एपीडा की पहल से असम से ब्रिटेन और इटली को जीआई टैग वाले जोहा चावल का निर्यात

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने असम से जीआई टैग प्राप्त जोहा चावल की 25 मीट्रिक टन की पहली खेप का निर्यात इंग्लैंड और इटली को कराने में सहयोग किया है। इस पहल का उद्देश्य भारत के जीआई टैग वाले कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना, पूर्वोत्तर क्षेत्र से कृषि निर्यात को मजबूत करना तथा किसानों को बेहतर बाजार पहुंच और मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित करना है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने असम से ब्रिटेन और इटली को जीआई टैग वाले 25 मीट्रिक टन जोहा चावल की पहली निर्यात खेप भेजने में सहायता की है। यह खेप असम सरकार के कृषि विभाग के सहयोग से गुरुवार को रवाना की गई।

असम की एक स्वदेशी सुगंधित किस्म, जोहा चावल को 2017 में जीआई टैग प्राप्त हुआ। अपनी विशिष्ट सुगंध, महीन दानेदार बनावट और समृद्ध स्वाद के लिए जाना जाने वाला यह चावल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाजारों में पहचान अर्जित कर रहा है।

असम में लगभग 21,662 हेक्टेयर क्षेत्र में जोहा चावल की खेती की जाती है, जिसका वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान अनुमानित उत्पादन लगभग 43,298 मीट्रिक टन रहा है। प्रमुख उत्पादक जिलों में नागांव, बक्सा, गोलपारा, शिवसागर, माजुली, चिरांग और गोलाघाट शामिल हैं, जो निर्यात विस्तार के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने की संभावना प्रदान करते हैं।

जोहा चावल का सैंपल।

एपीडा जोहा चावल की वैश्विक उपस्थिति को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। इससे पहले प्राधिकरण ने जीआई-टैग वाले एक मीट्रिक टन जोहा चावल के वियतनाम और दो मीट्रिक टन मध्य पूर्वी देशों - कुवैत, बहरीन, कतर, ओमान और सऊदी अरब को निर्यात की सुविधा प्रदान की थी।

असम के कृषि मंत्री अतुल बोरा ने निर्यात खेप को झंडी दिखाकर रवाना किया। यह निर्यात एपीडा में पंजीकृत निर्यातक मेसर्स सेफ एग्रीट्रेड प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता द्वारा किया जा रहा है। खेप की प्रोसेसिंग और पैकिंग असम के गुवाहाटी स्थित प्रतीक एग्रो फूड प्रोसेसिंग में की गई है।

यह पहल भारत से जीआई-टैग वाले कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने और उत्पादकों तथा अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच बाजार संबंधों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ उत्तर पूर्वी क्षेत्र से कृषि निर्यात का विस्तार करने और किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए एपीडा के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।