केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लद्दाख और कारगिल में डेयरी क्षेत्र के महत्वाकांक्षी विस्तार की घोषणा की। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में टिकाऊ आजीविका सुनिश्चित करना है।
घोषणा के अनुसार, सरकार लेह में 50,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला एक दूध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करेगी, जिसकी अनुमानित लागत 70 करोड़ रुपये होगी। इसके अलावा, कारगिल में 10,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला डेयरी प्लांट 25 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया जा रहा है। राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) के तहत लागू की जा रही कारगिल परियोजना 350 किलोवाट सौर ऊर्जा प्रणाली पर चलेगी, जिससे टिकाऊ संचालन सुनिश्चित होगा।
शाह ने कारगिल प्लांट की आधारशिला भी रखी और कई डेयरी पहलों की शुरुआत की, जिनमें मोबाइल मिल्क टेस्टिंग लैब, आधुनिक कूलिंग सिस्टम और डिजिटल ऑटोमेटेड मिल्क कलेक्शन सिस्टम (AMCS) शामिल हैं, ताकि पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाई जा सके।
पशुधन उत्पादकता को मजबूत करने के लिए लेह और कारगिल में 4-4 करोड़ रुपये की लागत से कैटल ब्रीडिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके तहत हर साल 500 उन्नत नस्ल के पशु लाने की योजना है। दीर्घकालिक लक्ष्य अगले 10 वर्षों में क्षेत्र में पशुधन संख्या को लगभग तीन गुना करना है। अनुसंधान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नई नस्लें लद्दाख की अत्यधिक ठंड और कम ऑक्सीजन वाले वातावरण के अनुकूल हों।
वर्तमान में क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 6,000 से 7,000 लीटर दूध की खरीद हो रही है, जिसे बढ़ाकर 21,000 लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। लद्दाख मिल्क फेडरेशन नेटवर्क 28 गांवों तक फैल चुका है और इसे पशुपालन के लिए उपयुक्त 85 प्रतिशत गांवों तक पहुंचाने की योजना है।
डेयरी क्षेत्र में पहले ही उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। किसानों की संख्या 74 से बढ़कर लगभग 1,700 हो गई है और किसानों को कुल भुगतान 15 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। मौजूदा इकाइयां प्रतिदिन लगभग 500 किलोग्राम पनीर और 1,000 किलोग्राम दही का उत्पादन कर रही हैं।
क्षेत्र में भारतीय सेना और आईटीबीपी के लगभग 18,000 जवान तैनात हैं, जिनके साथ आपूर्ति समझौते डेयरी उत्पादों के लिए निरंतर बाजार उपलब्ध कराएंगे। अधिकारियों ने कहा कि ये पहल आत्मनिर्भर भारत के विजन के तहत आत्मनिर्भर लद्दाख की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।