कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार पर आंकड़े जुटाने की पद्धति में बदलाव कर ग्रामीण मजदूरी में वृद्धि के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि ग्रामीण आय में दिखाई गई तेज वृद्धि वास्तव में मजदूरों की आय में वास्तविक सुधार का परिणाम नहीं, बल्कि डेटा में हेरफेर का नतीजा है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि सरकार ने ग्रामीण मजदूरी की गणना के लिए श्रम ब्यूरो द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सैंपलिंग फ्रेमवर्क में बदलाव किया है। इस आधार पर मजदूरी वृद्धि की कृत्रिम तस्वीर पेश की गई है, जबकि वास्तविक लगातार ठहरी हुई है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि वास्तविक मजदूरी में ठहराव भारत की आर्थिक सुस्ती के प्रमुख कारणों में से एक है। कमजोर आय वृद्धि ने उपभोक्ता मांग को सीमित किया है और निजी निवेश को हतोत्साहित किया है।
उन्होंने कहा, “हम लगातार यह कहते रहे हैं कि भारत की आर्थिक मंदी का मूल कारण वास्तविक मजदूरी में ठहराव है, जिसने उपभोग वृद्धि को कमजोर किया है और निजी निवेश को हतोत्साहित किया है। इस मूल समस्या को दूर करने में असफल रहने के बाद मोदी सरकार अब ग्रामीण मजदूरी में कृत्रिम उछाल दिखाने के लिए आंकड़ों में हेरफेर कर रही है।”
रमेश के अनुसार, आधिकारिक आंकड़ों में जून 2025 से मार्च 2026 के बीच वार्षिक ग्रामीण मजदूरी वृद्धि लगभग 6 प्रतिशत से बढ़कर 17-18 प्रतिशत तक पहुंचती दिखाई गई है। वहीं, औसत दैनिक मजदूरी में एक ही महीने में 12.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह उछाल वास्तविक मजदूरी वृद्धि के बजाय कार्यप्रणाली में बदलाव का परिणाम है। उन्होंने कहा कि श्रम ब्यूरो ने बिना किसी सार्वजनिक घोषणा या वेबसाइट पर जानकारी दिए नया सैंपलिंग फ्रेमवर्क अपनाया, जिसमें पूर्वोत्तर के कई राज्यों, दिल्ली और गोवा के श्रमिकों को नमूने में शामिल कर लिया गया।
रमेश का तर्क है कि ये नए क्षेत्र भारत के कुल कार्यबल का केवल लगभग 1.2 प्रतिशत हिस्सा हैं, लेकिन संशोधित नमूने में उनकी हिस्सेदारी लगभग 11 प्रतिशत है। उन्होंने कहा, “सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन क्षेत्रों की औसत मजदूरी पुराने नमूने की तुलना में 50-55 प्रतिशत अधिक है, क्योंकि यहां कृषि रोजगार कम है और अधिक कुशल कार्यबल मौजूद है।”
रमेश ने दावा किया कि उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि वास्तविक ग्रामीण मजदूरी वृद्धि दर लगभग 4.3 प्रतिशत वार्षिक होती, जो पिछले चार वर्षों में सबसे कमजोर वृद्धि होती।
कांग्रेस नेता ने रोजगार संबंधी आंकड़ों में पहले किए गए बदलावों से भी इसकी तुलना की। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से रोजगार की परिभाषा में बदलाव कर वित्त वर्ष 2018 के बाद रोजगार सृजन में बड़ी वृद्धि का दावा किया था। सरकार पर निशाना साधते हुए रमेश ने कहा, “यह आंकड़ों में हेरफेर का एंटायर पॉलिटिकल साइंस है।”