनी तक बढ़ने और आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं के बीच कृषि मंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि वर्ष 2026-27 के रबी सीजन के लिए सभी राज्यों की ओर से कुल 380 लाख टन उर्वरक (डीएपी, यूरिया, एनपीके आदि) की मांग प्रस्तुत की गई है, जिसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

देश में इस समय 163 लाख टन से अधिक उर्वरक का भंडार मौजूद है। पिछले साल इसी समय रबी की शुरुआत में यह स्टॉक 122 लाख टन था।

पंजाब जैसे कुछ राज्यों द्वारा व्यक्त की गई स्थानीय चिंताओं पर उन्होंने कहा कि देश में उर्वरक की कोई कमी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का वित्तीय बोझ भारतीय किसान पर नहीं पड़ने दिया जाएगा। राज्यों से निरंतर संपर्क बनाए रखते हुए समय पर पर्याप्त खाद पहुंचाई जा रही है।

22 अक्टूबर से ‘खेत बचाओ अभियान’

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि धरती की उर्वरा शक्ति को सुरक्षित रखने और किसानों की लागत घटाने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर जमीनी अभियान का खाका तैयार किया है। खरीफ सीजन के दौरान प्रमुख राज्यों के दो-दो जिलों में मिट्टी परीक्षण के आधार पर रासायनिक खादों के संतुलित उपयोग का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया।

इसके तहत किसानों को बताया गया कि उनकी जमीन और फसल के लिए कितनी खाद पर्याप्त है। इसका परिणाम यह रहा कि इन जिलों में उर्वरक की कुल खपत में 27 प्रतिशत की कमी आई और देश को 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की सीधी बचत हुई।

अब पूरे देश में 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा। अभियान के दौरान आईसीएआर के वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के विशेषज्ञ, आत्मा (ATMA) की टीमें, राज्य कृषि विभाग के अधिकारी तथा केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्री सीधे गांवों और खेतों में किसानों के बीच जाएंगे।

अभियान के तहत मिट्टी की जरूरत के हिसाब से उर्वरकों का संतुलित उपयोग, सही फसल और उन्नत किस्म का चयन तथा सभी पात्र किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाना और उनका सही उपयोग सुनिश्चित करने जैसे कार्य किए जाएंगे।

रबी उत्पादन का राष्ट्रीय लक्ष्य 177.72 मिलियन टन

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पिछले वर्ष 2025-26 के लिए 36.26 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, जिसके मुकाबले किसानों ने 37.65 करोड़ टन खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन किया।

आगामी वर्ष 2026-27 का लक्ष्य अल-नीनो की परिस्थितियों को देखते हुए कुल 37.39 करोड़ टन रखा गया है, जिसमें अकेले रबी सीजन का लक्ष्य 17.77 करोड़ टन तय किया गया है।

जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है, वहां किसानों को अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों से हटाकर दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सूखे से प्रभावित खेतों को खाली रहने से बचाने के लिए कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली फसलों के बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही, फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ाने के लिए निरंतर काम जारी है। 

MSP से नीचे नहीं जाने देंगे दाल और तिलहन के भाव

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उपज के लाभकारी मूल्य और बाजार के उतार-चढ़ाव से किसानों को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने कड़ा नीतिगत फैसला लिया है। PM-AASHA के तहत सीधी खरीद के जरिए दलहन और तिलहन की खरीद में राज्यों की ओर से होने वाली प्रशासनिक देरी को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

यदि बाजार में कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे गिरती हैं, तो केंद्र सरकार की नोडल एजेंसियां—NAFED (नेफेड) और NCCF (एनसीसीएफ)—राज्यों का इंतजार किए बिना सीधे मंडियों में उतरकर किसानों से खरीद शुरू करेंगी। इसके बाद राज्य एजेंसियां भी इस प्रक्रिया से जुड़ सकेंगी, ताकि किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े।

सूखा और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को मदद

प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे किसानों की मदद के लिए सरकार ने तत्काल कदम उठाए हैं। इसके तहत केंद्रीय टीमों का दौरा होगा। कर्नाटक और महाराष्ट्र के आग्रह पर स्थिति के भौतिक निरीक्षण के लिए 3 अक्टूबर को विशेष केंद्रीय टीमें मौके पर भेजी जा रही हैं। कृषि मंत्री स्वयं भी इन राज्यों का दौरा कर स्थिति का जायजा लेंगे।

केंद्रीय कृषि मंत्री के अनुसार, SDRF (राज्य आपदा मोचन निधि) के तहत तत्काल संकट से निपटने के लिए राज्यों के पास उपलब्ध फंड में 75 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 25 प्रतिशत राज्यों का होता है। इसके जरिए किसानों को तत्काल राहत दी जा रही है।

आपदा में क्षतिग्रस्त मकानों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अतिरिक्त मकान दिए जा रहे हैं। वहीं, NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि) के तहत केंद्रीय टीम के अंतिम सर्वे के बाद गृह मंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति द्वारा नुकसान के आधार पर राज्यों को अतिरिक्त वित्तीय राहत पैकेज स्वीकृत किया जाएगा।

प्रदूषण के लिए केवल किसान दोषी नहीं 

पर्यावरण नियमों के तहत खेतों को रेड जोन में डालने और किसानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर चिंता जताते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसान जिम्मेदार नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि समाज में यह गलत तस्वीर पेश की जाती है कि जैसे सारा प्रदूषण केवल पराली जलाने के कारण हो रहा है। जब पराली जलती है तो उसका एक सीमित योगदान हो सकता है, लेकिन इसके नाम पर केवल किसानों को दोषी ठहराना, उन्हें खलनायक बनाना या उन्हें प्रताड़ित करना कतई उचित नहीं है।

कृषि मंत्रालय किसानों के मान-सम्मान और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। समस्या का समाधान किसानों से संवाद, उन्हें सहयोग और आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराकर ही निकाला जाएगा, उन पर बंदिशें या प्रताड़ना थोपकर नहीं।