यूपी राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 8 उम्मीदवार उतारे, हरदीप पुरी का नाम नहीं

भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को सूची में जगह नहीं मिली है। 10 सीटों के चुनाव को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए आठ उम्मीदवारों की सूची जारी की है। इस सूची में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को जगह नहीं मिली है। उनका नाम शामिल नहीं किए जाने से केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित बदलाव को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

भाजपा ने सोमवार को उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की। पार्टी ने आठ उम्मीदवारों की सूची में दो महिलाओं को शामिल किया है। इनमें पूर्व लोकसभा सांसद प्रियंका सिंह रावत और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी तथा उत्तर प्रदेश भाजपा की प्रमुख नेताओं में शामिल श्रुति गंगवार हैं।

अन्य उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय और राम प्रताप सिंह चौहान शामिल हैं।

इस चुनाव में उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर नए सदस्य चुने जाएंगे। फिलहाल इनमें से आठ सीटें भाजपा के पास हैं, जबकि एक-एक सीट समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के पास है।

राज्यसभा चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में इस चुनाव का महत्व केवल उच्च सदन में सीटों के लिहाज से ही नहीं, बल्कि राज्य की आगामी राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में भी बढ़ गया है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा के 255 विधायक हैं। उसके एनडीए सहयोगियों में अपना दल (एस) के 13, राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के नौ, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के छह और निषाद पार्टी के पांच विधायक हैं। इस तरह एनडीए की कुल संख्या 288 तक पहुंचती है।

हालांकि, पिछले 11 महीनों में सात विधायकों के निधन के बाद 403 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल प्रभावी सदस्य संख्या 396 है। मौजूदा गणित के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 प्रथम वरीयता वाले मतों की आवश्यकता होगी।

एनडीए को पूजा पाल, निर्दलीय विधायक मनोज पांडे, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह के अलावा राजा भैया के नेतृत्व वाली जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो विधायकों का समर्थन मिलने की संभावना है। मनोज पांडे, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह को जून 2025 में 2024 के राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।

यदि ये अतिरिक्त मत एनडीए के पक्ष में आते हैं, तो उसकी प्रभावी संख्या 294 तक पहुंच सकती है। हालांकि, भाजपा के सभी आठ उम्मीदवारों को निर्वाचित कराने के लिए 296 प्रथम वरीयता वाले मतों की जरूरत होगी, यानी मौजूदा संभावित संख्या से दो मत कम।

मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर भाजपा सात और समाजवादी पार्टी दो सीटें जीतने की स्थिति में है। ऐसे में 10वीं सीट के लिए मुकाबला 16 अक्टूबर के चुनाव को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बना सकता है।

उत्तर प्रदेश का यह चुनाव राज्यसभा में व्यापक राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित करेगा। 245 सदस्यीय राज्यसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास फिलहाल 150 सदस्य हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ राज्यसभा की इन 10 सीटों के लिए होने वाला मुकाबला उच्च सदन के समीकरणों के साथ-साथ राज्य में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बदलते समीकरणों के संकेतों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।