भारत की सहकारी संस्थाएं एक संरचनात्मक कर विसंगति से जूझ रही हैं। इसके सदस्यों को मिलने वाले लाभांश पर दो बार कर लगता है, जिससे उनकी वास्तविक आय घटती है। यह सहकारिता के मूल सिद्धांत के भी खिलाफ है। बजट 2026-27 ने इस समस्या का पूर्ण समाधान तो नहीं किया, लेकिन लक्षित सुधारों के जरिए बोझ को कम किया है।
मुद्दाः सहकारी संस्थाएं अपनी शुद्ध आय से चुकता शेयर पूंजी पर अधिकतम 20% तक लाभांश दे सकती हैं। वर्ष 2020 में डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स समाप्त होने के बाद लाभांश पर दोहरा कर लग रहा है। पहले सहकारी संस्था के स्तर पर और फिर सदस्य के स्तर पर। इसके कारण एक ही आय पर प्रभावी कर दर लगभग 48.51% तक पहुंच जाती है। यह सहकारी सिद्धांतों के विपरीत है, क्योंकि सहकारी संस्थाओं में लाभांश को निवेश पर रिटर्न नहीं, बल्कि पैट्रनेज रिफंड (सदस्यों को लाभ का वितरण) माना जाता है।
आदर्श स्थितिः आयकर अधिनियम की धारा 80पी में संशोधन कर सदस्यों को दिए जाने वाले लाभांश को कर योग्य आय की गणना से पहले, सकल आय से घटाने योग्य व्यय के रूप में मान्यता दी जाए। लाभांश को पैट्रनेज रिफंड माना जाए; सहकारी संस्थाएं इसे कर-पूर्व कटौती के रूप में घटाएं, जबकि सदस्य इसे अपनी कर योग्य आय में शामिल करें और धारा 194 के तहत टीडीएस व्यवस्था यथावत रहे। इससे दोहरा कराधान समाप्त होगा और राजस्व पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
बजट 2026-27: सहकारी संस्थाओं के लिए प्रमुख कर सुधार
बजट में लक्षित सुधार पेश किए गए हैं, जो मांग की मूल भावना के अनुरूप हैं। हालांकि सभी सदस्यों के लाभांश के लिए धारा 80पी में पूर्ण संशोधन नहीं किया गया। इसके बजाय, बजट का फोकस सहकारी-से-सहकारी लाभांश (इंटर-कोऑपरेटिव डिविडेंड) और प्राथमिक समितियों को मिलने वाली कर कटौती पर रहा है। इससे सदस्यों तक बेहतर वैल्यू फ्लो सुनिश्चित होता है और बार-बार लगने वाले करों में कमी आती है।
प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए आयकर कटौती का विस्तार
मौजूदा प्रावधानों (जैसे धारा 80पी) के तहत कर कटौती लाभ को उन प्राथमिक सहकारी संस्थाओं तक बढ़ाया गया है जो सदस्यों द्वारा उत्पादित पशु आहार और कपास बीज की आपूर्ति करती हैं। पहले यह लाभ केवल दूध, तिलहन तथा फल-सब्जियों तक सीमित था।
प्रभावः कर बोझ में कमी। अधिक कार्यशील पूंजी, सदस्यों को बेहतर मूल्य, भुगतान में तेजी और भंडारण/गुणवत्ता/लॉजिस्टिक्स में निवेश। इससे बहुउद्देश्यीय पैक्स को ग्रामीण उद्यम केंद्रों के रूप में मजबूती मिलती है और डेयरी व कपास क्षेत्रों में इनपुट की लागत पर अंकुश लगता है।
अंतर-सहकारी लाभांश आय पर कटौती
सदस्यों को वितरित की गई सीमा तक अंतर-सहकारी लाभांश आय को (नई कर व्यवस्था के तहत) कटौती के रूप में अनुमति दी गई है।
निहितार्थः सहकारी मूल्य श्रृंखला में दोहरे कराधान को समाप्त करता है; वर्टिकल इंटीग्रेशन को प्रोत्साहित करता है (पैक्स-फेडरेशन-राष्ट्रीय संस्थाएं); पूंजी के बेहतर प्रवाह में मदद करता है; ऊपरी स्तरों पर अधिशेष जमा करने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करता है। कर कानून में सदस्य की जवाबदेही को समाहित करता है।
अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी फेडरेशनों के लिए 3 वर्षीय छूट
कंपनियों में किए गए निवेश (31.01.2026 तक) से प्राप्त लाभांश आय पर छूट, बशर्ते कि यह लाभांश सदस्य सहकारी संस्थाओं को वितरित किया जाए।
विचारः यह दृष्टिकोण राष्ट्रीय स्तर के ऐसे चैंपियन तैयार करता है जिनके पास पर्याप्त स्केल, निवेश और बाजार साझेदारियां हों। साथ ही जमीनी स्तर पर स्वामित्व सुनिश्चित करता है और अभिजात वर्ग द्वारा कब्जे को रोकता है। इसके तहत पारदर्शी, परफॉरमेंस आधारित मानदंड सुझाए गए हैं - जैसे सुशासन, ऑडिट, डिजिटल अनुपालन और भुगतान/लाभ वितरण अनुपात।
समग्र आकलन
बजट 2026-27 सहकारी संस्थाओं को प्रतिस्पर्धी, सदस्य-केंद्रित विकास इंजनों के रूप में सशक्त बनाने की दिशा में एक निर्णायक संरचनात्मक बदलाव करता है। यह राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2026 के अनुरूप है। यह प्रतीकात्मक समर्थन से आगे बढ़कर ऐसे प्रणालीगत प्रोत्साहन देता है जो सदस्यों तक मूल्य वितरण को पुरस्कृत करते हैं, आपूर्ति श्रृंखलाओं में कर विवाद कम करते हैं और ग्रामीण उद्यमिता व उत्पादकता को बढ़ावा देते हैं। हालांकि आयकर अधिनियम की धारा 80पी के तहत सभी सदस्यों के लाभांश की व्यापक कटौती का मूल उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है, फिर भी अंतर-सहकारी और प्राथमिक स्तर के उपाय दोहरे कराधान से उल्लेखनीय राहत देते हैं और सीधे तौर पर किसान आय, एग्रीगेशन तथा सहकारिता की गहराई को समर्थन प्रदान करते हैं। ये सुधार किसानों की आय बढ़ाने, एकीकृत जलाशय/मत्स्य/पशुपालन विकास, बैंकों के आधुनिकीकरण तथा विरासत वाले उद्योगों (जैसे महात्मा गांधी स्वराज पहल के तहत हथकरघा) जैसे एजेंडा के केंद्र में कोऑपरेटिव को स्थापित करते हैं।
(लेखक नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं)