आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी ज़िले में दूध में मिलावट के एक गंभीर मामले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है, जबकि छह अन्य लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं और उनका इलाज जारी है। इस घटना ने खाद्य सुरक्षा और दूध की आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, प्रयोगशाला जांच में पुष्टि हुई है कि पीड़ितों ने एथिलीन ग्लाइकोल से मिलावटी दूध का सेवन किया था। एथिलीन ग्लाइकोल एक अत्यंत खतरनाक रसायन है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि इस रसायन से मिलावटी दूध पीने के बाद पीड़ितों को एक्यूट रीनल फेलियर हुआ, जिसके कारण शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना बंद कर दिया और अंततः उनकी मौत हो गई।
यह घटना 16 फरवरी को सामने आई, जब राजामहेंद्रवरम के लालाचेरुवु गांव में एक ही सप्लाई स्रोत से दूध लेने वाले कई लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। पीड़ितों को उल्टी, पेट दर्द, चक्कर, बेहोशी और पेशाब रुकने जैसी गंभीर समस्याएं होने लगीं। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें तुरंत अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
मामला तब गंभीर रूप से सामने आया जब 22 फरवरी के आसपास काकीनाडा के सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान कुछ मरीजों की मौत होने लगी। इसके बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू की।
जांच में पता चला कि जिन लोगों ने दूध पिया था, उन्होंने स्थानीय दूध विक्रेता गणेश्वरराव से दूध खरीदा था। बताया गया है कि गणेश्वरराव दूध को दो कंटेनरों वाले फ्रीजर में स्टोर करता था और बाद में उसे कैनों में भरकर राजामहेंद्रवरम के लालाचेरुवु क्षेत्र के चौदेश्वरनगर और स्वरूपनगर इलाकों के घरों में सप्लाई करता था।
16 से 24 फरवरी के बीच इसी दूध के सेवन के बाद करीब 20 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हुए। आगे की जांच में यह भी सामने आया कि दूध स्टोर करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे फ्रीजर में लीक हो गया था। इस फ्रीजर को एक वर्कशॉप में ठीक कराया गया था और लीक को सील करने के लिए कंटेनर की दीवारों पर एक चिपकने वाला कंपाउंड लगाया गया था। आशंका जताई जा रही है कि इसी प्रक्रिया के दौरान खतरनाक रसायन दूध के संपर्क में आ गया, जिससे यह जहरीला हो गया।
डॉक्टरों का कहना है कि एथिलीन ग्लाइकोल शरीर में पहुंचने के बाद तेजी से विषाक्त प्रभाव पैदा करता है। यह मुख्य रूप से किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाता है और समय पर इलाज न मिलने पर मल्टी-ऑर्गन फेलियर का कारण बन सकता है। घटना के बाद पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग ने मामले की जांच तेज कर दी है। दूध के नमूने जब्त कर लिए गए हैं और संदिग्ध सप्लायर से पूछताछ की जा रही है। प्रशासन ने मिलावटी दूध की पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने के लिए विशेष टीमें भी गठित की हैं।
जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और कहा है कि केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही दूध और डेयरी उत्पाद खरीदें। खाद्य सुरक्षा विभाग ने क्षेत्र में दूध के नमूनों की व्यापक जांच शुरू कर दी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
इस घटना ने देश में खाद्य पदार्थों में मिलावट की समस्या को एक बार फिर उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि दूध जैसे रोज़मर्रा के खाद्य पदार्थ में खतरनाक रसायनों की मिलावट सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद गंभीर खतरा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।